चीन के BRI प्रोजेक्ट से अफ्रीका के कई देश हो रहे कंगाल, रिपोर्ट में शी जिनपिंग के खतरनाक इरादों का खुलासा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव का हिस्सा बनना अफ्रीकी देशों को महंगा पड़ रहा है। चीन BRI प्रोजेक्ट की सफलता के दावे भले कर ले, मगर रिपोर्ट बताते हैं कि हो इसका उल्टा रहा है।

चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव एक बार फिर से चर्चा में है। इसका उद्देश्य विश्व में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शुरू करना है जो बदले में चीन के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाएगा। लेकिन इस परियोजना को लेकर अफ्रीकी देशों में सवाल खड़े हो रहे हैं।
केन्या स्थित मीडिया कंपनी कैपिटल न्यूज ने कहा कि चीन बार-बार यह दावा करता है कि बीआरआई के तहत बीजिंग की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से अफ्रीका को लाभ हुआ है लेकिन उनके प्रतिकूल प्रभाव देश के पर्यावरण के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी देखे जा सकते हैं।
आपको बता दें कि रेलवे, बंदरगाह, राजमार्ग और अन्य बुनियादी ढांचे जैसी बीआरआई परियोजनाओं में सहयोग करने के लिए 140 से अधिक देशों ने चीन के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं। कैपिटल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का दावा है कि अफ्रीकी देशों को इस परियोजना से बहुत लाभ हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन का ये विकास अफ्रीकी देशों को महंगा पड़ रहा है और वहां के वातावरण को दूषित कर रहा है। रिपोर्ट का मानना है कि लंबे वक्त में इ योजना के नुकसान अधिक हैं। आपको बता दें कि चीन की इस परियोजना पर घोटाले, भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल चीन का कमजोर देशों को अपने कर्जजाल मे फांसने का उपकरण भर है जिसमें कर्जों की शर्तें पूरी कर पाना लगभग असंभव है।
एक नए अध्ययन में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि इस कार्यक्रम में शामिल देशों को कर्ज बहुत ज्यादा हो गया है। चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना ने दुनिया के अधिकांश निम्न-मध्यम वर्ग वाले देशों को कंगाल बना दिया है।
इस योजना पर हामी भरने के बाद कम आय वाले देशों की आर्थिक स्थिति गंभीर और बदतर हो गई है। ऐसा कहा जा रहा है कि चीन के बीआरआइ प्रोजेक्ट पर जिन देशों ने हस्ताक्षर किया, उन सबको इस प्रोजेक्ट के लिए महंगी ब्याज दरों पर लोन दिया गया।
इसके साथ ही इन देशों पर कई ऐसी शर्तें थोप दीं, जिससे निम्न मध्यम वर्ग वाले देशों की आर्थिक हालत खस्ता होने लगी और महंगाई ने उनकी कमर तोड़ दी। कम आय वाले देशों पर 2022 में चीन का 37% कर्ज बकाया है। यह दुनिया के बाकी हिस्सों में द्विपक्षीय कर्ज का 24% है।
श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव जैसे देशों में आर्थिक स्थिति के बदतर होने की एक वजह चीन को भी बताया जाता है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आने वाले वक्त में अफ्रीकी देशों में भी कुछ ऐसा संकट देखने को मिल सकता है।
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