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दुनिया में मौजूद थे 10 मीटर लंबे डायनासोर, चलते तो हिलती थी धरती, उल्कापिंड ने मिटाया

जलवायु परिवर्तन और खगोलीय घटनाएं करोडों वर्ष पहले पृथ्वी पर बड़े बदलाव की वजह बनीं। वैज्ञानिकों ने धरती से जीवों के विलुप्त होने की कई वजह बताई है।

Fossils of feathered Dinosaur

Fossils of feathered Dinosaur: साइंटिस्ट्स पृथ्वी की जलवायु परिवर्तन और जीवों के इतिहास पता लगाने के लिए उन जीवाश्मों की तलाश में हैं, आज से लाखों करोड़ों साल पहले जीवित थे। ऐसी ही एक खोज चिली के पेटागोनिया क्षेत्र के वैज्ञानिक कर रहे हैं। हाल में उन्होंने अंटार्कटिका के बाहर धरती के सबसे दक्षिणी छोर पर रहने वाले डायनासोर के जीवाश्मों का पता लगाया है, जिसमें मेगाराप्टर्स के अवशेष भी शामिल हैं। ये वो विशालकाय जीव हैं जिनका जीवन खाद्य श्रंखला (Food chain) पर आधारित था।

10 मीटर लंबा जीवाश्म

10 मीटर लंबा जीवाश्म

चिली में वैज्ञानिकों ने टोरेस डेल पेन पार्क के करीब मेगाराप्टर जीवाश्मों की खोज की है। साइंस पत्रिका 'जर्नल ऑफ साउथ अमेरिकन अर्थ साइंसेज' के अनुसार, क्रेटेशियस काल में विशालकाय जीव मौजूद थे। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में एक मांसाहारी डायनासोर, मेगाराप्टर्स के जीवाश्म 10 मीटर तक लंबे आकार में पाए गए थे। 2016 और 2020 के बीच मैगलन बेसिन में चिली से दक्षिण रियो डी लास चिनस वैली से बरामद किए गए अवशेषों में अनेंलागिया, वेलोसिरैप्टर जैसे डायनासोर के कुछ असामान्य अवशेष भी शामिल हैं। अनुमान हैं कि ये जीवाश्व एक विशालकाय जीव के थे जिसके पंख भी होते थे।

7 करोड़ साल पहले मौजूद थे डायनासोर

7 करोड़ साल पहले मौजूद थे डायनासोर


जर्नल ऑफ साउथ अमेरिकन अर्थ साइंसेज के अनुसार, क्रेटेशियस अवधि के दौरान दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में रहने वाले एक मांसाहारी डायनासोर, मेगाराप्टर्स के जीवाश्म 10 मीटर तक लंबे आकार में पाए गए थे। लगभग 70 मिलियन वर्ष पहले इन जीव अस्तित्व में थे। जिसके बाद ये विलुप्त हो गए।

जीवाश्म खोज रहे साइंटिस्ट्स

जीवाश्म खोज रहे साइंटिस्ट्स

वैज्ञानिकों ने चिली के पैटागोनिया क्षेत्र में 'गुइडो' पहाड़ी पर मेगालेन्स और अंटार्कटिक क्षेत्र में टोरेस डेल पेन पार्क के करीब मेगाराप्टर के कुछ जीवाश्मों की खोज की है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को चिली अंटार्कटिक इंस्टीट्यूट (INACH) के निदेशक मार्सेलो लेप्पे ने बताया कि विशालकाय स्तनधारी जीवों के जीवाश्म मौजूद हैं, वो मांसाहारी भी हो सकते हैं। मार्सेलो लेप्पे के अनुसार अभी ऐसे जीवाश्मों की खोज की जा रही है। हालांकि मार्सेलो लेप्पे ने अब तक मिले जीवाश्मों को पर्याप्त नहीं माना है। उन्होंने न्यूज एजेंस से का कि अभी ऐसे जीवाश्म नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर खोज पूरी की जा सके।

पहले भी मिले हैं अवशेष

पहले भी मिले हैं अवशेष

यूनिवर्सिटी ऑफ चिली के शोधकर्ता जारेड अमुडियो के अनुसार, अर्जेंटीना या ब्राजील में मिले विशालकाय जीवों के अवशेषों में समानता नहीं थी। जारेड के मुताबिक इन देशों में मिले अवशेष एक नई प्रजाति के जीवों के संकेत देते हैं। संभव है कि ये डायनासोर या उनसे संबंधित अन्य विशालकाय जीवों से संबंधित हों।

डायनोसोर के विलुप्त होने की वजह

डायनोसोर के विलुप्त होने की वजह

चिली अंटार्कटिक इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट लेप्पे के अनुसार, पेटागोनिया में तापमान में तेज गिरावट और कई हजार वर्षों तक चलने वाली तीव्र ठंड की लहरें क्रेटेशियस काल तक बनी रहीं। लेप्पे ने कहा कि जीवों के खत्म होने की वजह दुनिया होना था। रियो डी लास चिनास घाटी की चट्टानों में इसके सबूत भी मोजूद हैं। साइंटिस्ट्स के अध्ययनों को मुताबिक आज करीब 65 लाख वर्ष पहले ही डायनासोर धरती से विलुप्त हो चुके थे। मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप पर उल्कापिंड के गिरने के घटना और वहां मिले जीवों के अवशेष इस बात के संकेत हो सकते हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन भी बड़ा कारक है।

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