25 सालों में पहली बार, शी जिनपिंग की कैबिनेट में एक भी महिला नहीं, चीन की राजनीति में 'अछूत' महिलाएं
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना को 101 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वहां की राजनीति में महिलाXओं को राजनीति के लायक नहीं समझा जाता है।
No women in Chinese Cabinet: शी जिनपिंग ने तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान को बदल दिया और अब 25 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, कि चीन के पोलित ब्यूरो में किसी भी महिला को शामिल नहीं किया गया है। पिछले पोलित ब्यूरो में शामिल एकमात्र महिला सुन चुनलन को रिटायर्ड कर दिया गया है और शी जिनपिंग ने जो नये पोलित ब्यूरो का गठन किया है, उसमें एक भी महिला को शामिल नहीं किया गया है। आइये जानते हैं, कि कैसे चीन की राजनीति में महिलाएं 'अछूत' बना दी गई हैं और क्यों चीन में महिलाओं को राजनीति में आने लायक नहीं समझा जाता है।

जिनपिंग की कैबिनेट में महिलाएं नहीं
एएफपी समाचार एजेंसी ने विश्लेषकों के हवाले से बताया कि, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में अपने दो पूर्व सचिवों सहित चार सहयोगियों को शामिल किया है। स्टैंडिंग कमेटी में शामिल सात में से 6 सदस्य चीनी राष्ट्रपति के वफादार हैं और उन्हें उनकी वफादारी का इनाम मिला है। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, वर्तमान में शंघाई ग्रुप के माने जाने वाले प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी रिटायर्ड कर दिया गया है और उनका कार्यकाल मार्च में समाप्त होने के बाद ली कियांग देश में नये प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालेंगे। वहीं, लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद शी जिनपिंग ने विश्वास जताने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को धन्यवाद दिया है। अपने संक्षिप्त संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा कि, उनके नेतृत्व में देश ने काफी कुछ हासिल किया है और अब चीन एक आधुनिक समाजवादी देश बनने की तरफ आगे बढ़ेगा।

चीन की राजनीति में 'अछूत' महिलाएं
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना को 101 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वहां की राजनीति में महिलाओं को राजनीति के लायक नहीं समझा जाता है। चीन की राजनीति में महिलाएं लगातार हासिए पर रही हैं। सुपरचाइना में लिखते हुए जियायुन फेंग ने कहा एक बार कहा था, कि चीन में बड़े पैमाने पर आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन हुए हैं, पिछले 100 सालों में चीन का विकास भी काफी तेजी से हुआ है, लेकिन राजनीति में महिलाओं का आगे आना अभी भी सबसे मुश्किल बात है। पुरुष अभी भी चीन के राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं पर हावी हैं। चीन की कम्यीनिस्ट पार्टी की स्थापना दिवस के 100 साल पूरे होने पर पिछले साल अलजजीरा ने चीन की राजनीति में महिलाओं की स्थिति को लेकर एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें पता चला था कि चीनी राजनीति में महिलाओं की भूमिका बेहद कमजोर है।

महिलाओं को नहीं समझा जाता राजनीति लायक
अलजजीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि, चायना कम्यूनिस्ट पार्टी के करीब 9 करोड़ 20 लाख सदस्यों में सिर्फ 2 करोड़ 80 लाख महिलाएं हैं। जो 30 प्रतिशत से काफी कम है और इनमें से सिर्फ पांच महिलाएं ही ऐसी हैं, जो 13वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस, चीन की शीर्ष विधायिका और 13वीं चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी), देश की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था की सभी प्रतिनिधि थीं। अल जज़ीरा की रिपोपर्ट में पता चला था कि, 1949 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद से चीन के शीर्ष राजनीतिक निकाय में एक भी महिला को नियुक्त नहीं किया गया है। 71 वर्षीय उप प्रधान मंत्री सुन चुनलन पोलित ब्यूरो में एकमात्र महिला थीं, जो अब रिटायर्ड हो चुकी हैं।

महिलाओं के अधिकार की बात नहीं
कम्यूनिस्ट पार्टी के संविधान में महिलाओं के अधिकार का जिक्र नहीं किया गया है। भले ही महिलाएं चीन के "न्यू कल्चर मूवमेंट" और 4 मई 1919 को हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल रही हैं, और जिन महिलाओं की वजह से माओ ने चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी को मजबूती दी थी, उन्हें भी चीन की राजनीति से पूरी तरह दरकिनार रखा गया। साल 2017 में सीसीपी की कांग्रेस में (यह आयोजन हर पांच साल में आयोजित किया जाता है) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की एक परियोजना, चाइना डेटा लैब के अनुसार, 938 कुलीन प्रतिनिधियों में से केवल 83 महिलाएं शामिल हो पाई थीं, जो 10 प्रतिशत के आंकड़े से भी कम है। अधिकांश महिलाएं प्रांतीय स्थायी समिति में पाई जाती हैं। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की 25 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में सिर्फ उप-प्रधानमंत्री प्रीमियर सन चुनलन को शामिल किया गया था, जिन्हें इस बार रिटायर्ड कर दिया गया, लेकिन इस बार किसी महिला को शामिल नहीं किया गया। वहीं, सबसे प्रमुख स्टैंडिंग कमेटी में तो आज तक किसी महिला को शामिल नहीं किया गया।

कम उम्र महिलाओं की स्थिति और खराब
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी में आंशिक तौर पर तो महिलाओं को एंट्री मिल जाती है, लेकिन पार्टी के अंदर उन्हें बढ़ावा नहीं मिलता है। खासतौर पर अगर कोई कम उम्र की महिला कम्यूनिस्ट पार्टी में ऊंची रैंक हासिल करना चाहे, तो उनके लिए ये असंभव बात होती है। कम्यूनिस्ट पार्टी में महिलाएं सिर्फ एक चौथाई हैं, लेकिन उन्हें पुरूष सदस्यों के मुकाबले नीचे रखा जाता है। यूसीएसडी के स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर विक्टर शिह ने कहा कि, "शायद पार्टी के सदस्यों की भर्ती को लेकर पुरूष कार्यकर्ता पूर्वाग्रह से ग्रसित रहते हैं और महिलाओं को ऊंचे पद के काबिल नहीं समझते हैं।

चीनी समाज को समझिए
जर्मनी के मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज के विश्लेषक वैलेरी टैन कहते हैं कि,''जबकि 10 प्रतिशत प्रांतीय, नगरपालिका और काउंटी स्तर के नेतृत्व पदों को महिलाओं के लिए अलग रखा जाना चाहिए, लेकिन पुरुषों को वरीयता मिलने की वजह से महिलाओं के लिए कोई रिजर्व कैटोरिगी नहीं है"। वैलेरी टैन कहते हैं कि ''शी जिनपिंग के शासन काल में महिलाओं की भागीदारी और भी कम कर दी गई है। उन्होंने कहा कि '' लैंगिक रूढ़िवादिता या ऐतिहासिक पारंपरिक मानदंड आज भी बहुत ज्यादा हैं, जो शी जिनपिंग के कार्यकाल में और ज्यादा बढ़ गया है। चीन में एक कॉमन रूढ़ीवादी सोच है कि महिलाओं को शादी करनी है, फिर बच्चे को जन्म देना है। खासकर अब जबकि चीन की जनसंख्या दर भयानक स्तर पर गिर रही है, तब महिलाओं को जबरन बच्चे पैदा करने के लिए बाध्य किया जाता है और उन्हें बच्चों को पालने के लिए कहा जाता है।'' उन्होंने कहा कि, चीन में स्थिति ये है कि ''सरकार या पार्टी सचिव के प्रमुख के रूप में काउंटी स्तर के पदों पर महिलाएं केवल 9.33 प्रतिशत हैं, जो शहरों में 5.29 प्रतिशत और प्रांतीय स्तर पर 3.23 प्रतिशत तक गिर जाती है।
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