भारत हमपर कैसे भरोसा करेगा ? अमेरिकी सीनेटर ने पाकिस्तान के नाम पर अपनी ही सरकार को खूब लताड़ा
वॉशिंगटन डीसी, 15 सितंबर: पाकिस्तान तालिबान की मदद कर रहा था और अमेरिका आंखें मूंदे रहा। अफगानिस्तान में हुई किरकिरी के बाद अमेरिकी सरकार की अपने घर में ही इसपर खूब फजीहत हो रही है। अब अमेरिकी सांसद जो बाइडेन सरकार से पूछ रहे हैं कि ऐसी स्थिति में चीन का सामना करने के लिए भारत को अमेरिका पर क्यों भरोसा करना चाहिए ? दअरसल, भारत की आम जनता भी पाकिस्तान की करतूतों की जितनी जानकारी रखती है, लगता है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी भी उसमें नाकाम रही। पाकिस्तान अमेरिका की भीख पर खुद भी पलता रहा और तालिबान के आतंकवादियों को भी पालता रहा। इसका परिणाम ये हुआ है कि अमेरिका की फजीहत तो हो ही रही है, भारत को भी आतंकवाद से अपनी सुरक्षा को लेकर नए सिरे से तैयारी करनी पड़ रही है।

भारत में अमेरिका को लेकर अच्छा संदेश नहीं जा रहा- सीनेटर
अमेरिका के एक धाकड़ सीनेटर ने कहा है कि तालिबान की जीत में पाकिस्तान ने जो रोल निभाया है, वह वहां की सरकार में मौजूद कट्टरपंथियों की जीत है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है और वहां पाकिस्तान जो खेल खेल रहा है, उससे भारत में अच्छा संदेश नहीं जा रहा। अफगानिस्तान पर अमेरिकी कांग्रेस के अंदर एक चर्चा में गुरुवार को रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा कि तालिबान को फिर से संगठित होने में मदद करने को लेकर पाकिस्तान के रोल को नजरअंदाज करने के लिए कई अमेरिकी प्रशासन दोषी है। उन्होंने तालिबान के मसलने पर पाकिस्तान के दोहरे रवैया पर गंभीर चिंता जताई है।

पाकिस्तान नीति पर सीनेटर ने अपनी ही सरकारों पर सवाल उठाए
रुबियो ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से कहा कि 'क्योंकि इन सब में पाकिस्तानी रोल है और मैं समझता हूं कि विभिन्न अमेरिकी प्रशासन इसे नजरअंदाज करने का गुनहगार है। तालिबान को सक्षम बनाने में पाकिस्तानी भूमिका आखिरकार पाकिस्तानी सरकार में तालिबान समर्थक कट्टरपंथियों की जीत है।' गौरतलब है कि अमेरिकी सीनेटर की चिंता 24 सितंबर को वॉशिंगटन में होने वाले क्वाड सम्मेलन को लेकर है, जिसकी मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन करेंगे और उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन और जपानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा भी मौजूद रहेंगे। चीन का सामना करने को लेकर अब भारत अमेरिका पर कैसे यकीन करेगा इसी चिंता को जाहिर करते हुए वे बोले- 'अगर आप भारत हैं, आप इस ओर देख रहे होंगे और कह रहे होंगे,'क्या संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान को उसकी स्थिति को उजागर करने की इजाजत दी....''

भारत हमपर कैसे भरोसा करेगा ? -सीनेटर
जाहिर है कि क्वाड समूह को लेकर चीन अंदर ही अंदर परेशान रहा है। लेकिन, अफगानिस्तान में अमेरिकी नीति को जो तमाचा लगा है, उससे अमेरिकी जनता भी काफी असहज नजर आ रही है और बाइडेन प्रशासन के फैसले से काफी मायूसी है। अमेरिकी सीनेट के अफगानिस्तान पर बुलाई गई विदेशी संबंधों की समिति में रिपब्लिकन सीनेटर ने कहा, 'वे (भारतीय) यही देख रहे होंगे और कह रहे होंगे कि अगर अमेरिका के साथ ऐसे हो सकता है, आप जानते हैं कि पाकिस्तान जैसे तीसरे दर्जे की शक्ति के इरादे को भांपने में, तो वह चीन का कैसे सामना करेगा? इसलिए मैं सोचता हूं कि इससे हम एक भयानक स्थिति में पहुंच गए हैं।'

पाकिस्तान को पहचाना तो हिल गया अमेरिका
वे यहीं नहीं रुके और कहा कि इतने वर्षों से तालिबान को जब भी नुकसान होता था, उसे पाकिस्तान में पनाह मिलता रहा, 'वह वहां आराम करने के लिए, प्रशिक्षण के लिए और भर्ती के लिए जाने में सक्षम थे। और संक्षेप में कहें तो वापसी से पहले भी हमारे सामने एक भयानक यथा स्थिति थी। सिक्योरिटी फोर्स, बहुत कम संख्या में अमेरिकी सैनिक, आप जानते हैं कि उनका मरना लगातार जारी रहा।' सीनेटर माइक राउंड्स ने कहा कि पाकिस्तान तालिबान सरकार को भारत के खिलाफ एक पार्टनर मानता है। वे बोले की ईरानी राष्ट्रपति ने इसे सरेआम अमेरिकी सेना की हार बताया है और तालिबान के साथ मिलकर काम करने की सोच रहे हैं। सीनेट के विदेश संबंधों की समिति के सभापति के नाते सीनेटर रॉबर्ट मेंडेज ने 'पाकिस्तान का दोहरा रवैया' और तालिबान को 'सुरक्षित आश्रय प्रदान करना' जैसी टिप्पणियां कीं। वहीं सीनेटर जेम्स रिस्च ने ब्लिंकन से कहा कि अमेरिका को इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका को निश्चित तौर पर समझना होगा।












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