• search

कब तक चल सकेगा बांग्लादेशी 'रॉकेट'?

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts
    पीएस ऑस्ट्रिच
    BBC
    पीएस ऑस्ट्रिच

    दोपहर के साढ़े तीन बज रहे हैं और ढाका के बादामतल्ली इलाके की सब्ज़ी मंडी खचाखच भरी हुई है.

    तंग रास्तों और गलियों को पार कर के आप बूढ़ी गंगा नदी के घाट पर पहुँचते हैं जहाँ एक बड़ा सा स्टीमर खड़ा है.

    पहली बार देखने पर आप भी ठहर कर सिर्फ़ निहारते भर रहेंगे इस विशालकाय पैडल स्टीमर को जिसका नाम पीएस ऑस्ट्रिच है.

    ये जहाज़ आपको सीधे ब्रितानी राज के दिनों की याद दिला देगा जब ये कोलकाता से चलकर ढाका होते हुए बंगाल की खाड़ी तक का सफ़र करता था.

    इतने वर्षों बाद पीएस ऑस्ट्रिच आज भी बांग्लादेश की शान है और 1920 के दशक में बने ख़ास किस्म के ऐसे सिर्फ़ चार ही स्टीमर बचे हैं.

    बांग्लादेश की वो सबसे हृदय-विदारक घटना

    बांग्लादेश: क्यों चर्चा में हैं हिंदू चीफ़ जस्टिस

    '16 बरस की उम्र में शादी भी कोई शादी है'

    मोहम्मद साबिर हुसैन
    BBC
    मोहम्मद साबिर हुसैन

    स्टीमर के चलने में अभी डेढ़ घंटे बाकी हैं, ज़रूरत का सामान लोड हो रहा है और 22 लोगों का स्टाफ़ नहाने-धोने में लगा है.

    डेक पर बैठे एक सज्जन अपने मोबाइल पर बांग्ला में कोई गाना सुन रहे हैं. मोहम्मद साबिर हुसैन इस बोट के लिए काम करते हैं और पीएस ऑस्ट्रिच उनकी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा है.

    उन्होंने बताया, "मेरे पिताजी इस स्टीमर पर काम करते थे और मैं भी 50 वर्षों से इससे जुड़ा हुआ हूँ. मेरा जुड़ाव भावनात्मक है और आमदनी से प्रेरित नहीं. ये दुनिया भर में विख्यात है और आज भी दुनिया भर से सैलानी इस पर सफ़र करने आते हैं."

    बांग्लादेश
    BBC
    बांग्लादेश

    बांग्लादेश में इस स्टीमर को रॉकेट के नाम से जाना जाता है और ये प्रोपेलर पंखों के बजाय पैडल से चलता है.

    आसानी से 900 लोगों को सवारी कराने वाले इस स्टीमर के चलते हज़ारों लोग देश के अलग अलग हिस्सों तक सफर कर पाते हैं.

    1990 के दशक में इसमें ऑस्ट्रिया से लाए गए एक डीज़ल इंजन को फ़िट किया गया और अब ये कोयले से नहीं चलता.

    बांग्लादेश के बनने के बाद ये ढाका और खुलना के बीच चलता है और एक तरफ़ के सफ़र में पूरे 16 घंटे लगते हैं.

    पीएस ऑस्ट्रिच
    BBC
    पीएस ऑस्ट्रिच

    इस रॉकेट स्टीमर ने दूसरा विश्व युद्ध, 1947 का बंटवारा और 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई तक का दौर देखा है.

    लेकिन शायद इस ऐतिहासिक बोट के लिए भी चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं.

    महंगाई के दौर में इन्हें दुरुस्त रख, चलती हालत में बनाए रखना एक महंगा नुस्खा है.

    सिर्फ़ एक महीने तक चलाने की लागत ही 15 लाख रुपए तक खिंच जाती है और आमदनी इससे कहीं कम हो रही है.

    पीएस ऑस्ट्रिच
    BBC
    पीएस ऑस्ट्रिच

    काफ़ी लोग इन दिनों ज़्यादा तेज़ चलने वाले और सस्ते स्टीमर पसंद कर रहे हैं जिससे पीएस ऑस्ट्रिच के पुराने मुसाफ़िरों में डर बढ़ रहा है.

    खुलना के रहने वाले शहाब अहमद हर महीने माँ-बाप से मिलने ढाका आते हैं.

    उन्होंने कहा, "अगर ये सर्विस बंद हो गई तो हमारे विकल्प बहुत कम हो जाएंगे. सस्ता और सहज होने के अलावा ये हमेशा समय पर चलता है. आज तक हमें कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन इसके भविष्य को लेकर मैं चिंतित हूँ".

    उम्र बढ़ने के साथ-साथ पीएस ऑस्ट्रिच पर मरम्मत का काम बढ़ रहा है. अक्सर, हफ़्ते-महीने बीत जाते हैं इसे ठीक करने में. सरकार इसको चलाने का ख़र्च तो उठा रही है लेकिन बहुत कोशिशों के बाद.

    पीएस ऑस्ट्रिच
    BBC
    पीएस ऑस्ट्रिच

    बांग्लादेश इनलैंड वाटरवेज़ के चेयरमैन ज्ञान रंजन शील इसे इतिहास की धरोहर बताते हैं लेकिन माथे पर परेशानी भी साफ़ दिखती है.

    उन्होंने बताया, "इसके इंजन और पैडल के पुर्ज़े मुश्किल से मिलते हैं और विदेश से मंगाने पड़ते हैं और इस वजह से भी हमें इसको चलती हालत में बनाए रखने में दिक्कत होती है. इस सब के बावजूद हमारी कोशिश इसे चालू हालत में रखने की है लेकिन दिक्कतें भी कम नहीं".

    नायाब किस्म के ये पैडल स्टीमर दुनिया भर में बहुत कम ही बचे हैं. बीते दिनों की याद दिलाने वाले ये जहाज़ तेज़ी के लिए नहीं बल्कि आराम के लिए बने थे. जिन्हें आज भी उसकी तलाश है, वे पीएस ऑस्ट्रिच तक पहुंच ही जाते हैं.

    क्या म्यांमार-बांग्लादेश के बीच मुश्किल में है भारत?

    क्या रोहिंग्या आई-कार्ड लेकर बांग्लादेश आ रहे हैं?

    अपनी ही जायदाद से 'बेदख़ल' ये बांग्लादेशी हिंदू

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    How long will the Bangladeshi rockets be run

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X