History of Maldives: मालदीव में कभी रहते थे हिन्दू और बौद्ध, वहां कैसे बसे 98% मुस्लिम? ओडिशा से गहरा नाता!
History of Maldives: मालदीव, जो भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित है, इसकी पहचान ये है कि ये दक्षिण एशिया का सबसे छोटा देश है जो 1200 छोटे-छोटे द्वीपों से मिलकर बना है। इसका सबसे छोटा आईलैंड रकीधू है, जो लगभग 15 हेक्टेयर या 65 हजार स्क्वेयर फीट में फैला है। यहां की आबादी 5 लाख 27 हजार है जिसमें 98% लोग इस्लाम को मानते हैं। मालदीव साइज में दिल्ली से 5 गुना छोटा और ग्रुरुग्राम का लगभग आधे से थोड़ा ज्यादा है।
कभी हिंदुओं का गढ़ था मालदीव
मालदीव का इतिहास लगभग 2500 साल पुराना है। आश्चर्यजनक रूप से, लगभग 900 साल पहले तक यहां बौद्ध और उससे पहले हिंदू धर्म का शासन था। लेकिन 12वीं सदी में यहां के राजा ने इस्लाम धर्म अपनाया और अगले 150 सालों में यह पूरी तरह एक मुस्लिम देश बन गया।

डूब सकता है 80% मालदीव!
वैज्ञानिक बताते हैं कि जिस तरह से दुनिया जलवायु परिवर्तन की मार को सहन कर रही है उस लिहाज से अगले 25 सालों में मालदीव का 80% हिस्सा डूब सकता है। जिसके बाद यहां के लोगों के सामने रहने का एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
ओडिशा से है मालदीव का कनेक्शन
माना जाता है कि मालदीव में पहली बार लोग लगभग ढाई हजार साल पहले बसे थे।ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, मालदीव के प्राचीन राजतंत्र की नींव भारत के ओडिशा (प्राचीन काल में कलिंग) के राजा ब्रह्मादित्य के पुत्र और बौद्ध राजा श्री सूरुदासरुण आदित्य ने रखी थी। इतिहासकारों का मानना है कि बौद्ध धर्म 1000 सालों से अधिक समय तक मालदीव का प्रमुख धर्म रहा। इस दौरान मालदीव की संस्कृति, भाषा और प्राचीन धिवेही लिपि का विकास हुआ। मालदीव के कई द्वीपों पर आज भी बौद्ध मठों और संरचनाओं के अवशेष मौजूद हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'हवित्ता' या 'उस्तुबु' कहते हैं।
मालदीव में इस्लाम की शुरुआत
मालदीव के अंतिम बौद्ध राजा धोवेमी ने 1153 में इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। प्राचीन दस्तावेजों के अनुसार, माघरेबी (उत्तरी अफ्रीकी) के इस्लामी विद्वान अबु अल-बरकात यूसुफ अल-बरबरी ने राजा को इस्लाम में परिवर्तित किया। धोवेमी को सुल्तान मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह का नाम दिया गया, और इसी के साथ मालदीव में इस्लामिक शासन की शुरुआत हुई। बौद्ध देश से इस्लामी राष्ट्र बनने में मालदीव को लगभग 150 साल लगे। इस्लामिक शासन के तहत मालदीव में 6 राजवंशों का शासन रहा, जो 1968 तक चला। 2008 में, मालदीव के नए संविधान ने इस्लाम को आधिकारिक धर्म घोषित कर दिया और नागरिकता के लिए इस्लाम को अनिवार्य बना दिया।
एक राजा ने बना दिया मुस्लिम देश?
मालदीव की लोककथाओं के अनुसार, राजा धोवेमी के शासनकाल में मालदीव में रन्नामारी नामक एक समुद्री राक्षस का आतंक था। इस राक्षस को शांत करने के लिए हर महीने एक कुंवारी कन्या की बलि दी जाती थी। एक बार जब एक परिवार की इकलौती बेटी को बलि के लिए चुना गया, तो अबु अल-बरकात ने उस लड़की की जगह खुद मीनार में रात बिताने की पेशकश की। उस रात उन्होंने मीनार में कुरान की आयतें पढ़ीं, जिससे रन्नामारी भाग गया।
राजा धोवेमी ने अबु अल-बरकात से पूछा कि क्या वे रन्नामारी को हमेशा के लिए भगा सकते हैं। राजा ने वादा किया कि अगर राक्षस हमेशा के लिए भाग गया, तो वे पूरे देश को इस्लाम में परिवर्तित कर देंगे। रन्नामारी के वापस न आने पर राजा धोवेमी ने इस्लाम स्वीकार कर लिया और देश में इस्लाम का प्रचार प्रसार करने लगे।
पुर्तगालियों ने भी किया शासन
मालदीव पर अलग-अलग समय पर कई विदेशी शक्तियों का प्रभाव रहा है। 1558 में पुर्तगालियों ने मालदीव पर कब्जा कर लिया और लगभग 15 सालों तक राजधानी माले पर नियंत्रण रखा। 1573 में इसे पुर्तगाल से आजादी मिल गई। इसके बाद, 1887 में मालदीव ने ब्रिटिश शासन के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत मालदीव ने अपनी आंतरिक स्वायत्तता बनाए रखी, लेकिन विदेश नीति और रक्षा ब्रिटिश नियंत्रण में थी। 26 जुलाई 1965 को मालदीव को पूर्ण स्वतंत्रता मिली।
मालदीव जलवायु परिवर्तन का पहला शिकार!
दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, मालदीव भी जलवायु परिवर्तन के संकट से अछूता नहीं है। समुद्र का तेजी से बढ़ता जल स्तर मालदीव के ज्यादातर हिस्सों को डुबा सकता है। वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर ग्लोबल वार्मिंग ऐसे ही चलती रही, तो 2050 तक मालदीव रहने लायक नहीं बचेगा, और 2100 तक यह पूरा देश समुद्र में समा सकता है।
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