GSK ने जेनटेक दवा से कैंसर के खतरे को छिपाया, एलिजाबेथ से भी लिया अवार्ड, अब 70 हजार लोगों ने किया केस
ब्लूमबर्ग बिजनेसवीक की एक रिपोर्ट में ये खुलासा किया गया है कि दवा कंपनी कैंसर के जोखिमों के बारे में बहुत पहले से जानती थी और उसने 40 सालों से दुनिया से ये सच छुपाए रखा।

गैस और अल्सर से राहत दिलाने वाली नामी दवा जेनटैक को लेकर दवा गंभीर ग्लैक्सो (GSK) गंभीर संकट में फंस गई है। ब्रिटेन की चर्चित दवा कंपनी ग्लैक्सो पर ये आरोप है कि जेनटेक दवा के सेवन से कैंसर जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। दवा कंपनी GSK ने तर्क दिया कि इसके आरोप के पीछे कोई सुंसगत या विश्वसनीय सुबूत नहीं है। लेकिन अब ब्लूमबर्ग बिजनेसवीक की एक रिपोर्ट में ये खुलासा किया गया है कि दवा कंपनी कैंसर के जोखिमों के बारे में बहुत पहले से जानती थी और उसने 40 सालों से दुनिया से ये सच छुपाए रखा।
दुनिया की सबसे प्रचलित दवा बनी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक GSK ने रैनिटिडीन नामक अणु विकसित किया। साल 1978 में उसे इसके लिए पेटेंट प्रदान किया गया। हालांकि यह अणु नया था लेकिन इसकी मदद से उस समय की प्रभावशाली दवा टैगामेंट की नकल करके जेनटेक बनाया गया। यह दवा अल्सर के इलाज में कारगर थी। देखते ही देखते इस दवा ने टैगामेंट को पीछे छोड़ दिया और दुनिया की सबसे प्रचलित दवा बन गई। इस दवा की बिक्री इतनी थी कि कंपनी की आधी आय इसी दवा से प्राप्त होती थी।
महारानी एलिजाबेथ ने दिया पुरस्कार
इतना ही नहीं, इस दवा की वजह से कंपनी के सीईओ को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ से नाइटहुड की उपाधि मिली। इस दवा की मदद से ये कंपनी आगे बढ़ती चली गई। आखिरकार 2019 में जेनटेन में कार्सिनोजेन की मात्रा उच्च पाई गई। आपको बता दें कि कार्सिनोजेन एक ऐसा पदार्थ है जो कैंसर का कारण बनता है। दवा के कुछ बैचों में संयोग या गलती से कार्सिनोजेन की उच्च मात्रा नहीं पाई गई थी, बल्कि जिस रेनिटिडिन अणु से यह दवा तैयार की जाती थी वही कैंसर पैदा करने वाला जहर बनाता है।
2020 में FDA ने लगाया बैन
यह मामला बढ़ा तो जेनटैक ने दुनिया भर से इस दवा को वापस बुला लिया। आखिरकार 2020 के अंत में FDA ने इस पर बैन लगा दिया। इसे बाजार से पूरी तरह से हटा दिया गया। अब ये खुलासा हुआ है कि कंपनी को इसके बारे में पहले से मालूम था लेकिन उसने कमाई के चक्कर में जेनटेक से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के संभावित खतरे से दुनिया को अंधेरे में रखा। ग्लैक्सो ने कहा था कि उसकी गैस की दवा से ट्यूमर नहीं होता, लेकिन उसके अपने वैज्ञानिकों और स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी थी।
70 हजार से अधिक लोगों ने किया मुकदमा
कार्सिनोजेन को एनडीएमए भी कहा जाता है, जिसका कभी रॉकेट के ईंधन में मिलाया जाता था। अब इसका इस्तेमाल सिर्फ प्रयोगशालाओं में कैंसर पर शोध के लिए चूहों पर किया जाता है। अमेरिका में जेनटेक या इसके जेनरिक स्वरूप का इस्तेमाल करने वाले 70 हजार से ज्यादा लोगों ने कंपनी पर मुकदमा किया है। लोगों ने कंपनी पर मिलावटी और खतरनाक दवा बेचने का आरोप लगाया है, जिसकी सुनवाई इसी महीने के अंत से शुरू होने वाली है। इस खबर मात्र से कंपनी के शेयर 2 फीसदी तक गिर गए हैं।
70 से अधिक सबूतों को किया खारिज
ब्लूमबर्ग ने कई अदालती फाइलों की समीक्षा की है। रिपोर्ट में दर्ज है कि FDA ने रेनिटिडिन को मंजूरी देते वक्त कैंसर के जोखिमों पर विचार किया था लेकिन ग्लैक्सो ने कोई आलोचनात्मक रिपोर्ट साझा नहीं किया था। इन 40 वर्षों में कंपनी ने कंपनी ने बार-बार दुनिया से सच छुपाने के लिए हर गलत प्रयास किया। कंपनी ने 70 से अधिक सबूतों को खारिज करने की कोशिश की और किसी को कभी भी कैंसर जैसी घातक बीमारी के खतरे की कोई चेतावनी नहीं दी।












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