क्वॉड नेताओं की पहली बैठकः चीन के लिए क्या हैं संकेत?
अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के नेताओं ने शुक्रवार को चारों देशों के समूह क्वॉड की पहली वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापानी प्रधानमंत्री योशीहीदे सूगा वर्चुअल बैठक में शामिल हुए.
भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बैठक के बाद कहा कि चारों नेता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कोरोना वैक्सीन के उत्पादन और वितरण में सहयोग करने पर सहमत हुए हैं. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि चारों देश अगले साल तक एक अरब डोज़ तैयार करने पर सहमत हुए हैं.
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कशिश परपियानी इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहते हैं, ''चार राष्ट्राध्यक्षों का बैठक में शामिल होना ही अपने आप में ऐतिहासिक है. इस बैठक से क्वॉड समूह के प्रति इन देशों की गंभीरता भी ज़ाहिर हुई है.'
इस बैठक से कुछ देर पहले ही चीन ने एक बयान जारी कर कहा था कि ''राष्ट्रों को किसी तीसरे पक्ष के हितों पर निशाना साधना या नुक़सान नहीं पहुँचाना चाहिए.''
चीन ने कहा कि देशों को एक्सक्लूसिव ब्लॉक नहीं बनाने चाहिए. कशिश परपियानी चीन की आलोचना को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि क्वॉड समूह को सिर्फ़ चीन विरोधी समूह नहीं समझना चाहिए.
वो कहते हैं, ''इसका मक़सद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाना है.''
Speaking at the First Quad Leaders’ Virtual Summit. https://t.co/Ypom6buHxS
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2021
बैठक के बाद कोई औपचारिक घोषणा तो नहीं हुई लेकिन चारों देशों के नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया. कोरोना वैक्सीन के उत्पादन और वितरण के लिए संशाधन जुटाने पर भी सहमति बनी है.
भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, 'क्वॉड वैक्सीन सबसे अहम है. चारों देश वैक्सीन के उत्पादन के लिए अपने वित्तीय संसाधनों, उत्पादन क्षमताओं और संचार तंत्रों का एक साथ इस्तेमाल करने पर सहमत हुए हैं.''
कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि चारों देश कोरोना वैक्सीन के उत्पादन को लेकर समझौता कर सकते हैं. हालांकि इस बारे में अधिक जानकारी अभी नहीं मिली हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद एक ट्वीट में कहा, ''कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में हम एकजुट हैं. हमने सुरक्षित कोविड-19 वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक क्वॉड सहयोग शुरू किया है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देशों के सहयोग के लिए भारत की वैक्सीन उत्पादन की क्षमता जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से और विस्तृत होगी.''
United in our fight against COVID-19, we launched a landmark Quad partnership to ensure accessibility of safe COVID-19 vaccines. India’s formidable vaccine production capacity will be expanded with support from Japan, US & Australia to assist countries in the Indo-Pacific region.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2021
कशिश परपियानी कहते हैं, ''जब तक सभी जानकारियां सामने नहीं आतीं तब तक वैक्सीन पर सहयोग को प्रतीकात्मक ही माना जाएगा.''
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि ''हम अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी, स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए प्रतिबद्धता की वजह से एकजुट हैं.''
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि क्वॉड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए अहम होगा.
ये क्वॉड समूह की पहली बैठक थी. नज़र इस बात पर भी थी कि राष्ट्रपति बाइडन चीन को लेकर अमेरिकी नीति के संकेत दे सकते हैं.
परपियानी कहते हैं, ''बाइडन प्रशासन को अब दो महीने हो चुके हैं. अभी तक अमेरिका की चीन को लेकर नीति पर मिश्रित संकेत मिले हैं. ये संदेह था कि बाइडन ट्रंप की नीतियों को लागू करेंगे या नहीं. बाइडन ने इस बैठक में शामिल होने का फ़ैसला लिया, यह अहम संकेत है.''
परपियानी कहते हैं, ''जी-7 के बाद ये बाइडन की पहली बहुराष्ट्रीय बैठक है. इसका संकेत ये है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को लेकर गंभीर है. ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ अमेरिका के पहले से ही समझौते हैं. भारत के साथ भी अमेरिका का गतिशील रिश्ता बन रहा है.''
क्वॉड का गठन तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने 2007 में किया था. उस साल चारों देशों की नौसेनाओं ने साझा युद्धाभ्यास किया था. लेकिन उसके बाद से इस दिशा में कुछ ठोस नहीं हो सका था.
ऑस्ट्रेलिया 2008 में समूह से पीछे हट गया था और उसके बाद से भारत ने ऑस्ट्रेलिया को युद्धाभ्यास के लिए फिर से नहीं बुलाया था.
लेकिन बीते साल चीन के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने इस समूह को फिर से मज़बूत करने के प्रयास शुरू कर दिए थे.
उधर ऑस्ट्रेलिया का भी चीन के साथ व्यापार, सुरक्षा और जासूसी के मुद्दों पर तनाव बढ़ रहा था जिसकी वजह से वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के और भी नज़दीक आ गया.
क्वॉड बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि 21वीं सदी में दुनिया का भविष्य भारत-प्रशांत क्षेत्र ही तय करेगा.
वहीं जापानी प्रधानमंत्री योशीहीदे सूगा ने वो खुले और स्वतंत्र भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
ये सवाल उठता रहा है कि क्या क्वॉड चीन के बढ़ते प्रभाव को कम कर पाएगा? ये इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या ये गठबंधन चीन को लेकर स्पष्ट उद्देश्यों पर सहमत होता है.
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सवाल ये भी है कि क्या ये सिर्फ़ चीन के विरोध में सैन्य सहयोग बढ़ाने का प्रयास है या इसके दूसरे आयाम भी होंगे.
विश्लेषक मानते हैं कि क्वॉड बहुआयामी होकर ही ज़्यादा असरदार होगा.
परपियानी कहते हैं, ''चारों देशों में ये सहमति है कि ये सिर्फ़ चीन विरोधी गुट या सिर्फ़ सैन्य आयाम वाला गुट नहीं होना है बल्कि एक बहुआयामी गुट होना है. इसे अलग-अलग मुद्दों पर काम करना चाहिए.'
वो कहते हैं, 'भारत पिछले साल से ही ये जोर देता रहा है कि क्वॉड आपदाओं के दौरान मानवीय सहयोग बढ़ाने के लिए भी काम करे.'
'इसे अगर बहुायामी रिश्ता बनाते हैं तो फिर ये सिर्फ क्षेत्र के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए अच्छा होगा. इससे चीन की ये आलोचना भी ख़ारिज हो जाएगी कि यह गुट सिर्फ़ उसके ख़िलाफ़ है.'
ये इस गठबंधन के नेताओं की पहली बैठक थी. इससे उम्मीदें तो जगी हैं लेकिन इसकी असली परीक्षा यह होगी कि सदस्य देश एक दूसरे के चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में किस हद तक हस्तक्षेप करेंगे.
एक समस्या यह भी हो सकती है कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के सुरक्षा हित अनुकूल नहीं हैं.
देखना यह भी होगा कि भविष्य में इस गुट में सिर्फ़ ये चार ही देश रहेंगे या उन देशों के भी शामिल किया जाएगा जिनके चीन के साथ विवाद हैं.












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