यूरोपीय देशों ने प्रतिबंध लगाकर किया खुद का नुकसान, भारत-चीन भर रहे रूस का खजाना, कमाए 24 अरब डॉलर
भारत और चीन ने रूस से बेतहाशा तेल खरीदा है जिससे रूस को काफी सहारा मिला है। रूस ने आक्रमण के बाद शुरुआती तीन महीनों में चीन और भारत को ईंधन बेचकर 24 अरब डॉलर कमाए हैं।
नई दिल्ली, 08 जुलाईः यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद ऐसा माना जा रहा था कि इससे रूस आर्थिक रूप से कमजोर पड़ जाएगा और इस देश की कमर टूट जाएगी। लेकिन भारत और चीन ने रूस से बेतहाशा तेल खरीदा है जिससे रूस को काफी सहारा मिला है। रूस ने आक्रमण के बाद शुरुआती तीन महीनों में चीन और भारत को ईंधन बेचकर 24 अरब डॉलर कमाए हैं। यह दर्शाता है कि कैसे उच्च वैश्विक कीमतें अमेरिका और यूरोप द्वारा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दंडित करने के प्रयासों को सीमित कर रही हैं।

प्रतिबंध से बढ़े तेल के दाम
चीन ने मई के अंत तक तीन महीनों में रूसी तेल, गैस और कोयले पर 18.9 बिलियन डॉलर खर्च किए, जो कि पिछले एक साल की तुलना में लगभग दोगुना है। इस बीच, भारत ने इसी अवधि में 5.1 अरब डॉलर का भुगतान किया, जो एक साल पहले के मूल्य से 5 गुना अधिक है। रूस ने भारत औऱ चीन को ईंधन बेचकर मात्र 3 महीने में 2021 में हासिल कुल कमाई से 13 बिलियन डॉलर अधिक कमाया है। पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से तेल के दाम बढ़े चुके हैं, इससे पूरी दुनिया में महंगाई में भारी इजाफा हुआ है। वहीं आने वाले वक्त में कई देशों के मंदी में चले जाने का खतरा बन गया है।

बीते साल की तुलना में बढ़ी तेल की कीमतें
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की लीड एनालिस्ट लॉरी माइलविर्टे ने कहा, चीन पहले से ही रूस से वह हर जरूरी सामान खरीद रहा है, जिसे वह पाइपलाइन या बंदरगाहों से निर्यात कर सकता है। लॉरी यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस की ईंधन सप्लाई को ट्रैक कर रही हैं। लॉरी का कहना है, भारत अटलांटिक महासागर से पोत के जरिये तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। हालिंक उन्होंने आगे कहा कि यह दौड़ किसी भी समय खत्म हो सकती है। पिछले साल की तुलना में तेल की कीमतें बहुत अधिक है। यहां तक कि रूस खरीदारों को लुभाने के लिए तेल पर छूट भी दे रहा है।

जून में और तेल खरीदने लगा चीन
लॉरी माइलविर्टे ने कहा कि जून में चीन ने तेल की खरीद बढ़ा दी है। भारत ने भी रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों के बाद भी तेल खरीदना जारी रखा है। आने वाले समय में भारत, रूस से तेल की खरीद बढ़ा सकता है, क्योंकि 2022 के अंत में रूस के तेल पर यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंध लागू होने जा रहे हैं। मिलविर्टे ने कहा कि प्रतिबंधों के बाद से यूरोपीय देशों में तेल की खरीद कम हो रही है, वहीं, रूस ने कुछ यूरोपीय देशों में गैस की सप्लाई बंद कर दी है।

चीन और भारत को मिली भारी छूट
रूस का चीन और भारत के साथ लंबे समय से व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। वह इन दोनों देशों को तेल पर भारी मात्रा में छूट दे रहा है। इसके साथ ही कारोबार को बनाए रखने के लिए स्थानीय मुद्राओं में भुगतान भी स्वीकार कर रहा है। फिलहाल चीन दुनिया में तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। चीन में पाइपलाइन के जरिये तेल की सप्लाई की जाती है। चीन में कोरोना लॉकडाउन की वजह से 2022 के शुरुआती महीनों में बेशक तेल के आयात पर असर पड़ा हो, लेकिन फिर भी चीन ने रूस से तेल खरीदने में कटौती नहीं की और तेल पर बहुत पैसा खर्च किया।

ब्लूमबर्ग ने जारी किया डेटा
ब्लूमबर्ग के शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत में भी रूस के तेल की खपत भारी मात्रा में बढ़ी है। भारत ने युद्ध शुरू होने के बाद से रूस के एनलपीजी गैस की तीन खेप का आयात किया है जबकि पिछले साल एक ही खेप का आयात किया गया था। रायस्टैड एनर्जी एनालिस्ट वेई चेओंग हो ने पिछले महीने कहा था, कई कारणों से भारत, रूस से बहुत ही कम तेल खरीदता था लेकिन यूक्रेन में युद्ध और रूस के तेल पर प्रतिबंधों की वजह से भारत में रूस के तेल का आयात बढ़ा है।












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