कारोबार से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक, जनता से लेकर PLA तक, शी जिनपिंग चीन के एकछत्र राजा कैसे बने?
शी जिनपिंग ने हर एक तबके के लिए नियम बना दिया है। यानि, चीन में ऑनलाइन गेम खेलने से लेकर आपको अपने पसंद के हर काम करने के लिए शी जिनपिंग से इजाजत लेनी पड़ेगी।
हांगकांग, सितंबर 13: राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने पहले अपनी पार्टी पर पकड़ मजबूत की और उसके बाद वो पीएलए में अपने वफादारों को शीर्ष पदों पर बिठाकर अपनी सत्ता को अटूट बनाने की कोशिश में लग गये। शी जिनपिंग ने अपने शासनकाल के दौरान में पार्टी से लेकर चीन की जनता तक को, इतने कानूनों में बांध दिया, कि अगर किसी को ऑनलाइन कम्प्यूटर गेम खेलने का मन होता है, तो उसके लिए भी उसे शी जिनपिंग से इजाजत लेनी पड़ती है। आखिर कम्यूनिस्ट पार्टी किस तरह से शासन करती है, शी जिनपिंग किस तरह से अपनी पार्टी समेत पूरे चीन और पीएलए पर अपनी पकड़ को और ज्यादा मजबूत बनाते गये, इसकी एक दिलचस्प कहानी हम आपको बताते हैं।

तानाशाह बनते गये शी जिनपिंग
6 सितंबर को चीन की केन्द्रीय सैन्य आयोग यानि सीएमसी के अध्यक्ष शी जिनपिंग बीजिंग में दुनिया की सबसे बड़ी सेना, पीएलए के पांच सदस्यों को प्रमोशन दे दिया। एक समारोह के दौरान पांच लेफ्टिनेंट जनरलों को सामान्य रूप से प्रमोशन दिया गया और पीएलए के सर्वोच्च पदों पर उनकी बहाली कर दी। आपको बता दें कि पीएलए में सर्वोच्च पद जनरल का होता है और पीएलए के अलग अलग कमांड में कई जनरल होते हैं। पीएलए ने एक बयान में कहा है कि, "सीएमसी के अध्यक्ष शी जिनपिंग ने सोमवार को चीनी पीएलए के पांच सैन्य अधिकारियों को प्रमोशन दिया है। ये प्रमोशन सामान्य सैन्य रैंक, चीन में सक्रिय सेवा करने वाले अधिकारियों को पीएलए के सर्वोच्च रैंक पर प्रमोशन दिया है। ये प्रमोशन सिर्फ उन अधिकारियों कि दिया गया है, जो जिनपिंग के वफादार हैं। कहा जा रहा है कि पीएलए में शी जिनपिंग के खिलाफ कई आवाजें उठ रही हैं, जिन्हें बहुत तेजी से खामोश किया जा रहा है। प्रमोशन लेने वाले एक लेफ्टिनेंट जनरल हैं वांग हाइजियांग...जिनका मामला काफी दिलचस्प है और उसी से आप जानेंगे कि किस तरह से शी जिनपिंग ने अपने रास्ते के हर कांटे को हटा दिया।

वांग हाइजियांग का दिलचस्प मामला
1963 में सिचुआन में जन्मे वांग हाइजियांग ने पिछले महीने वेस्टर्न थिएटर कमांड का नेतृत्व करते हुए अपना पद संभाला है। इससे पहले, उन्होंने शिनजियगां में सेना का नेतृत्व किया था और इससे पहले वह तिब्बत सैन्य जिले के डिप्टी कमांडर और फिर कमांडर थे। वांग हाइजियांग वही शख्स हैं, जिन्होंने शिनजियांग प्रांत में शी जिनपिंग के कहने पर उइगर मुस्लिमों का नरसंहार करना शुरू किया था और उन्होंने ही तिब्बत में गोली के दम पर दमन प्रक्रिया का आगाज किया था। 2020 में भारत के साथ हिंसक झड़प के बाद पीएलए के 50 से ज्यादा सैनिक मारे गये और उस घटना के बाद भले ही शी जिनपिंग ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झूठ बोला, लेकिन देश के अंदर उनके खिलाफ धीरे-धीरे कई मोर्चे खुलने लगे। यहां तक कि पीएलए में भी कई बड़े अधिकारी शी जिनपिंग के रवैये से नाराज होने लगे और उनके खिलाफ एक मुहिम बनाने लगा। भारत की सीमा पर पिछले एक साल में चौथी बार कमान बदला गया है। हाल ही में जनरल जू किलिंग को पश्चिमी थिएटर कमांड का प्रभारी बनाया गया था, लेकिन सिर्फ 2 महीने में ही उन्हें उनके पद से हटा दिया गया और उनकी जगह शी जिनपिंग ने अपने वफादार वांग हाइजियांग को नई जिम्मेदारी दे दी। उनसे पहले जनरल झांग जुडोंग को 19 दिसंबर 2020 को यह पद दिया गया था।

कौन हैं जनरल हाइजियांग
1977 में चीन की सेना पीएलए में शामिल हुए थे और वियतनाम युद्ध में उन्होंने चीन के लिए अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, युद्ध में चीन हार गया था, बावजूद जनरल हाइजियांग को उनकी बहादुरी के लिए फर्स्ट क्लास मेरिट से सम्मानित किया गया था और फिर वांग लगातार सेना में प्रमोशन पाते रहे और अब सेना के सर्वोच्च पद पर पहुंच चुके हैं। इससे पहले शी जिनपिंग ने उन्हें शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों को कंट्रोल करने भेजा था, जहां कुछ आतंकी घटनाओं को अंजाम देने का आरोप चीन ने मुस्लिमों पर लगाया था। चीन ने बाद में इस बात को माना कि मुस्लिमों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए और कट्टरपंथी सोच में बदलाव लाने के लिए एक सेंटर खोला है। लेकिन, अमेरिका समेत पश्चिमी देशों का आरोप है कि इस डिटेंशन कैंप में उइगर मुस्लिमों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया जाता है। माना जाता है कि डिटेंशन कैंप में हजारों मुस्लिमों की मौत हो चुकी है और डिटेंशन कैंप खोलने का आईडिया जनरल हाइजियांग का ही था और इसके लिए उन्हें शी जिनपिंग का पूर्ण समर्थन हासिल था।

2012 से चल रहा है जिनपिंग का मिशन
शी जिनपिंग ने 2012 से सीएमसी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी औ उसके बाद उन्होंने लगातार अधिकारियों को बदलना शुरू कर दिया। उन्होंने पीएलए के वरिष्ठ सदस्यों के लिए 13 अलग-अलग प्रमोशन कार्यक्रमों का आयोजन किया है और इस दौरान उन्होंने करीब 66 लेफ्टिनेंट जनरलों को जनरल के पदों पर प्रमोशन दिया है। जिसका मतलब है कि शी जिनपिंग ने पीएलए के भीतर कई शीर्ष जनरलों को स्थापित किया है, और जो अब उनकी व्यक्तिगत वफादारी के लिए जिम्मेदार हैं और ये अधिकारी बिना किसी हिचकिचाहट के शी जिनपिंग के कहें का पालन करेंगे। चीन की कमान संभालने के बाद से शी जिनपिंग की प्राथमिकताओं में से एक सैन्य और अर्धसैनिक प्रतिष्ठान को आने लाना था और इसके लिए शी जिनपिंग ने अपने पूर्व वफादारों को जमकर मौका देना शुरू कर दिया। पिछले साल 28 मई को पीएलए नौसेना के मुखर पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल याओ चेंग ने कहा था कि सीसीपी के अधिकारियों के बीच काफी मतभेद हैं, जिसकी वजह से चीन ताइवान पर आक्रमण नहीं कर पाता है। उन्होंने कहा था थि, "पीएलए की आंतरिक समस्याएं गंभीर हैं और यह ताइवान से लड़ाई करने में असमर्थ है।

समाज पर शिकंजा कसते शी जिनपिंग
चीन में पहले भी कभी लोकतंत्र नहीं रहा है, लेकिन शी जिनपिंग ने चीनी समाज को और ज्यादा सख्ती से अपनी मुट्ठी में दबाना शुरू कर दिया। शी जिनपिंग ने शिक्षा के क्षेत्र में हो या प्रॉर्टी के सेक्टर में या फिर टेक्नोलॉजी के सेक्टर में हो, शी जिनपिंग ने अपने विश्वासपात्रों को हर जगह बिठा दिया और एक के बाद एक चीजों को कंट्रोल करना शुरू कर दिया। उदाहरण के लिए, शी जिनपिंग ने अलीबाबा और टेनसेंट जैसे तकनीकी दिग्गजों पर शिकंजा कसा है, और जैक मा जैसे हाई-प्रोफाइल कारोबारियों को चीन में शी जिनपिंग के खिलाफ जाने का क्या अंजाम हो सकता है, उसका उदाहरण पेश कर दी। इसके अलावा चीन की समाज पर शिकंजा कसने के लिए शी जिनपिंग ने पारंपरिक मूल्यों की तरफ युवाओं को जोड़ने के बहाने उन्होंने शंघाई यूनिवर्सिटी से समलैंगिंकता को लेकर रिपोर्ट मांगनी शुरू कर दी तो जिनपिंग ने किसी पुरूष का महिला बनने की प्रक्रिया पर भी बैन लगा दिया।

जनता से अधिकार छीनते शी जिनपिंग
ऑस्ट्रेलियन सेंटर ऑफ चायना के युंग जियांग और एजम नी बताते हैं कि ''शी जिनपिंग ने अपने शासन के दौरान चीन को और ज्यादा व्यक्ति केन्द्रित बना दिया है, यानि चीन में एक तरह से तानाशाही रवैये की शुरूआत हो चुकी है। जिसमें लोगों के पास से बची-खुची आजादी भी छीनी जा रही है। मुस्लिमों के पास नमाज पढ़ने या मस्जिद के अंदर तक जाने का अधिकार नहीं बचा है तो हर उन नेताओं को बैन करने का फरमान दिया गया है, जिनका आचरण अनैतिक है। और इस तरह से ज्यादातर नेताओं पर ऐसे आरोपों में फंसाकर उन्हें खत्म कर दिया जा रहा है''। यानि, अगर आपके पास शी जिनपिंग की सोच से हटकर कोई ख्याल है, तो फिर चीन में आपके लिए कोई जगह नहीं है।

फिल्म इंडस्ट्री पर पूरी तरह से नकेल
नीकन ने कहा कि, "अभिनेताओं और मशहूर हस्तियों से न केवल पहले की तरह कम्यूनिस्ट पार्टी लाइन पर चलने की उम्मीद की जाती है, बल्कि अब उन पर हर मौके पर कम्यूनिस्ट पार्टी का प्रचार करने और कम्यूनिस्ट विचारधारा को बढ़ाने के लिए दवाब डाला जाता है। जो कोई भी कम्यूनिस्ट पार्टी की विचारधारा से अलग जाने की हिम्मत करता है, उसे गंभीर परिणाम भुगतना होता है। उन्हें सरकारी आदेश देकर बहिष्कार कर दिया जाता है। वहीं फिल्म, सीरियल्स और शोज में कम्यूनिस्ट पार्टी के पक्ष में ही आप बोल सकते हैं, फिल्म के जरिए आप किसी भी तरह की दूसरी राजनीतिक विचारधारा के पक्ष में नहीं बोल सकते हैं।''

शी जिनपिंग का डर समझिए
नीकन बताते हैं कि चीन में हर उस 'असंतोष' को गंभीर माना गया है, जिसका ताल्लुक सरकार से है। कम्यूनिस्ट पार्टी दुनियाभर में मजदूरों की बात करती है, लेकिन चीन में मजदूरों से किसी भी तरह का प्रदर्शन करने का अधिकार छीन लिया गया है। नीकन कहते हैं कि सरकार हर उस चीज से डरती है, जो लोगों को एक जगह पर सरकार के खिलाफ इकट्ठा कर दे। और ऐसे तत्वों से निपटने के लिए कम्यूनिस्ट पार्टी दो तरीके आजमाती है। पहला तरीका उन्हें मनाना होता है और दूसरा तरीका एक्शन का होता है। जबकि, शी जिनपिंग और उनके सीसीपी के साथी दुनिया को बताना चाहते हैं कि वह "दुनिया के सभी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विकास के लिए एक सामंजस्यपूर्ण वातावरण को बढ़ावा दे रहे हैं" और वह "मानव जाति के लिए एक साझा भविष्य" की पेशकश करते हैं। हालांकि, एक "सामान्य नियति" के बारे में उनका विचार एक भयावह है, जहां सभी को एक सत्तावादी राज्य के अडिग नियमों के अनुरूप होना चाहिए। जो किसी व्यक्ति के जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करता है। इसलिए दुनिया को, दुनिया के लिए, चीन के इस दृष्टिकोण से सावधान रहने की जरूरत है, जहां उग्र राष्ट्रवाद को प्राथमिकता दी जाती है और जहां सामाजिक जीवन का हर पहलू को सिर्फ कम्यूनिस्ट पार्टी और शी जिनपिंग नियंत्रित करते हैं।












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