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Superbug Crisis: विनाशकारी सुपरबग संकट क्या है, ये कैसे ले सकता है 4 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान?

What is Superbug Crisis: द लैंसेट में प्रकाशित एक स्टडी में अनुमान लगाया गया है, कि साल 2050 तक दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों से होने वाली मौतों में लगभग 70% की वृद्धि हो सकती है। शोध में अनुमान लगाया गया है, कि 2025 और 2050 के बीच रोगाणुरोधी प्रतिरोध (antimicrobial resistance- AMR) से 39 मिलियन से ज्यादा लोगों की मौतें होंगी।

AMR तब होता है, जब बैक्टीरिया और कवक उन्हें खत्म करने के लिए बनाई गई दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। यानि, ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया और कवक के ऊपर दवाओं का असर होना बंद हो जाता है।

Superbug Crisis

दुनिया में गंभीर स्वास्थ्य संकट आने का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने AMR को एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य खतरा करार दिया है, जो मनुष्यों, जानवरों और पौधों में रोगाणुरोधी दवाओं (antimicrobial medications) के दुरुपयोग और अतिशय प्रयोग की वजह से होता है। वैज्ञानिकों ने स्टडी के आधार पर संकेत निकाला है, कि एएमआर का इस्तेमाल का तरीका और भी खराब होता जा रहा है, इसलिए नए एंटीबायोटिक्स और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर गंभीरता बरतने की सलाह दी गई है।

शोधकर्ताओं और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस प्रोजेक्ट पर ग्लोबल रिसर्च, स्वास्थ्य मैट्रिक्स और मूल्यांकन संस्थान और अन्य संस्थानों ने 1990 से 2021 तक 204 देशों और क्षेत्रों में 22 रोगाणुओं, 84 रोगाणु-दवा संयोजनों और 11 संक्रमणों के लिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध की वजह से या उससे जुड़ी मौतों और बीमारियों का अनुमान लगाया है। रोगाणुरोधी प्रतिरोध के कारण होने वाली मौत सीधे इसके कारण हुई थी, जबकि एएमआर से जुड़ी मौत का कोई और कारण हो सकता है, जो रोगाणुरोधी प्रतिरोध से बढ़ गया था।

1990 से 2021 तक, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में एएमआर से होने वाली मौतों में 50% से ज्यादा की कमी आई, लेकिन सत्तर साल से ज्यादा उम्र के वयस्कों में इससे होने वाली मौतें 80% से ज्यादा बढ़ गई है। मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस (MRSA) को सभी आयु समूहों में सबसे ज्यादा बोझ वाले रोगजनक-दवा संयोजन के रूप में जाना जाता है।

भविष्य को लेकर वैज्ञानिकों का अनुमान क्या है?

शोधकर्ताओं ने तीन अलद अलग दृश्य के जरिए 2050 तक एएमआर से संबंधित मौतों और बीमारियों का अनुमान लगाने के लिए सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग किया है। और वो हैं, मौजूदा रुझान जारी रहना, नए एंटीबायोटिक्स का विकास, और एंटीबायोटिक्स और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक बेहतर पहुंच। स्टडी में पाया गया है, कि बेहतर देखभाल और मजबूत एंटीबायोटिक्स के बिना, 2050 तक एएमआर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की आशंका है।

एएमआर से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में दक्षिण एशिया, लैटिन अमेरिका और उप-सहारा अफ्रीका शामिल हैं, जहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा लोगों की पहुंच काफी कम होती है। स्टडी में वैश्विक स्तर पर एएमआर से निपटने के लिए इन्वेस्टमेंट और इस मुद्दे को लक्ष्य बनाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

शोधकर्ताओं ने इस बढ़ते खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नए एंटीबायोटिक्स और बेहतर एंटीबायोटिक प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। वे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान करते हैं।

निष्कर्ष स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में निवेश और एंटीबायोटिक डेवलपमेंट में इनोवेशन के जरिए एएमआर को संबोधित करने के लिए वैश्विक कोशिशों पर जोर देने आवश्यकता बताते हैं। एएमआर से संबंधित मौतों में अनुमानित वृद्धि को कम करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है।

एएमआर से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की पहुंच को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर ध्यान दिया गया है, साथ ही मौजूदा रोगाणुरोधी दवाओं के इस्तेमाल में डॉक्टरों को जिम्मेदारी बरतने का आह्वान किया गया है। और अगर एंटी बायोटिक्स का संभल कर इस्तेमाल किया जाता है, तो फिर इससे खराब प्रभाव से होने वाली मौतों की संख्या काफी कम की जा सकती है।

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