क्या सऊदी अरब के इशारे पर हुआ था अमेरिका पर 9/11 का हमला? सार्वजनिक हुए FBI के खुफिया दस्तावेज

क्या अमेरिका पर हुए 9/11 हमले में सऊदी अरब सरकार की कोई भूमिका थी? एफबीआई के गोपनीय दस्तावेजों को किया गया सार्वजनिक।

वॉशिंगटन, सितंबर 12: 20 साल पहले अमेरिका पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में क्या सऊदी अरब का हाथ था? खुफिया दस्तावेजों में इसका खुलासा हो गया है। 9/11 हमले के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने कई सालों तक जांच की और फिर जांच को खुफिया दस्तावेज बनाकर उसे गोपनीय दस्तावेज की तरफ रख लिया गया था। लेकिन, अमेरिका की सरकार पर लगातार इस बात का दबाव था कि वो तमाम रिपोर्ट्स को सार्वजनिक करे और अमेरिकी जनता को बताए कि क्या सऊदी अरब ने 9/11 हमले में अलकायदा की मदद की थी।

क्या सऊदी अरब का था हाथ?

क्या सऊदी अरब का था हाथ?

एफबीआई ने शनिवार देर रात 9/11 हमलों की योजना और सऊदी अरब सरकार की कथित भूमिका की जांच को लेकर खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है। सऊदी अरब लगातार इस दावे को खारिज करता रहा है कि उसकी कोई भी भूमिका अमेरिका पर हुए आतंकी हमले में थी और अब एफबीआई ने सऊदी अरब की कथित भूमिका को लेकर विस्तृत दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है। इस दस्तावेज में उन बातों का जिक्र किया गया है कि क्या सऊदी अरब और हमले में शामिल हमलावरों के बीच बातचीत हो रही थी? एफबीआई की गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के एक भी सबूत नहीं मिले हैं, जिससे जाहिर हो कि सऊदी अरब का अमेरिका पर हुए हमले में कोई हाथ था।

दस्तावेज सार्वजनिक होना क्यों था जरूरी?

दस्तावेज सार्वजनिक होना क्यों था जरूरी?

पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकारी आदेश के बाद एफबीआई द्वारा आतंकवादी हमलों की 20 वीं वर्षगांठ पर दस्तावेज़ को प्रकाशित किए जाने की उम्मीद थी और अब एफबीआई ने 16 पन्नों का एक दस्तावेज जारी कर दिया है। जिसमें 11 सितंबर 2001 को आतंकवादियों द्वारा विमान का अपहरण करने और दो सऊदी अरब के नागरिकों के पास से मिले सामानों को लेकर रिपोर्ट दी गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अपहरणकर्ताओं ने अमेरिका में मौजूद सऊदी अरब के दो साथियों से बात की थी, लेकिन उन्हें सऊदी अरब सरकार से कोई निर्देश नहीं मिले थे और इस तरह के एक भी सबूत अमेरिकी जांच एजेसियों को नहीं मिले हैं।

9/11 के बाद एफबीआई की जांच

9/11 के बाद एफबीआई की जांच

एफबीआई रिपोर्ट में एक अमेरिकी नागरिकता आवेदक के साथ 2015 का इंटरव्यू शामिल है, जो पहले लॉस एंजिल्स में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में काम करता था और जिसका पहले सऊदी नागरिकों के साथ संपर्क था, जांचकर्ताओं का मानना ​​था कि उसने हाज़मी और मिहधर को "महत्वपूर्ण रसद सहायता" प्रदान की थी। इनमें उमर अल-बायौमी भी शामिल है, जिस पर एफबीआई को लंबे समय से सऊदी खुफिया एजेंट होने का संदेह था। दस्तावेज़ के अनुसार, "हाज़मी और मिहधर को बायूमी की ट्रांसलेटर, आवासीय और आर्थिक सहायता दी गई थी।" बायूमी ने एफबीआई को बताया था कि उसके रेस्टोरेंट में बातचीत की गई थी। लेकिन दस्तावेज में साफ कहा गया है कि सऊदी अरब के नागरिक हमले में शामिल थे, सऊदी अरब की सरकार नहीं।

सऊदी अरब का आया बयान

सऊदी अरब का आया बयान

वहीं, एफबीआई के गोपनीय जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए सऊदी अरब सरकार की तरफ से कहा गया कि वो रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की बात का समर्थन करता है, ताकि उसके ऊपर जो इल्जाम लगे हैं, वो हमेशा के लिए खत्म हो जाए। एफबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने वाला शख्स सऊदी अरब के उन लोगों के साथ लगातार संपर्क में था, जो हमले में शामिल थे और उन्हें तमाम सुविधाएं मुहैया करा रहा था।

पीड़ित कर रहे थे मांग

पीड़ित कर रहे थे मांग

अमेरिका पर हुए हमले में 3 हजार पीड़ित परिवार लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति पर दवाब बना रहे थे कि तमाम सिक्रेट दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि इस बात का पता लग सके, कि क्या अमेरिका पर हुए हमले में सऊदी अरब का भी हाथ था? इसको लेकर 3 हजार पीड़ित परिवारों ने कड़े शब्दों में अमेरिकी राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी और जानबूझकर दस्तावेजों को गोपनीय रखने का आरोप लगाया था। अमेरिका में पीड़ित परिवारों का कहना है कि सऊदी अरब से संबंध खराब ना हो, इसके लिए अमेरिका की सरकारों ने अब तक हमलों से जुड़े तमाम दस्तावेजों को छिपाकर रखा है और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन अब दस्तावेज को सार्वजनिक कर सऊदी अरब को पाक साफ करार दिया गया है।

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