सु्न्नी इत्तेहाद काउंसिल में शामिल होंगे इमरान खान के जीते निर्दलीय सांसद, जानिए फैसले का मतलब?
Imran Khan News: इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए नई घोषणा में कहा है, कि 8 फरवरी को हुए चुनाव में जीते हुए उसके सभी उम्मीदवार सु्न्नी इत्तेहाद काउंसिल में शामिल होंगे।
PTI ने पहले फैसला किया था, कि नेशनल असेंबली और पंजाब प्रांतीय असेंबली के लिए चुने गए उसके सदस्य, शिया पार्टी मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (MWM) में शामिल होंगे, जबकि खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) में चुने गए उसके सभी विधायक जमात-ए-इस्लामी (जेआई) का का हिस्सा बनेंगे, जो एक कट्टर सुन्नी धार्मिक पार्टी है।

सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल क्या है?
जबकि, अब जिस सु्न्नी इत्तेहाद काउंसिल में सभी निर्दलीय सांसद शामिल होंगे, वो एक धूर दक्षिणपंथी कट्टर इस्लामिक संगठन है। ये पाकिस्तान में इस्लामी राजनीतिक और धार्मिक दलों का एक गठबंधन है, जो सुन्नी इस्लाम के स्कूल के अनुयायियों का प्रतिनिधित्व करता है।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के चेयरमैन बैरिस्टर गौहर खान ने MWM और SIC के नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है, कि "नेशनल असेंबली, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा विधानसभाओं में हमारे उम्मीदवार सुन्नी इत्तेहाद परिषद में शामिल होंगे।"
वहीं, इस दौरान पीटीआई महासचिव उमर अयूब खान, सूचना सचिव रऊफ हसन और एमडब्ल्यूएम प्रमुख अल्लामा राजा नासिर अब्बास और एसआईसी के अध्यक्ष साहिबजादा हामिद रजा उपस्थित थे। उमर अयूब खान वो शख्स हैं, जिन्हें इमरान खान ने अपनी पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार नामित किया है।
पीटीआई चेयरमैन ने कहा, कि "हमारे उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे हमारे पास जमा कर दिए हैं और उनकी सहमति से आज हम घोषणा कर रहे हैं, कि पीटीआई समर्थित निर्दलीय सुन्नी इत्तेहाद परिषद में शामिल हो रहे हैं।"
8 फरवरी के चुनाव के नतीजों की अधिसूचना के बाद जीतने वाले स्वतंत्र उम्मीदवारों को चुनावी नतीजे जारी होने के तीन दिनों के भीतर एक पार्टी में शामिल होना था।
सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल को क्यों चुना गया?
दरअसल, पाकिस्तान में 70 सीटें ऐसी हैं, जो आरक्षित हैं। इनमें से 60 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, जबकि 10 सीटें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित होती हैं। लेकिन, इन 70 सीटों पर सीधे चुनाव नहीं होते। बल्कि, नेशनल असेंबली की 266 सीटों पर सीधे हुए चुनाव में जीती पार्टियों को उनकी जीती सीटों की संख्या के हिसाब से आरक्षित सीटें आवंटित की जाती हैं।
अब इमरान खान की पीटीआई ने 92 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि नवाज शरीफ की पीएमएल-एन ने 79 सीटें और बिलावल भुट्टो की पीपीपी ने 54 सीटें जीती हैं।
अगर, इमरान खान की पार्टी के सांसद निर्दलीय ही रहते, तो आरक्षित सीटों में से उन्हें एक भी सीट नहीं मिलता, लेकिन अब एक बैनर के नीचे जुटने के बाद वो चुनाव आयोग को लिखित में इसकी जानकारी देंगे, और फिर आरक्षित 70 सीटों का बंटवारा होगा। इसीलिए आरक्षित सीटें हासिल करने के साथ साथ अपने सांसदों को खरीद-फरोख्त से सुरक्षित करने के लिए इमरान खान की पार्टी ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल से जुड़ने का फैसला किया है।
पीटीआई के चेयरमैन ने कहा है, कि उनके सभी निर्दलीय सांसदों ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल में शामिल होने वाले कागजातों पर दस्तखत कर दिए हैं और अब ये लिस्ट चुनाव आयोग को सौंप दी जाएगी।
आपको बता दें, कि एक बार किसी दल में शामिल होने के बाद निर्दलीय सांसद पाला नहीं बदल सकते हैं।
पीटीआई के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार उमर अयूब खान ने कहा, कि राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का फैसला आरक्षित सीटें हासिल करने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा, कि सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल में आने के बाद संसद के अंदर उनकी ताकत बढ़ेंगी।
दरअसल, पीटीआई की अब पहली कोशिश संसद में अपनी शक्ति जुटाकर इमरान खान, उनकी पत्नी बुशरा बीबी, पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, परवेज इलाही और अन्य नेताओं को जेल से बाहर निकालना है और इसके लिए पीटीआई को सरकार में शामिल होना होगा, लेकिन पार्टी के पास संख्या बल नहीं है।
पाकिस्तान में नई सरकार पर सस्पेंस
पाकिस्तान में अगली सरकार बनाने के लिए सस्पेंस जारी है और पार्टियों के बीच अभी तक गठबंधन नहीं हो पाया है।
इमरान खान पहले ही कह चुके हैं, कि वो ना तो नवाज शरीफ की पीएमएल-एन के साथ गठबंधन करेंगे और ना ही बिलावल भुट्टो की पीपीपी के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे और ऐसा किए बिना इमरान खान की पीटीआई सरकार बना नहीं सकती है।
दूसरी तरफ, पीएमएल-एन और पीपीपी में भी समझौता नहीं हो पा रहा है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि आखिर में इन्हीं दोनों पार्टियों को मिलकर सरकार बनाना होगा, क्योंकि तीसरा रास्ता और कोई है नहीं। बिलावल भले ही कह चुके हैं, कि वो प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते हैं, लेकिन अंदर की इच्छाएं हिलोर मार रही हैं, लिहाजा अलग अलग शर्तों के साथ पीपीपी सामने आ रही है।
वहीं, नवाज शरीफ की पार्टी के पास भी कोई विकल्प नहीं है। पाकिस्तानी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से कहा है, कि सरकार बनाने के लिए अंदरखाने बैठकें जारी हैं और सरकार के गठन और स्वरूप पर बातचीत की जा रही है। हालांकि, इसमें वक्त लग रहा है, लेकिन सरकार में अंत में शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो को ही एक साथ आना होगा।
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