इमरान खान का 'दिन का सपना', बातचीत के लिए भारत से मांगा कश्मीर पर रोडमैप, अफगानिस्तान पर 'दलाली' शुरू
कश्मीर को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने फिर से बयान दिया है। वहीं, अफगानिस्तान को लेकर भी इमरान खान ने बयान दिया है।
इस्लामाबाद, जून 05: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपने देश के लोगों के सामने सीना ठोंककर झूठ बोलने के लिए जाने जाते हैं और वो कश्मीर के मुद्दे पर बार बार झूठ बोल रहे है। एक तरफ पाकिस्तान की मीडिया कहती है कि पाकिस्तान की सरकार ने कश्मीर पर सुलह कर लिया है और अब कश्मीर पाकिस्तान के लिए कोई मसला नहीं रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हर दूसरे दिन कश्मीर राग अलापते रहते हैं। इस बार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा है कि वो भारत से बात करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते भारत कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए कोई रोडमैप बताए।

कश्मीर पर इमरान खान का सपना
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि 'हां, हम भारत से बात करने के लिए तैयार हैं लेकिन भारत पहले कश्मीर की पुरानी स्थिति बहाल करने के लिए रोडमैप बताए। अगर भारत के पास कोई रोडमैप है तो हम बात करने के लिए तैयार हैं।' स्थिति ये है कि भारत ने अब इमरान खान के किसी बयान पर प्रतिक्रिया तक देना बंद कर दिया है लेकिन नया पाकिस्तान बनाने का वादा कर पाकिस्तान में दूध की कीमत 150 रुपये लीटर पहुंचा देने वाले इमरान खान अब भी कश्मीर नाम का चूरन पाकिस्तानी जनता को खिलाए जा रहे हैं। आपतो बता दें कि भारत सरकार ने देश की संसद में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विधेयक पेश किया था, जिसे देश की संसद ने बहुमत के साथ पास कर दिया था।

पहले धमकी अब मिमियाये इमरान!
भारत ने जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया था उस वक्त पाकिस्तान में काफी बवाल मचा था। इमरान खान ने भारत को एटमी मुल्क होने का डर दिखाने की कोशिश की थी तो पाकिस्तान के विदेश मंत्री भारत के खिलाफ एक देश से दूसरे देश भागे भागे फिर रहे थे। वहीं, पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल बाजवा ने भारत के नाम पर 3 साल का एक्सटेंशन ले लिया। बाजवा ने इमरान खान से कहा था कि भारत पाकिस्तान पर बस आक्रमण करने ही वाला है और जल्दी से मेरी रिटायरमेंट की सीमा बढ़ाईये। जिसके बाद इमरान खान ने बाजवा को 3 साल का एक्सटेंशन दे दिया। लेकिन, ना तो इमरान खान की एटमी धमकी काम आई और ना ही शाह महमूद कुरैशी की उछलकूद। रही बात जनरल बाजवा की, तो उन्होंने भारतीय सेना के साथ समझौता कर लिया और कश्मीर बॉर्डर पर सीजफायर का ऐलान हो गया। लेकिन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अभी भी कश्मीर के मुद्दे पर फुदक रहे हैं।

अफगानिस्तान को लेकर 'दलाली'
अफगानिस्तान को लेकर भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक तरह से चीन की दलाली करनी शुरू कर दी। ऐसा हम बेवजह नहीं कह रहे हैं। बल्कि इमरान खान के बयान के आधार पर ही कह रहे हैं। इमरान खान ने दो दिन पहले कहा था कि 'अगर अफगानिस्तान को शांति चाहिए तो उसे चीन से दोस्ती कर लेनी चाहिए'। अब सोचिए, ये चीन की दलाली नहीं है तो और क्या है। इमरान खान कभी सीपीईसी के मुद्दे पर श्रीलंका जाकर चीन की दलाली करना शुरू कर देते हैं तो कभी ये अफगानिस्तान को लेकर चीन की दलाली करना शुरू कर देते हैं। आप खुद सोचिए, भला किसी देश का मुखिया, किसी और देश में शांति बहाली के लिए उसे किसी तीसरे देश से अच्छा संबंध बनाने का परोक्ष या प्रत्यक्ष तौर पर दवाब कैसे डाल सकता है। साफ जाहिर है, पूरे पाकिस्तान को चीन की जेब में गिरवी रखने वाले इमरान खान अब अफगानिस्तान को भी चीन का 'गुलाम' बनाना चाहते हैं।












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