मिस्र के मंदिर में मिला इस्लामिक युग के सोने-चांदी के सिक्कों का भंडार, किसने रखा होगा? उलझे वैज्ञानिक
इससे पहले अगस्त महीने में मिस्र में ही खुदाई के दौरान 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर भी मिल चुका है। मिस्र के पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि, ये मंदिर 4500 साल पुराना है।
काहिरा, सितंबर 17: मिस्र रहस्यमयी खुलासों की धरती माना जाता है और मिस्र की धरती के अंदर ऐसे ऐसे रहस्यमयी राज छिपे हुए हैं, जो इंसानों को आश्चर्य में डाल देते हैं। मिस्र के मकबरों के रहस्यों से आज भी पर्दा हटाए जाने का सिलसिला जारी है और मिस्र में दर्जनों जगहों पर अभी भी खुदाई होती रहती है, ताकि अतीत की गहराइयों में झांककर देखा जा सके, कि इतिहास में क्या क्या छिपा हुआ है और इस बार मिस्र में नील नदी के किनारे स्थिति एक मंदिर के पीछे इस्लामिक युग के सोने और चांदी के सिक्कों कों भंडार मिला है, जिसने लोगों में कौतूहल पैदा कर दिया है।

1000 साल पुराने हैं सिक्के
मिस्र में पुरातत्वविदों ने नील नदी के किनारे स्थित शहर एस्ना में एक मंदिर के पीछे लगभग 1,000 साल पुराने सोने और चांदी के सिक्कों का पता लगाया है। होर्ड, जिसे मिस्र की सर्वोच्च पुरातत्व परिषद के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा खोजा गया था, उसमें इस्लामी युग के विभिन्न हिस्सों में ढाले गए सिक्के शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 610 ईस्वी में इस्लाम की शुरूआत हुई थी, जब पैगंबर मोहम्मद ने इस्लाम की स्थापना की थी और फिर उसके बाद इस्लामिक युग की शुरूआत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने और चांदी के सिक्कों का जो भंडार मिला है, वो इस्लामिक युग के हैं और उनपर इस्लामिक युग की कलाकृतियां बनी हुई हैं।

कई तरह के सिक्के हैं शामिल
लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र के पुरातत्वविदों ने बताया है कि, पिछले एक साल से इस क्षेत्र में खुदाई चल रही है, जिसमें मंदिर के आंगन से प्राचीन सिक्कों का भंडार मिला है। उन्होंने कहा कि, 286 चांदी के सिक्के मिले हैं, जिनपर उस वक्त के राजा और रानियों की तस्वीरें बनाई गई हैं, मंदिर के पास से कई अलग अलग तरह के सोने के सिक्के भी मिले हैं, जिनमें एक अर्मेनिया का सिक्का भी शामिल है, जिसे 13 वीं शताब्दी में राजा लियो II के शासनकाल के दौरान ढाला गया था। इसके साथ ही ऑटोमन साम्राज्य के कांस्य और पीतल के सिक्के भी खोजे गये हैं।

प्राचीन काल के दिरहम भी मिले
इसके अलावा धरती के अंदर से मिले छिपे हुए खजाने से दिरहम भी मिले हैं, (आज के संयुक्त अरब अमीरात सहित कई अरब राज्यों में उपयोग किए जाने वाले चांदी के सिक्के), जिन्हें विभिन्न राजाओं और सुल्तानों ने अपने अपने समय पर ढलवाया था। शोधकर्ताओं ने एक अनुवादित बयान में कहा है कि, खनन प्रक्रिया के दौरान उपयोग किए गए मोल्ड और वजन का पता लगाया है, लेकिन पुरातत्वविदों को इस बात का पता नहीं चल पाया है, कि आखिर इन सोने और चांदी के सिक्कों के ढेर को मंदिर स्थल पर क्यों छोड़ दिया गया था। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि आगे के विश्लेषण से सिक्कों के इतिहास का सुराग मिलेगा।

4500 पुराना सूर्य मंदिर मिला
आपको बता दें कि, इससे पहले अगस्त महीने में मिस्र में ही खुदाई के दौरान 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर भी मिल चुका है। मिस्र के पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि, ये मंदिर 4500 साल पुराना है। खोज से मिले संकेत बताते हैं कि ये पांचवें राजवंश के खोए हुए चार सूर्य मंदिरों में से एक का हो सकता है। मिस्र में सूर्य मंदिर की खोज होना एक दुर्लभ घटना है। पुरातत्वविद बताते हैं कि, मंदिर को मिट्टी के ईंट से निर्माण कराया गया था। बताया जा रहा है कि ये मिट्टी के ईंट से बनी इमारत मिस्र के पांचवें राजवंश के खोए हुए सूर्य मंदिरों में से एक है। इतिहासकार बताते हैं कि, मिस्र का पांचवा राजवंश 2465 से 2323 ईसा पूर्व तक था।

किसने तबाह किया था सूर्य मंदिर
अगस्त महीने में मिस्र के पुरावशेष और पर्यटन मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि,'खोज से मिले संकेत बताते हैं कि ये पांचवें राजवंश के खोए हुए चार सूर्य मंदिरों में से एक का हो सकता है। उन्होंने बताया कि, इमारत का एक हिस्सा इसक बाद वाले शासक ने अपना मंदिर बनाने के लिए तबाह कर दिया होगा। आपको ये भी बता दें कि, पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान जमीन के नीच प्राचीन काल की कई पुरानी वस्तुएं प्राप्त हुई थीं। उन्होंने बताया था कि, जमीन की नीचे खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन, पांचवें राजवंश के राजाओं के नाम वाले कुछ स्टांप भी मिले हैं।












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