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पाकिस्तान में डॉक्टर बना कसाई, गरीबों से किडनी निकालकर अमीरों को बेचता था, जानिए कैसे हुआ खुलासा

पाकिस्तान में पुलिस ने एक कुख्यात डॉक्टर द्वारा चलाए जा रहे अंग प्रत्यारोपण गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ये गिरोह अमीर लोगों के लिए अंगों की तस्करी करता था। पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।

इस गिरोह में एक डॉक्टर और एक मोटर मैकेनिक भी शामिल हैं। इन पर अंग तस्करी गिरोह चलाने का आरोप है। पाकिस्तान पुलिस के मुताबिक सरगना डॉक्टर का नाम फवाद मुख्तार है। मुख्तार ने अब तक 328 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया है।

Pakistan Police Bust Organ Trafficking Ring

आश्चर्य की बात है कि वह इन किडनियों को एक करोड़ तक में बेचता था। फवाद मुख्तार को दूसरे आरोपों में पहले भी पांच बार गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन हर बार वह जमानत हासिल करने में कामयाब रहा।

पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया है कि गरीब लोगों की किडनियां निकालकर विदेशों में तीस लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए में बेची गई हैं। फवाद ने बिना लोगों की जानकारी उन पर सर्जरी की। इस काम में मोटर मैकेनिक ने असिस्टेंट के तौर पर उसकी मदद की।

पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने रविवार रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा 'जो फैक्ट और आंकड़े हमारे पास आए हैं उससे दिल दहल जाता है। उन्होंने कहा पुलिस ने जांच में जो आंकड़े बताए हैं। उससे कहीं ज्यादा, ट्रांसप्लांट और अवैध सर्जरी हुई हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि ट्रांसप्लांट नीजी क्लिनिक में किए जाते थे। नकवी ने यह भी खुलासा किया कि डॉ. फवाद को कथित तौर पर इन ऑपरेशनों के दौरान एक अनाम कार मैकेनिक से मदद मिलती थी जो एनेस्थीसिया देता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गिरोह अस्पतालों से मरीजों को लुभाता था और तक्षशिला, लाहौर शहर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में निजी तौर पर ऑपरेशन करता था।

नकवी ने कहा, "वे कश्मीर में ऐसा करने में सक्षम थे क्योंकि किडनी प्रत्यारोपण के संबंध में कोई कानून नहीं है, इसलिए उनके लिए वहां ऑपरेशन करना आसान था।"

मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक तीन मौतों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन अधिकारी अभी भी आंकड़ों की पुष्टि कर रहे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पीड़ितों की किडनी निकाली गई उनमें से कुछ को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके अंग निकाल लिए गए हैं।

नकवी ने कहा कि वह देश के साइबर कानूनों को मजबूत करने के लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक के साथ काम कर रहे हैं ताकि ऐसे अवैध किडनी प्रत्यारोपण के विज्ञापनों पर ऑनलाइन प्रतिबंध लगाया जा सके। उन्होंने कहा, "हमारा पूरा ध्यान इस तरह से काम कर रहे अन्य गिरोहों पर नज़र रखने पर है।"

पुलिस को गिरोह के कृत्य के बारे में तब पता चला जब एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर कहा कि उसे एक शख्स ने कम खर्च में इलाज कराने के लिए राजी किया था और उसे एक निजी क्लीनिक ले जाया गया।

वहां इलाज कराने के बाद भी जब उसकी बीमारी ठीक नहीं हुई इसके बाद वह दूसरे डॉक्टर के पास गया। जांच कराने के बाद उसे पता चला कि उसकी किडनी निकाल ली गई है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में मानव अंगों की तस्करी को 2007 में अवैध बना दिया गया और 2010 में इसके लिए कठोर कानून बनाया गया। पाकिस्तान में मानव तस्करी की पुष्टि होने पर 10 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

ये कानून बनाने से पहले, पाकिस्तान अंग प्रत्यारोपण की तलाश में विदेशियों और अमीर पाकिस्तानियों के लिए एक मुफीद जगह था। यहां पर किडनी की खरीद-फरोख्त एक आम बात थी। कुछ गरीब पाकिस्तानी जीवित रहने के लिए अपनी किडनी बेच देते थे।

लेकिन सरकार द्वारा कानून बना देने के बाद भी यह प्रथा जारी है। स्थानीय मीडिया ने बताया है कि हाल के वर्षों में अवैध किडनी प्रत्यारोपण फिर से शुरू हो गया है।

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