सऊदी अरब: बिना सैलरी के देश लौटने को नहीं हैं तैयार, हजारों कामगार

अदिसिया लेबर कैंप सऊदी अरब। सऊदी अरबमें काम करने वाले भारतीय और अन्य देशों के कामगारों ने बिना बकाया पैसा मिले वापस लौटने से इंकार कर दिया है।

सऊदी अरब की खराब अर्थव्यवस्था के कारण भारतीय कामगारों समेत विदेशों के लाखों कामगारों की हालत इस समय काफी खराब है। सरकार ने कामगारों को उनके वतन लौटने के लिए मुफ्त में हवाई यात्रा का विकल्प दिया था। पर कामगारों ने ​इस​ विकल्प को मानने से मना कर दिया है।

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अदिसिया लेबर कैंप में फंंसे हुए कामगारों की हालत खराब

सऊदी अरब के अदिसिया लेबर कैंप में फंंसे हुए कामगारों की हालत खराब है। उनके पास कुछ ही पैसे बचे हैं। जबकि खाने,पीने और मेडिकल की सीमित संसाधन ही उनके पास हैं। सऊदी अरब में करीब 1 करोड़ विदेशी कामगार काम करते हैं। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था भी इन कामगारों पर निर्भर है।

कदीसिया लेबर कैंप में रहने वाले पाकिस्तान के 35 वर्षीय सरदार नसीर ने हम यहीं पर एक साल, दो साल इंतजार करेंगे। हम अपने पैसे का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही पैसा हमको मिलेगा हम वापस अपने देश लौट जाएंगे। नसीर ने बताया कि आठ महीने से उनको तनख्वाह नहीं मिली है। नसीर की तरह ही इस कैंप में रहने वाले 2000 कामगार हैं।

एक छोटे से कमरे में 8 लोग सोते

लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री साद हारिरी की परिवारिक कंपनी ओगर है। इस कंपनी में काम करने वाले कामगारों की हालत भी वैसी ही है। जब इस स्टोरी के लिए उनसे बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया।

ओगर कंपनी ने जुलाई के बाद से ही अपने कामगारों को खाना, बिजली, मेडिकल सर्विसेज सभी को देना बंद कर दिया था। ​कदिसियाह कैंप में रहने वाले कामगारों की हालत और ज्यादा खराब है।

इस कैंप में एक छोटे से कमरे में 8 लोग सोते हैं और उनके साथ बिल्लियां, कॉकरोच ही नहीं ​बल्कि गंदी चादरें होती हैं। सऊदी अरब के मंत्रालय की ओर से मुहैया कराए जा रहे खाने से ही वो अपना काम चलाते हैं।

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कामगारों के पास पैसे की कमी

इन कैंपों में पीने का साफ नहीं होता है। पानी को साफ किए जाने वाल फिल्टर एक साल से बदला तक नहीं गया है। अब यहां कामगारों के पास पैसे की कमी है और उन्हें बोतल बंद पानी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। सउदी ओगर में करीब 30,000 कामगार काम करते हैं। इस कंपनी का काम रियाद में बड़े मेगा प्रोजेक्ट बनाना था। इस कंपनी ने 500 होटल का रिट्ज कॉर्लटन होटल और महिलाओं के लिए बनी प्रिंसेस नूरा बिंट अब्दुलरहमान यूनिवर्सिटी को बनाया है।

सऊदी अरब के सउदी बिनलादिन ग्रुप के साथ-साथ यह कंपनी सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है जो यहां पर कंस्ट्रक्शन के काम में बड़े पैमाने पर काम करती है। पर इस समय दोनों ही कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों में हुई गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।

6200 भारतीय कर्मचारी सैलरी के मिलने का इंतजार कर रहे

इन कंपनियों के प्रोजेक्ट रूक गए हैं और इनका मुनाफा कम हो गया है। इसका सबसे ज्यादा खमियाजा इन कंपनियों में काम करने वाले कामगारों को भुगतना पड़ रहा है।

कामगारों की समस्या को दूरे करने के लिए भारत, पाकिस्तान और ​फिलीपींस ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को रियाद भेजा है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि करीब 6200 भारतीय कर्मचारी कैंपों को रहते हुए अपनी सैलरी के मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

दो सप्ताह पहले ही भारतीय अधिकारियों ने किंग सलमान के सामने अपनी ​चिंता जाहिर की थी। किंग सलमान ने इसके बाद करीब 100 मिलियन रियाल की मदद पाकिस्तान, फिलीपींस, भारत और बांग्लादेश के कामगारों के लिए जारी की थी।

सऊदी अरब के ​मंत्री मुफरेज अल-हकबानी ने रॉयटर्स को बताया कि सउदी बिनलादिन ग्रुप समेत कई कंपनियां अब लोगों का बकाया वेतन वापस कर रही हैं। बिनलादिन समूह की कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि सिंतबर तक सारा बकाया वापस कर दिया जाएगा।

अब सिर्फ ओगर ही एक अकेली ऐसी कंपनी ने जिसने बड़े पैमाने पर कामगारों का वेतन रोक रखा है। अल-हकबानी ने कहा कि अगर कंपनी लोगों के पैसे का भुगतान नहीं करती है तो हम इस कंपनी को कोर्ट में ले जाएंगे और वहां पर मामले का हल निकालेंगे।

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