आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका में बुरी तरह बिगड़े हालात, पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी-लंबी कतारें, दो मरे
मजबूत राष्ट्रपति होने का दावा करने वाले गोतबाया राजपक्षे के नेतृत्व में बनी श्रीलंका की सरकार देश को बचाने में बुरी तरह से फेल साबित होती दिखाई दे रही है...
कोलंबो, मार्च 21: ऐतिहासिक आर्थिक संकट में फंसे भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका की स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ गई है और श्रीलंका में पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी लंबी कतारें देखी जा रही हैं, क्योंकि पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो रही हैं। वहीं, श्रीलंका के अधिकारियों ने कहा है कि, ईंधन के लिए लंबी कतारों में इंतजार करते हुए श्रीलंका में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है। श्रीलंका में रोजमर्रा की सामानें काफी ज्यादा महंगी हो चुकी हैं और दूध की कीमत इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है, कि लोग 100-100 ग्राम दूध खरीदने पर मजबूर हैं।

पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें
श्रीलंका की वाणिज्यिक राजधानी कोलंबो के पुलिस विभाग प्रवक्ता नलिन थल्डुवा ने रविवार को कहा कि, देश के दो अलग-अलग हिस्सों में पेट्रोल और मिट्टी के तेल की प्रतीक्षा कर रहे दो लोगों की मौत हो हई है, जिनकी उम्र करीब 70 साल के आसपास थी। श्रीलंका से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में पिछले कई हफ्तों से पेट्रोल और डीजल के लिए लंबी लंबी कतारें लगी हुई हैं और श्रीलंका अपने इतिहास में सबसे भयानक आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश में विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने के बाद हर एक सामान की कीमत आम आदमी के पहुंच से दूर हो चुकी है और सब्जियों की कीमत भी श्रीलंका में 200- 300 रुपये के दर को पार कर चुकी है। पुलिस महकमे के मुताबिक, 'मरने वाले दोनों बुजुर्गों में एक 70 साल के बुजुर्ग ऑटो चलाते थे, जबकि दूसरे बुजुर्ग की उम्र 72 साल थी और दोनों करीब 4 घंटे से तेल लेने के लिए लाइन में लगे थे।'

तेल की कमी के बीच ब्लैकमेलिंग
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, मोटर चालकों को पेट्रोल भरने के लिए पेट्रोल स्टेशनों के बाहर घंटों तक इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है और सरकार ने रोलिंग ब्लैकआउट लगाया है, क्योंकि बिजली उपयोगिताएं मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी तेल का भुगतान करने में असमर्थ हैं। वहीं, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि देश में कई स्थानों पर रसोई गैस खरीदने के लिए तेज धूप में खड़ी कई महिलाएं बेहोश हो गई थीं। पेट्रोलियम जनरल एम्प्लॉइज यूनियन के अध्यक्ष अशोक रानवाला ने कहा कि, रविवार को श्रीलंका ने कच्चे तेल के स्टॉक खत्म होने के बाद अपनी एकमात्र ईंधन रिफाइनरी में परिचालन को सस्पेंड कर दिया है। वहींस देश के ऊर्जा मंत्रालय से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं दी गई है।

तेल और गैस की कीमत आसमान पार
श्रीलंका में महंगाई बढ़ने के साथ ही देश में रसोई गैस की कीमत भी काफी ज्यादा बढ़ गई है और एक रसोई गैस की कीमत 1500 श्रीलंकन रुपये के करीब है। सिलेंडर महंगा होने के बाद लोग अब खाना बनाने के लिए मिट्टी के तेल का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं। आपको बता दें कि, श्रीलंका जनवरी के बाद से तेजी से महंगे ईंधन शिपमेंट के भुगतान के लिए डॉलर हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है और देश में विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी में 2.31 अरब डॉलर तक गिर गया है। वहीं, फरवरी में, श्रीलंका की मुद्रास्फीति 15.1 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो एशिया में सबसे अधिक थी, वहीं, खाद्य महंगाई दर बढ़कर 25.7 प्रतिशत हो गई है। इस महीने की शुरुआत में, श्रीलंका के केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट के मुबाकि, एक डॉलर के मुकाबले श्रीलंकन करेंसी की वैल्यू 275 हो गई थी, जो काफी ज्यादा है।

दिवालिया होने के कगार पर पहुंचा
मजबूत राष्ट्रपति होने का दावा करने वाले गोतबाया राजपक्षे के नेतृत्व में बनी श्रीलंका की सरकार देश को बचाने में बुरी तरह से फेल साबित होती दिखाई दे रही है और कोविड संकट के साथ साथ बेरोजगारी, महंगाई को संभालने में श्रीलंका की सरकार बुरी तरह से फेल हो गई है। इसके साथ ही सरकार के खर्च में काफी ज्यादा बढ़ोतरी और राजस्व में काफी ज्यादा कमी होने से देश की स्थिति काफी चरमरा गई है। इसके साथ ही श्रीलंका के ऊपर विशाल कर्ज का बोझ भी है, जिसने भारत केइस पड़ोसी देश की स्थिति को और भी ज्यादा विकराल कर दिया है।

चीन के कर्ज के बोझ में फंसा है श्रीलंका
सबसे ज्यादा खतरनाक बात ये है कि, श्रीलंका ने चीन से विशाल कर्ज ले रखा है और ड्रैगन किसी भी इस मौके को छोड़ने के मूड में नहीं है। चीन के साथ साथ ही श्रीलंका ने कई अन्य देशों से भी विशाल कर्ज ले रखा है, लिहाजा देश का मुद्रा भंडार सबसे नीचले स्तर पर आ गया है और इन सबके बीच, सरकार द्वारा घरेलू ऋणों और विदेशी बांडों का भुगतान करने के लिए पैसे छापने से देश मेंमहंगाई का विस्फोट हो गया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि महामारी की शुरुआत के बाद से श्रीलंका में करीब 5 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं, जो गरीबी से लड़ने में पांच साल की प्रगति ना के बराबर है।

राजपक्षे परिवार ने किया देश बर्बाद?
पिछले कई सालों से श्रीलंका की सत्ता पूरी तरह से राजपक्षे परिवार के पास है। श्रीलंका के राष्ट्रपति एक भाई गोटाभाया राजपक्षे हैं, तो देश के प्रधानमंत्री दूसरे भाई महिन्द्रा राजपक्षे हैं और देश के वित्तमंत्री तीसरे भाई हैं। वहीं, इस परिवार के पास श्रीलंका में असीम शक्तियां हैं और विश्लेषकों का कहना है कि, राजपक्षे परिवार की गलत आर्थिक नीतियां और चीन के साथ करीबी रिश्ता ने देश का बेड़ागर्ग कर दिया है। कोविड महामारी की वजह से देश में पर्यटन उद्योग पूरी तरह से तबाह हो चुका है और बढ़ते सरकारी खर्च और राजस्व में कमी की वजह से सरकार का खजाना पूरी तरह से खाली हो चुका है और अब श्रीलंका के पास पैसे ही नहीं हैं, कि देश में खाद्यान्न खरीदा जाए।

राजपक्षे परिवार ने चीन के जाल में देश को फंसाया?
श्रीलंका की सरकार ने देश को कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंसा दिया है और खासकर चीन से कर्ज लेने की वजह से अब देश की नीति को बहुत हद तक चीन कंट्रोल करने लगा है। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के ऊपर चीन का करीब 5 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज है और पिछले साल भी श्रीलंका की सरकार ने देश को आर्थिक संकट से बचाने के लिए चीन से एक अरब डॉलर काऔर कर्ज लिया था, लिहाजा अब बारी चीन से लिए गये कर्ज के भुगतान की है, जिसे चुकाने में श्रीलंका पूरी तरह से असमर्थ है। श्रीलंका सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक साल में देश की सरकार और देश के निजी सेक्टर को कम के कम 7 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है, जिसमें 50 करोड़ डॉलर का इंटरनेशनल सॉवरेन बॉन्ड भी शामिल है। लिहाजा श्रीलंका के ऊपरदिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है।












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