बांग्लादेश के साथ संबंधों को सुधारने की शुरुआत? भारत के टॉप अधिकारी पहुंचे ढाका, मालदीव जैसी गंभीर डिप्लोमेसी?
India-Bangladesh: मालदीव में जब मोहम्मद मुइज्जू की सरकार बनी तो यही संदेश गया, कि भारत के साथ इस द्वीप देश के संबंध खराब हो चुके हैं और शुरूआती दिनों में ऐसा लगा भी। मालदीव के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की और भारत में मालदीव के बहिष्कार करने की मुहिम चली।
संबंध यहां तक खराब होने लगे, कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने चीन दौरे से माले लौटने के बाद बिना भारत का नाम लिए यहां तक कह डाला, कि 'ताकतवर देश हमें अपने इशारों पर नहीं नचा सकते हैं।'

लगने लगा, कि शायद दोनों देशों के बीच के संबंध काफी खराब हो जाएंगे, लेकिन एक बात जो इस दौरान देखने को मिली, वो थी भारत की गंभीर डिप्लोमेसी। भारत ने लगातार मालदीव की सरकार से संपर्क बनाए रखा, लगातार बातचीत की और फिर धीरे धीरे दोनों देशों के संबंध पटरी पर लौटने लगे। ये भारत की गंभीर डिप्लोमेसी की ही ताकत थी, कि मालदीव में 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाने वाले राष्ट्रपति मुइज्जू लगातार दो बार भारत पहुंचे और ताजा स्थिति ये है, कि दोनों देशों के संबंध सामान्य कहे जा सकते हैं।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या बांग्लादेश को लेकर भी भारत अब उसी तरह की गंभीर डिप्लोमेसी कर रहा है और पड़ोसी देश के साथ संबंध को सुधारने की कोशिश कर रहा है?
ये सवाल इसलिए, क्योंकि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार की तख्तापलट के बाद ये पहला मौका है, जब भारतीय विदेश मंत्रालय के टॉप अधिकारी ढाका का पहुंच चुके हैं।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी पहुंचे बांग्लादेश
विदेश सचिव विक्रम मिसरी भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करने के लिए सोमवार सुबह ढाका पहुंच गये हैं। अधिकारियों ने बताया, कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहला उच्च स्तरीय आधिकारिक दौरा है।
यह यात्रा बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि और चटगांव में इस्कॉन के आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी की हालिया रिपोर्टों के बीच हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में दोनों देशों के विदेश सचिवों के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल द्वारा दोनों देशों के बीच स्थापित विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) तंत्र में भाग लेकर द्विपक्षीय संबंधों के सारे मुद्दों पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
4 दिसंबर को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा, कि दोनों देशों के विदेश सचिव आपसी हितों के मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इस साल सितंबर में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश सलाहकार (मंत्री) मोहम्मद तौहीद हुसैन ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी। उन्होंने "अच्छे कामकाजी संबंध" बनाए रखने का फैसला किया और भारत और बांग्लादेश के बीच एफओसी आयोजित करने का भी फैसला किया।
हालांकि, भारतीय विदेश सचिव का दौरा उस वक्त हुआ है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की खबरें जारी हैं। 6 दिसंबर को ढाका के बाहरी इलाके में एक और हिंदू मंदिर में कथित तौर पर आग लगा दी गई। ढाका के उत्तर में धोर गांव में महाभाग्य लक्ष्मीनारायण मंदिर पर शुक्रवार देर रात हमला हुआ। मंदिर के पर्यवेक्षक बाबुल घोष ने कहा, कि उनके पैतृक मंदिर को जलाने के लिए अज्ञात बदमाशों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।
एएनआई से बात करते हुए, घोष ने कहा कि हमलावरों ने मूर्तियों पर पेट्रोल डाला, जबकि वह घर पर मौजूद नहीं थे और उनके कदमों की आवाज सुनकर भाग गए। उन्होंने आगे आरोप लगाया, कि हमलावरों के पास मूर्तियों को जलाने के अलावा कुछ "छिपे हुए इरादे" थे।
वहीं, आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास भी कथित राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हैं। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव डाला है, कि वह सुनिश्चित करे कि 'व्यक्ति के कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाए' और उसका मुकदमा निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
आपको बता दें, कि सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को ढाका में 'देशद्रोह' के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके वकील को कोर्ट नहीं जाने दिया गया।
लिहाजा, सवाल ये हैं, कि क्या बांग्लादेश भी भारत की तरह गंभीर डिप्लोमेसी में शामिल होगा और दोनों ही देशों के बीच जो तनावपूर्ण संबंध बने हैं, क्या वो सामान्य हो पाएंगे?












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