गाजा पट्टी जाएंगे 3 लाख इजराइली सैनिक, हमास के सफाए के लिए शुरू होगा ग्राउंड असॉल्ट, जानें कैसा होगा ऑपरेशन?
Israeli ground assault in Gaza: इजराइल के प्रधानमंत्री ने कसम खाई है, कि वो गाजा पट्टी का ऐसा हाल कर देंगे, कि अगले पचास सालों तक वो अपने पैरों पर खड़ा होने लायक नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजराइली सैनिकों को खुली छूट दे दी है और अब करीब 3 लाख सैनिक गाजा पट्टी में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करने वाले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार जब हवाई हमलों के जरिए हमास आतंकियों के तमाम ठिकानों को तबाह कर दिया जाएगा, उसके बाद इजराइली सैनिक गाजा पट्टी में दाखिल होंगे। आइये जानते हैं, कि जब इजराइल का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होगा, तो वो कैसा होगा?

इजराइल का ग्राउंड ऑपरेशन
सीएनएन के रिपोर्टर बेन वेडमैन ने एक आर्टिकिल में लिखा है, कि इरजाइली ग्राउंड ऑपरेशन कितना खतरनाक होता है और इसके लिए उन्होंने 2009 का उदाहरण दिया है, जब इजराइल ने गाजा में ग्राउंड ऑपरेशन चलाया था।
सीएनएन के रिपोर्टर बेन वेडमैन ने कहानी बताते हुए कहा, कि साल 2009 में दक्षिणी गाजा पट्टी में राफा से तटीय सड़क के किनारे-किनारे, गाजा शहर की ओर जा रहे एम्बुलेंस के एक काफिले के साथ हमने सफर शुरू की। हम एंबुलेंस में थे और डॉक्टरों ने हमें उसी शर्त पर आने की इजाजत दी थी, जब हम उनके स्ट्रेचर के नीचे छिपकर चलें।
इसे इजराइल ने "ऑपरेशन कास्ट लीड" नाम दिया था, जो 2012, 2014, 2021 और 2022 में इजराइल और गाजा के बीच होने वाली लड़ाइयों की श्रृंखला का पहला ऑपरेशन था।
बेन वेडमैन ने कहा, कि मुख्य एम्बुलेंस में डॉक्टरों के साथ एक संक्षिप्त बातचीत के बाद, सैनिकों ने एम्बुलेंस का निरीक्षण किए बिना हमें आगे जाने दिया।
बेन वेडमैन लिखते हैं, कि "साल 2005 में इजराइल ने जब अपने सैनिकों को गाजा पट्टी से वापस बुला लिया था, उसके बाद साल 2009 में ये पहला इजराइली ग्राउंड ऑपरेशन था। लेकिन, उस वक्त के जमीनी अभियान में इजराइली सैनिकों ने भीड़-भाड़ वाले इलाकों, 8 शरणार्थी शिविरों और अस्पतालों में अपना अभियान नहीं चलाया था। क्योंकि, इजराइली सैनिकों को अच्छे से पता था, कि सबसे ज्यादा भीड़ वाले शिविरों में से एक, अल-शती जैसे शिविरों की संकरी गलियों में प्रवेश करना जोखिम भरा होगा। उस वक्त उनका ध्यान शहरी क्षेत्रों की परिधि को नियंत्रित करने पर था।"

किन बातों पर होता है ध्यान?
ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान इज़राइल की रणनीति हमेशा तेजी से आगे बढ़ने और जितना संभव हो सके, उतने क्षेत्र पर नियंत्रण करने की होती है। लेकिन सड़क-दर-सड़क, घर-घर की लड़ाई से इजराइली सैनिक बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन, इस बार चूंकी करीब 3 लाख सैनिकों के साथ जमीनी अभियान चलाने की योजना है, लिहाजा इस बार घर घर तलाशी ली जा सकती है।
लेकिन, गाजा में शहरी क्षेत्रों की लड़ाई लड़ना इतना आसान नहीं रहने वाला है।
फिलहाल, इजरायली सेना हमास के साथ उलझी हुई है। लेकिन गाजा पट्टी, अनगिनत सशस्त्र फिलिस्तीनी अलग-अलग समूहों का घर है, जिनमें इस्लामिक जिहाद, पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन (पीएफएलपी), डेमोक्रेटिक फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन (डीएफएलपी) जैसे कुछ ही नाम शामिल हैं।
उनके पास हमास जैसी जनशक्ति या फिर हथियार तो नहीं हैं, लेकिन अपने घर की लड़ाई में वो काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं और घर की लड़ाई में उनके पास प्रतिरोध करने के लिए पर्याप्त लोगों की संख्या होगी।
इजरायली सेना ने अब 300,000 रिज़र्व सैनिकों को इकट्ठा किया है, जिसे अब व्यापक रूप से गाजा में एक अभूतपूर्व घुसपैठ माना जाता है और ऐसी संभावना है, कि गाजा पट्टी के कई क्षेत्रों पर इजराइल अपना नियंत्रण स्थापित कर सकता है।
इस बार जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल ने गाजा पर सैकड़ों भीषण हमले किए हैं, जिससे कुछ क्षेत्र टूटे हुए कंक्रीट और मुड़े हुए धातु के बंजर भूमि में बदल गए हैं। इस प्रक्रिया में, कई नागरिकों सहित सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे गए हैं। और ये तो इस युद्ध का शुरुआती चरण है।
अगर वाकई ग्राउंड ऑपरेशन शुरू हुआ, तो ज़मीनी कार्रवाई कहीं ज़्यादा ख़ूनी और विनाशकारी होगी। इज़रायली सेनाओं को यह भी ध्यान रखना होगा, कि गाजा के चारों ओर फैले हुए सौ से ज्यादा इज़रायली - सैनिक और नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, उन्हें हमास ने बंदी बना रखा है। और फिलहाल कोई नहीं जानता, कि ये सभी बंधक कहां रखे गये हैं।
कई रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया गया है, कि ये बंधक शरणार्थी शिविर वाले इलाकों में रखे गये होंगे, लिहाजा ऐसी स्थिति में इजराइल के ग्राउंड ऑपरेशन से पहले गाजा सिटी में जमीनी हमले में और भी ज्यादा तबाही मचाया जाएगा, ताकि हमास और गाजा पट्टी की कमर तोड़ी जाए और फिर ग्राउंड ऑपरेशन की शुरूआत की जाए।












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