PLA News: चीनी नौसेना के 'सफेद हाथी' को देखिए, फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर की बड़ी कमजोरी का पता चला
PLA Navy News: क्वांटिटी जरूरी है या क्वालिटी...?
हाल ही में चीन ने अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान लॉन्च किया है, जिसको लेकर दावा किया है, वो चीन का अभी तक का सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है, इसको लेकर दुनियाभर के डिफेंस एक्सपर्ट्स में मतभेद है।

संयोग से 8 मई को फुजियान अपनी आठ दिनों की समुद्री यात्रा पूरा कर चीनी बंदरगाह पर वापस लौट आया है, जिसको लेकर चीनी डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि "ये समुद्री और हवाई सुरक्षा खतरों का सामना करने और शांति और स्थिरता की बेहतर सुरक्षा के लिए चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) नौसेना को सशक्त बनाएगा।"
फ़ुजियान की पहली समुद्री यात्रा 1 मई को जियांगन शिपयार्ड से शुरू हुई थी, जहां इसे 17 जून 2022 को लॉन्च किया गया था, और मूरिंग परीक्षण पूरा किया गया था।
चीन के पास पहले से दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जिनके नाम लियाओनिंग और शेडोंग हैं और ये दोनों 60 हजार टन की श्रेणी के हैं और ये दोनों कैरियर, लड़ाकू विमानों को उड़ान भरने में सक्षम करने के लिए स्की जंप रैंप का उपयोग करते हैं, जबकि 80,000-टन-श्रेणी के फुजियान को विमान लॉन्च करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापोल्ट से सुसज्जित किया गया है।
क्वालिटी या क्वांटिटी.. ज्यादा जरूरी क्या?
फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर में डिसप्लेसमेंट ज्यादा है, जो इसे एक साथ ज्यादा लड़ाकू विमानों के संचालन की इजाजत देता है और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापोल्ट इसे ज्यादा कुशलता से विमानों को लॉन्च करने की इजाजत देता है। खासकर भारी विमानों और पूरी तरह से पेलोड लड़ाकू विमानों को लॉन्च करना काफी आसान हो जाता है।
पश्चिमी एक्सपर्ट्स का मानना है, कि फुजियान पर एक साथ 40 से 60 शेनयांग जे-15 लड़ाकू विमानों को ऑपरेट किया जा सकता है।
हालांकि, फुज़ियान को तुरंत पीएलए नौसेना की सेवाओं में नहीं डाला जा रहा है, क्योंकि यह "पूरी तरह से तैयार नहीं है", लेकिन चीनी मीडिया दावा कर रहा है, कि इसके शामिल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना वाला देश बन चुके चीन की शक्ति में और इजाफा होगा।
हालांकि, इंडो-पैसिफिक में भारत जरूर एक प्रमुख नौसैनिक शक्ति है, फिर भी भारत सरकार ने अभी तक फैसला नहीं किया है, कि आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत के बाद, तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए भारतीय नौसेना की मांग को स्वीकार किया जाए या नहीं।
कई एक्सपर्ट्स का मानना है, हिंद महासागर की संपूर्ण सुरक्ष के लिए भारत को तत्काल तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण शुरू करना चाहिए। और अगर इस साल निर्माण शुरू होता है, फिर भी तीसरे कैरियर को इंडियन नेवी में शामिल होने में कम से कम 8 से 10 सालों का वक्त लगेगा।
दूसरी तरफ, चीन की नौसेना के पास लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों, समुद्र में जाने वाले उभयचर जहाजों, खदान युद्ध जहाजों, विमान वाहक और बेड़े सहायक सहित 370 से ज्यादा युद्ध प्लेटफार्मों का इस्तेमाल कर रहा है, जो उसे दुनिया की सबसे बड़ी नेवी बनाता है।
लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि क्वालिटी और क्वांटिटी में बड़ा अंतर है, जो युद्ध में अंतिम फैसला करता है और अमेरिकन क्वालिटी के आगे चीन कहीं नहीं ठहरता है।
फुजियान में बड़े छेद का पता चला?
अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, "अमेरिका लगातार चीनी नौसेना के बेड़े पर नजर रखता है और अमेरिकी नौसेना ने अपने बेड़े का एक बड़ा हिस्सा प्रशांत क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया है।
अमेरिका के पास 12 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। और रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि अमेरिका ने अपने सबसे सक्षम एयरक्राफ्ट कैरियर को प्रशांत क्षेत्र में तैनात कर दिया है।
इसके अलावा, यूएस नेवी ने टेक्नोलॉजी को डेवलप करने, नये जहाजों को शामिल करने, मानव रहित वाहनों को शामिल करने और नये हथियारों को शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अलावा, यूएस नेवी चीनी एयर डिफेंस को समुद्र से भेदने वाले हथियार भी तैयार कर रही है, जिसे एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात किया जा सके।
खासकर, आने वाले सालों में अमेरिकी नौसेना में भारी संख्या में मानव रहित विमानों को शामिल किया जाएगा। लेकिन, अमेरिकी कांग्रेस के लिए मुख्य मुद्दा ये है, कि क्या बाइडेन प्रशासन बजट को मंजूरी देगा या फिर अस्वीकार कर देगा।
एयरक्राफ्ट कैरियर की बात करें, तो अमेरिका के पास न केवल चीन से ज्यादा कैरियर हैं, बल्कि यह भी कहा जाता है, उनकी रेंज और उनका पावर और उनकी क्वालिटी, चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है।
अमेरिका के समुद्री रणनीति केंद्र के स्टीवन विल्स का तर्क है, चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर ने चीनी विदेशी नीति और चीनी हित के समर्थन में अभी तक विस्तारित वैश्विक तैनाती शुरू नहीं की है। इसके बजाय उन्होंने चीन के नजदीकी समुद्र में उन जगहों पर उनकी तैनाती शुरू की है, जहां उसे पड़ोसी देशों से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चीन ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को देश की पश्चिमी सीमा वाले इलाकों में भी तैनात किया है, जो फिलीपींस और ताइवान और मलेशिया से उत्तर में कामचटका प्रायद्वीप तक फैला हुआ है।

फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर की कमजोरी क्या है?
यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (सीवीएन 78) और यूएस निमित्ज़-क्लास जैसे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स के विपरीत, फुजियान पारंपरिक रूप से संचालित है, और इससे इसकी सीमा और गति कम हो जाती है। यह गहरे समुद्र में ज्यादा समय तक नहीं रह सकता है। इसे फिर से मेंटिनेंस के लिए या तो बंदरगाह पर बुलाना होगा या फिर इसमें तेल भरने के लिए समुद्र में जहाज टैंकर भेजना होगा।
वहीं, जहां अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर विश्व भ्रमण पर होते हैं, वहीं चीनी कैरियर की भूमिका सीमित होगी, जबकि अमेरिकी कैरियर्स ज्यादातर समय घर से काफी दूर ऑपरेट होते हैं।
दूसरी तरफ, चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर जहां एक दिन में मैक्सिमम 60 उड़ाने ऑपरेट कर सकती हैं, वहीं अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर हर दिन 120 से ज्यादा उड़ाने हासिल करते हैं, जबकि अमेरिका का नया फोर्ड क्लास हर दिन 160 तक उड़ानों को संचालित कर सकता है।
स्टीवन विल्स का कहना है, हालांकि, चीनी लगातार अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को एडवांस करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी अमेरिकन और ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर के सामने ये 'बच्चा' है।
सैन्य इंजीनियरिंग एक्सपर्ट क्रिस्टोफर मैकफैडेन के मुताबिक, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर वर्तमान में दुनिया के कुछ सबसे एडवांस फाइटर जेट्स का संचालन करते हैं। यूएस नेवी में एफ-35 "लाइटनिंग II" को शामिल किया गया है, जिससे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और भी ज्यादा घातक हो जाता है।
दूसरी तरफ, चीनी J-15 प्रभावी रूप से चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इसे "फ्लाइंग शार्क" के नाम से भी जाना जाता है, इसे शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने डेवलप किया है। यह रूसी सुखोई Su-33 विमान पर आधारित है, जिसे चीन ने 1990 के दशक के अंत में यूक्रेन से हासिल किया था। और विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें कई समस्याएं शामिल हैं और ये लगातार दुर्घटनाओं का शिकार होता रहता है।
J-15 लड़ाकू विमान काफी ज्यादा भारी है और इसकी STOBAR सिस्टम की एक निश्चित सीमा रेखा है। जे-15 का खाली वजन 38,000 पाउंड है, जो एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट से लगभग 6,000 पाउंड ज्यादा और एफ-35सी से 4,000 पाउंड ज्यादा है। और चीन अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर इसी की तैनाती करता है, जिससे एयरक्राफ्ट कैरियर की क्षमता और भी ज्यादा कम हो जाती है।
वहीं, इंडो-पैसिफिक में किसी भी संभावित संघर्ष में, चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर न केवल अमेरिकी नौसेना की चुनौती का सामना करेगा, बल्कि जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों और साझेदारों की नौसेना बलों की भी चुनौती का सामना करेगा।
और अमेरिका का मानना है, चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए भारत से भी मुकाबला करना आसान नहीं होगा।
अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस रिपोर्ट में कहा गया है, कि "भारत, चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के खिलाफ संतुलन बनाने और चीन की संभावित आक्रामक कार्रवाइयों को रोकने के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों की क्षमता को बढ़ा सकता है।"
लेकिन, फिर भी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, कि चीन काफी तेजी से अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है और आने वाले कुछ सालों में चीन अपनी इन कमियों को दूर करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जिसको लेकर अभी से तैयारी करने की जरूरत है।
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