पहली बार महिला रखेगी चांद पर कदम, 50 वर्षों बाद उड़ान के लिए NASA का विशाल रॉकेट तैयार
केप केनवेरल (अमेरिका), 18 अगस्त: अमेरिका का आर्मेटिस मिशन तैयार है। इसी महीने के आखिर में इसके पहले रॉकेट की लॉन्चिंग होनी है। गौरतलब है कि अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा यह लॉन्चिंग ऐसे साल में कर रहा है, जब कुछ महीने बाद ही चंद्रमा की सतह पर इंसान के कदम रखने की 50वीं वर्षगांठ मनाई जाने वाली है। नासा ने वादा किया है कि इस बार चंद्रमा पर इंसान जो कदम रखेगा, उसमें पहली बार महिला का कदम होगा। नासा का यह मून मिशन दरअसल एक पड़ाव है, मंगल पर भी इंसान भेजने का।

आर्मेटिस 1 की 29 अगस्त को लॉन्चिंग
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का चंद्रमा पर जाने वाला नया विशाल रॉकेट पहली उड़ान के लिए तैयार है। स्पेस लॉन्च सिस्टम के नाम के इस व्हीकल को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर की लॉन्चिंग पैड पर पहुंचाया जा चुका है, जिसके कि 29 अगस्त को छोड़े जाने की संभावना है। पहली उड़ान परीक्षण के लिए होगी, जिसमें कोई मानव नहीं होगा। लेकिन, आगे छोड़े जाने वाले मिशन में अंतरिक्ष यात्री वापस 50 वर्षों बाद चांद की सतह पर कदम रखने वाले हैं।

दिसंबर में है चांद पर उतरने की 50वीं वर्षगांठ
स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) करीब 100 मीटर ऊंचा है। स्थानीय समय के मुताबिक इस विशाल लॉन्चिंग व्हीकल को केनेडी स्पेस सेंटर की असेंबली बिल्डिंग से मंगलवार रात को खिसकाना शुरू किया गया और 6.7 किलोमीटर की यह दूरी बुधवार सूर्योदय के बाद पूरी हुई। नासा के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है। क्योंकि, आने वाले दिसंबर में वह अपोलो 17 के चंद्रमा पर उतरने की 50वीं वर्षगांठ मनाने वाला है, जो कि चांद पर अंतिम मानवीय लैंडिग थी।

चांद के रास्ते मंगल पर उतरेगा इंसान!
अब नासा अपने नए आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चंद्रमा पर वापस मानव को भेजने के लिए तैयार हो रहा है। इन 50 वर्षों में टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है। नासा का यह मून मिशन असल में मंगल पर इंसान को उतारने की तैयारी है, जिसके लिए वह चांद के जरिए रास्ता तलाशने की कोशिश में है। नासा की योजना 2030 के दशक में या उसके ठीक बाद मंगल पर इंसान को भेजने की है और यह मून मिशन उसी का शुरुआती हिस्सा है।

अपोलो सैटर्न वी रॉकेट से 15% ज्यादा शक्ति
स्पेस लॉन्च सिस्टम से लॉन्च के वक्त अपोलो सैटर्न वी रॉकेट की तुलना में 15% ज्यादा ताकत से आर्मेटिस को छोड़ा जाएगा। इस अतिरिक्त शक्ति को आगे और भी बेहतर किया जाएगा। मकसद ये है कि इस वाहन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से और भी ज्यादा दूर भेजा जा सके। साथ ही उस अंतरिक्ष यान में और भी ज्यादा उपकरण और सामान भेजे जा सकें, जिनकी सहायता से अंतरिक्ष यात्री थोड़े ज्यादा समय तक वहां रह सकें।

आर्टेमिस 3 की लैंडिंग 2025 में होगी
क्रू कैपसुल की क्षमता भी ज्यादा है। इसका नाम ओरियन है, जिसमें ज्यादा जगह है। यह 5 मीटर चौड़ा है, जो कि 1960 और 70 के दशक के ऐतिहासिक कमांड मॉड्यूल से भी एक मीटर ज्यादा है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा, 'हम सभी जो चंद्रमा की ओर देखते हैं, इस सपने के साथ कि मानवजाति एक दिन चांद की सतह पर वापस जाएगा। हम यहां हैं! हम वापस जा रहे हैं। और यह यात्रा, हमारी यात्रा आर्टेमिस 1 से शुरू होती है।' उन्होंने बताया कि 'पहला क्रू लॉन्च, आर्टेमिस 2, 2024 में अब से दो साल बाद है। हमें उम्मीद है कि पहली लैंडिंग, आर्टेमिस 3 2025 में होगी।'

चांद पर उतरेगी दुनिया की सबसे पहली महिला
नासा का वादा है कि तीसरे मिशन में जो कि चंद्रमा पर लैंड करेगा, उसमें दुनिया की पहली महिला यात्री चांद की सतह पर अपने कदम रखेगी। बहरहाल, पहले मिशन की लॉन्चिंग इस महीने के आखिर में होने की संभावना है, जो कि 29 अगस्त यानी सोमवार से शुरू हो रही है। यदि उस दिन किसी तकनीकी गड़बड़ी या मौसम की वजह से लॉन्च टालना पड़ा तो 2 सितंबर को यह कोशिश होगी और अगर यह भी किसी वजह से नहीं हुआ तो 5 सितंबर को लॉन्चिंग की तारीख रखी गई है।

स्टारशिप बना रहे हैं एलन मस्क
पहले मिशन में ओरियन को चांद के पीछे घूमने के लिए भेजा जा रहा है, जो वापस धरती पर लौटेगा और कैलिफोर्निया के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा। इस मिशन में यूरोप (10 से ज्यादा देश शामिल) भी एक प्रमुख सहयोगी हैं। उधर अमेरिका के रॉकेट उद्यमी एलन मस्क इससे भी विशाल रॉकेट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। वो उसे स्टारशिप कहकर बुलाते हैं और उनका कहना है कि यह भविष्य में आर्टेमिस मिशन के काम आएगा।












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