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France riots: फ्रांस में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर गोली मारने का कानून क्यों बना?

फ्रांस में 17 वर्षीय लड़के की पुलिस की गोली से हुई मौत के बाद पूरे देश में भड़की हिंसा की आग थम नहीं रही है। लगातार पांच रातों से फ्रांस जल रहा है।

प्रदर्शनकारी इमारत और वाहनों को टारगेट कर रहे हैं और उनमें आगजनी कर रहे हैं। हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि पुलिसकर्मियों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक , 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

violence in france

इस हिंसा में लगभग 3 हजार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आपको बता दें, कि 27 जून को फ्रांसीसी पुलिस ने सुबह 9 बजे ट्रैफिक जांच के दौरान कार से जा रहे 17 साल के नाहेल एम नाम के लड़के को गोली मार दी थी।

इस हादसे को लेकर पुलिस ने दावा किया कि कार के टायर पर फायर करने के दौरान चालक को गोली लगी। हालांकि बाद में वायरल हुए वीडियो में दिखा कि ट्रैफिक पुलिस उस लड़के को रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन वो भागने की कोशिश करता है, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस गोली चला दे देती है।

गोली लगने के बाद भी उसने भागने की कोशिश की और करीब 200 मीटर दूर जाकर कार एक दीवार से टकराकर क्रैश हो गई। 38 साल के पुलिस अफसर को सस्पेंड करने के बाद हिरासत में ले लिया गया है। नाहेल की मौत ने फ्रांसीसी पुलिसिंग की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है।

पुलिस फोर्स की इस तरह की अमानवीय कार्रवाई और उनके काम करने के तौर तरीकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें 2017 का विवादास्पद आग्नेयास्त्र कानून भी शामिल है, जो अधिकारियों को तब गोली मारने की अनुमति देता है जब कोई ड्राइवर रुकने के आदेश की अनदेखी करता है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैफिक चेकिंग के दौरान फ्रांस में ड्राइवर को शूट करने की इस साल की यह तीसरी घटना है। वहीं, पिछले साल गोलीबारी की ऐसी 13 घटनाएं रिपोर्ट की गई थी। वहीं, 2020 में 2 और 2021 में ऐसी घटनाओं के 3 मामले सामने आए थे।

असल में फ्रांस में इस तरह की घटनाओं के पीछे 2017 का 'रोफ्यू दोब्तोंपेरे' नाम का एक कानून है, जिसमें पुलिस 5 मामलों में ड्राइवर को गोली चला सकती है। इसमें से एक मामला ऐसा भी है कि अगर ट्रैफिक पुलिस को लगता है कि ड्राइवर ने जानबूझकर उसके आदेश की अनदेखी की है और इससे अधिकारी के जीवन या शारीरिक सुरक्षा, या अन्य लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता है, तो वह गोली चला सकती है।

आपको बता दें कि फ्रांस में हिंसा की घटनाएं आम बात हैं। साल 2016 में, पेरिस के में एक ट्रैफिक अधिकारी पर एक युवाओं की टोली ने हमला कर दिया था उसे आग के हवाले कर दिया था। इसकी बाद अधिकारी बुरी तरह से जल गया और कोमा में चला गया। इसके बाद पूरे देश में पुलिस महकमा नाराज हो गया और सख्त कानून बनाने की मांग करने लगा।

इसके बाद तत्कालीन गृह मंत्री बर्नार्ड कैज़नेउवे ने पुलिस द्वारा आग्नेयास्त्रों के उपयोग पर कानून को बदलने का फैसला किया। इसके बाद मार्च 2017 में दंड संहिता के अनुच्छेद 435-1 को पारित किया गया और 'रोफ्यू दोब्तोंपेरे' कानून अमल में आया।

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