Hassan Nasrallah: नसरल्लाह की 'हत्या' से लेबनान में टूट जाएगी ईरान की कमर, हानिया की मौत से भी बड़ा झटका कैसे?
Hassan Nasrallah assassination: इजराइल ने शुक्रवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह के केंद्रीय मुख्यालय पर भीषण हमला किया है। इस हमले का निशाना हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाा था। इजराइल ने कई टन बम-बारूद हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर पर गिराए हैं, लेकिन यह पता नहीं चल पाया है, कि हमले में वो बच पाया है या नहीं।
मध्य पूर्व में ईरान समर्थित सभी समूह, जैसे हमास, हिज्बुल्लाह और हूती विद्रोहियों को ईरानी प्रॉक्सी के रूप में जाना जाता है, लेकिन रान के साथ जुड़ाव की बात करें, तो कोई भी समूह हिज्बुल्लाह के करीब नहीं आता है। इसका मतलब यह है, कि नसरल्लाह की हत्या (अगर इसकी पुष्टि हो जाती है), ईरान के लिए कुछ महीने पहले पूर्व हमास प्रमुख इस्माइल हानिया की हत्या से कहीं ज्यादा बड़ा झटका होगा।

ईरान के प्रॉक्सी संगठनों को समझिए
हमास, हूती विद्रोही, और मध्य पूर्व के अन्य समूहों को ईरान का मजबूत समर्थन मिला हुआ है, और इन्हें 'प्रतिरोध की धुरी' कहा जाता है और इन संगठनों के पास स्वतंत्र मूल और सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ भी हैं, लेकिन इसके बाद भी हिज्बुल्लाह जैसा ताकत इनके पास नहीं हैं और ईरान के साथ हिज्बुल्लाह जितनी वफादारी भी किसी ने नहीं दिखाई है।
हमास या हूतियों के विपरीत, हिज्बुल्लाह की स्थापना ईरान ने 1982 में की थी। उस समय सीरिया में ईरानी राजदूत अली अकबर मोहताशमी इसके सह-संस्थापकों में से एक थे।
फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (SIS) में मध्य पूर्व के जानकार मुद्दस्सिर कमर कहते हैं, कि भले ही हमास और ईरान अब एक हो गए हैं, और ईरान हमास का समर्थन करता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था और ये समूह बहुत अलग हैं।
उन्होंने कहा, कि "हमास, मिस्र स्थित मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा है। यह एक फिलिस्तीनी सुन्नी समूह है। दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह एक लेबनानी सशस्त्र शिया समूह है और ईरान न केवल इसकी स्थापना में शामिल था, बल्कि ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) तब से समूह की वैचारिक, नैतिक, वित्तीय और सशस्त्र परवरिश में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।"

ईरान में हैं हिज्बुल्लाह की वैचारिक जड़ें
चूंकि इजराइल-हमास संघर्ष, इजराइल-हिज्बुल्लाह संघर्ष से कहीं ज्यादा मशहूर है, इसलिए यह व्यापक रूप से माना जाता है, कि हमास सबसे बड़ा ईरानी प्रॉक्सी समूह है। लेकिन ऐसा नहीं है। ईरान का असली प्रॉक्सी असल में हिज्बुल्लाह ही है।
हमास एक फिलिस्तीनी सुन्नी समूह है जो इस क्षेत्र में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक फिलिस्तीनी राष्ट्रवादी समूह है और इसकी उत्पत्ति मुस्लिम ब्रदरहुड से उभरे हिंसक फिलिस्तीनी आंदोलन से हुई है।
ईरान और हमास के बीच मुख्य वैचारिक जुड़ाव की वजह, दोनों का इजराइल के अस्तित्व के अधिकार को अस्वीकार करना और उसके विनाश के प्रति प्रतिबद्धता है।
दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह एक शिया समूह है, बिल्कुल ईरान की तरह। चूंकि इसकी स्थापना ईरान के कहने पर हुई थी, इसलिए समूह ने ईरानी शासन की विचारधारा को अपना लिया है। इसने ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति भी निष्ठा की शपथ ली है - पहले रूहोल्लाह खुमैनी और फिर उनके उत्तराधिकारी अली खामेनेई के प्रति।
यह उनकी गतिविधियों से भी जाहिर होता है। जबकि हमास, एक फिलिस्तीनी समूह के रूप में, बहुत ज्यादा राष्ट्रवादी मकसद रखता है और इसका आतंकवादी अभियान इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में ही केंद्रित है, जबकि हिज्बुल्लाह ने संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के खिलाफ दुनिया भर में काम किया है। हिज्बुल्लाह का वैश्विक नजरिया भी ईरान की विचारधारा को दर्शाता है और हमास और हिज्बुल्लाह के बीच एक और अंतर को उजागर करता है।
हिजबुल्लाह भी इजराइल को अपना मुख्य विरोधी मानता है, हिज्बुल्लाह ईरान की विचारधारा को फॉलो करता है और संयुक्त राज्य अमेरिका को सबसे बड़ा दुश्मन मानता है, जिसे वे 'महान शैतान' कहते हैं और इजराइल को मध्य पूर्व में संयुक्त राज्य अमेरिका की साम्राज्यवादी चौकी मानते हैं।
11 सितंबर 2001 तक, हिज्बुल्लाह किसी भी अन्य आतंकवादी संगठन की तुलना में ज्यादा अमेरिकी नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार था। अन्य हमलों के अलावा, हिज्बुल्लाह को 1983 में बेरूत में अमेरिकी मरीन बैरक बम विस्फोट किया था, जिसमें 241 अमेरिकी जवान मारे गए थे। वहीं, 1992 में अर्जेंटीना में इजराइली दूतावास पर आत्मघाती बम विस्फोट, जिसमें 31 लोग मारे गए थे, उसमें भी ये शामिला था। अर्जेंटीना में ही, अर्जेंटीना म्यूचुअल इजरायल एसोसिएशन (AMIA) बम विस्फोट, जिसमें 85 लोग मारे गए थे, और 2005 में बेरूत बम विस्फोट जिसमें 22 लोग मारे गए थे, इन हमलों में भी हिज्बुल्लाह का हाथ था।

ईरान के लिए नसरल्लाह की हत्या, हानिया की हत्या से कहीं ज्यादा बड़ा झटका
ईरान के लिए, हिज्बुल्लाह, इजराइल के खिलाफ एक सशस्त्र समूह से कहीं ज्यादा है।
जबकि ईरान हमास और हूतियों का समर्थन करता है, फिर भी हिज्बुल्लाह में इसकी मौजूदगी ऐसी है, कि यह समूह व्यावहारिक रूप से IRGC का ही एक विस्तार है, जो ईरान की बेहद प्रभावशाली खुफिया और सशस्त्र सेना है, जो नियमित सेना से अलग काम करती है और सीधे सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करती है।
जेएनयू के सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज में मध्य पूर्व के विद्वान क़मर कहते हैं, कि विचारधारा और संचालन दोनों के संदर्भ में, हिज्बुल्लाह और ईरान लगभग एक ही हैं, जबकि इस क्षेत्र में मौजूद हमास, आंख मुंदकर ईरान की बात नहीं मानता है।
क़मर फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट में कहते हैं, "हमास के विपरीत, हिज्बुल्लाह IRGC की शाखा की तरह काम करता है। उदाहरण के लिए, जब तक ईरान ने सीरियाई गृहयुद्ध में बशर अल-असद का समर्थन नहीं किया, तब तक हिज्बुल्लाह भी सीरिया में सक्रिय नहीं था। एक बार जब ईरान ने समर्थन देने का वादा किया, तो IRGC असद की तरफ से संघर्ष में शामिल हो गया और उसे सत्ता में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आज भी सीरिया में काम कर रहा है।"
हिज्बुल्लाह ईरान के बड़े एजेंडे के लिए प्रॉक्सी है और संयुक्त राज्य अमेरिका मुख्य दुश्मन है।
जिस तरह ईरान का एजेंडा इजराइल से लड़ने तक सीमित नहीं है, उसी तरह हिज्बुल्लाह का एजेंडा भी इजराइल तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के मुताबिक ही ग्लोबल है।
कमर ने कहा है, कि "हमास, फिलीस्तीनी राज्य के लिए इजराइल के साथ युद्ध लड़ रहा है। हिज्बुल्लाह, इजराइल के साथ संघर्ष का हिस्सा है, लेकिन यह समूह के लिए बहुत छोटा युद्ध है। हिज्बुल्लाह, हमास के साथ लड़ने के लिए गाजा पट्टी नहीं जाएगा। इसकी फिलिस्तीनी राज्य के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है। इसके बजाय, हिज्बुल्लाह क्षेत्र और उससे परे व्यापक ईरानी एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध है।"
इन वजहों से, हिज्बुल्लाह की क्षमताओं का विनाश और उसके नेता की हत्या ईरान के लिए हमास के मारे गये प्रमुख हानिया की हत्या से कहीं ज्यादा बड़ा झटका है। चूंकि हिज्बुल्लाह ईरानी शासन की एक वैचारिक शाखा है और IRGC का विस्तार है, इसलिए इसके बुनियादी ढांचे और युद्ध-क्षमताओं को खत्म करने के साथ-साथ इसके नेता की हत्या ईरान को कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी।












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