UNSC: सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंध झेल रहे देशों को मानवीय सहायता देने के प्रस्ताव से भारत ने बनाई दूरी
मानवीय सहायता प्रयासों को प्रतिबंधों से छूट देने के पक्ष में 14 मतों से पारित प्रस्ताव पर भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अनुपस्थित रहा।

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भारत मानवीय सहायता को प्रतिबंधों से छूट देने वाले UNSC के प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहा। परिषद के 15 में से 14 सदस्यों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि भारत एकमात्र ऐसा देश रहा जो मतदान में गैरहाजिर रहा। इस प्रस्ताव को अमेरिका और आयरलैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसके तहत सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंधित किए गए देशों में मानवीय सहायता की छूट देने का प्रस्ताव था।

भारत छोड़ सभी देश प्रस्ताव के पक्ष में
भारत ने दिसंबर के महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता ग्रहण की है, अनुपस्थित रहने वाला एकमात्र देश था। भारत को छोड़कर सभी UNSC सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। भारत इस प्रस्ताव से दूर रहा क्योंकि इसमें पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद सहित दुनिया भर में प्रतिबंधित संस्थाओं को मानवीय सहायता की अनुमति दी गई थी। प्रस्ताव में कहा गया है कि किसी भी देश की मानवीय सहायता के समय फंड व अन्य वित्तीय संपत्तियों के अलावा वस्तुओं और सेवाओं का भुगतान आवश्यक है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध समिति ओर संपत्ति फ्रीज का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

रुचिरा कंबोज ने रखा पक्ष
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत के पड़ोसी देश के अलावा ब्लैकलिस्ट किए गए आतंकवादी संगठन इस तरह की छूट का फायदा फंडिंग और सदस्यों की भर्ती के लिए उठा सकते हैं। कंबोज ने कहा कि भारत, इस संकल्प पर बातचीत में रचनात्मक रूप से शामिल है, जो मानवीय सहायता के समय पर वितरण के समर्थन में या बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने वाली अन्य गतिविधियों का समर्थन करने के लिए प्रतिबंधों से अलग करते हैं।

छद्म रूप अपनाकर संस्थाओं को धोखा देते हैं आतंकी संगठन
रुचिरा ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि इस प्रस्ताव को लेकर हमारी चिंताएं हैं। हमारे पड़ोस में आतंकवादी समूहों के कई मामले भी सामने आए हैं, जो इस परिषद द्वारा सूचीबद्ध आतंकवादी समूह शामिल हैं। इन्होंने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए खुद को मानवतावादी संगठनों और नागरिक समाज समूहों के रूप में खुद को प्रस्तुत किया। जबकि ये आतंकवादी संगठन धन जुटाने और लड़ाकों की भर्ती के लिए मानवीय सहायता क्षेत्र का औजार बनाते हैं।
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