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जब खालिस्तानियों ने उड़ाया था एयर इंडिया का विमान, तब जस्टिन ट्रूडो के पिता ने दिया था शह.. समझिए खतरनाक कहानी

When Khalistan bombd Air India plane Kanishka: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर का संसद में समर्थन करके भारत से खुलकर पंगा ले लिया है। जस्टिन ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत पर आरोप लगाए हैं और कनाडा सरकार ने भारत के टॉप डिप्लोमेट को देश से बाहर निकाल दिया है।

जस्टिन ट्रूडो के संसद में भारत पर लगाए आरोपों के बाद पूरी दुनिया में तहलका मच गया है और लोगों के जेहन में 1980 का वो दशक लौट आया है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बार बार कनाडा सरकार को खालिस्तानियों के आतंक के बारे में आगाह कर रही थीं, लेकिन कनाडा सरकार लगातार खालिस्तानियों का समर्थन कर रही थी।

khalistan air india bombing

दिलचस्प बात ये है, कि फ्लाइट में बम ब्लास्ट के बाद जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो पर खालिस्तानी आतंकवादियों को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल में खालिस्तानियों को फलने-फूलने का खूब मौका दिया। आइये जानते हैं, कि कैसे खालिस्तानी आतंकियों ने एयर इंडिया के विमान को धमाके से उड़ा दिया था?

कनाडा में कैसे फला-फूला खालिस्तान

जब भारत में इंदिरा गांधी की सरकार (जनवरी 1966 से मार्च 1977 और 1980 से 1984 तक) थी, तब कनाडा के प्रधानमंत्री पियर ट्रूडो थे, जो जस्टिन ट्रूडो के पिता थे। इस दौरान उन्होंने भी वोट बैंक के लिए कनाडा में खालिस्तानियों को अपना बाप बना लिया था।

कनाडाई पत्रकार टेरी मिल्वस्की ने अपनी किताब 'ब्लड फॉर ब्लड: फिफ्टी इयर्स ऑफ ग्लोबल खालिस्तान प्रोजेक्ट' में साफ-साफ शब्दों में लिखा है, कि कैसे पियर ट्रूडो ने कनाडा में खालिस्तानियों को सींचने का काम किया।

उन्होंने अपनी किताब में लिखा है, कि इस दौरान यूरोप और कनाडा में पाकिस्तान के समर्थन से खालिस्तानी नेताओं का दबदबा तेजी से बढ़ रहा था। 1980 के दशक में अलग सिख राज्य की मांग को लेकर खालिस्तान आंदोलन भारत के बाहर कनाडा में भी हो रहा था। तभी कट्टरपंथियों का विरोध करने वाले भारतीय मूल के कनाडाई नेता उज्जल दोसांझ को खालिस्तानी समर्थकों ने बुरी तरह पीटा था।

जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खालिस्तान समर्थकों पर लगाम लगाने और भारतीय लोगों को टारगेट किये जाने का विरोध जताते हुए तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री पियर ट्रूडो से इसकी शिकायत की थी। लेकिन, पियर ट्रूडो ने इंदिरा गांधी की बात को और खालिस्तान मुद्दे पर बढ़ती गतिविधियों को कुछ खास तवज्जो नहीं दी।

जिसका नतीजा यह हुआ कि 23 जून 1985 को कनाडा में रहने वाले खालिस्तानी आतंकियों ने एयर इंडिया के विमान में बम रखकर उसे उड़ा दिया, जिसमें 329 लोगों की मौत हो गयी थी।

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कितनी बड़ी लापरवाही थी, समझिए

टेरी मिल्वस्की की किताब में दावा किया गया है, कि जून 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो की सरकार जाने से पहले ही एयर इंडिया के विमान को उड़ाने की साजिश रच दी गयी थी।

इसके सबूत ऐसे मिलते हैं, कि अगस्त 1984 में एक फ्रेंच मूल के कनाडाई अपराधी गैरी बूडराओ ने रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस को बताया था, कि वैंकुवर के कुछ सिखों ने उन्हें मॉन्ट्रियल से लंदन जाने वाली एयर इंडिया फ्लाइट नंबर 182 में बम रखने के लिए 2 लाख डॉलर नकद देने की पेशकश की थी।

उसने खुलासा किया था, कि "मैंने अपने जीवन में बहुत जघन्य अपराध किए हैं, लेकिन एक विमान में बम रखना मेरे मिजाज में शामिल नहीं था। इसलिए मैंने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। लेकिन, हैरान करने वाली बात ये है, कि कनाडा की पुलिस ने उसकी धमकी पर कोई ध्यान नहीं दिया।"

इसके बाद 23 जून 1985 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के वैंकुवर से उड़ान भरने वाले दो विमानों में खालिस्तानी आतंकवादियों ने डायनामाइट और टाइम बम से भरे दो सूटकेस रख दिये थे।

ये दोनों ही कनेक्टिंग फ्लाइट थी। जिसमें से एक विमान ने पश्चिम में टोक्यो के लिए उड़ान भरी थी, ताकि वह एयर इंडिया की बैंकॉक और मुंबई जाने वाली फ्लाइट से कनेक्ट कर सके। जबकि, दूसरे विमान ने पूरब की ओर उड़ान भरी थी, ताकि वह टोरंटो और मॉन्ट्रियल से लंदन और नई दिल्ली जाने वाली फ्लाइट से कनेक्ट कर सके।

लेकिन, टोक्यो पहुंचने वाले विमान में नरिटा हवाईअड्डे पर ही भीषण बम धमाका हो गया। हालांकि, संयोग यह था, कि विस्फोट उस समय हुआ, जब सामान को एक विमान से उतारकर एयर इंडिया के विमान पर चढ़ाया जा रहा था।

इस विस्फोट में सामान फ्लाइट में लोड करने वाले दो लोग मारे गये थे, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गये थे। अगर उड़ान भरते हुए विस्फोट होता, तो सारे के सारे यात्री बम ब्लास्ट में मारे जाते।

वहीं, दूसरी फ्लाइट को लंदन में हॉल्ट लेना था। जब विमान आयरलैंड के एयर स्पेस में दाखिल हुआ और आइरिश कोस्ट के करीब 200 मील दूरी पर अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ान भर रहा था, तभी अचानक से विमान रडार से गायब हो गया। खालिस्तानी आतंकवादियों ने इस विमान में टाइम बम रखा हुआ था।

इस बम ब्लास्ट में मरने वालों में 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें से ज्यादातर भारतीय मूल के थे।

इनमें 27 ब्रिटिश और 24 भारतीय नागरिक थे। वहीं, इस विमान हादसे में कई बच्चे भी मारे गये थे। इस बम ब्लास्ट में 29 परिवारों का पूरी तरह से नामोनिशान मिट गया था।

एयर इंडिया के विमान में हुए इस बम ब्लास्ट के लिए मौजूदा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के पिता पियर ट्रूडो पर खालिस्तानियों के प्रति उदारवादी नीति रखने को जिम्मेदार ठहराया गया।

और अब उन्हीं के बेटे जस्टिन ट्रुडो भी अपने पिता की नीतियों पर चलते हुए खालिस्तानियों के "किल इंडिया" मुहिम का समर्थन कर रहे हैं और अब तो उन्होंने संसद से ही भारत के खिलाफ एक तरह से जंग का ऐलान कर दिया है।

माना जा रहा है, कि जस्टिन ट्रूडो ने कनाडाई संसद में जो कुछ भी आरोप लगाए हैं, भारत उसके खिलाफ काफी कड़ी प्रतिक्रिया देने वाला है। भारत चुप नहीं बैठने वाला है और आने वाले वक्त में दोनों देशों के बीच के संबंध अत्यधिक खराब होने की आशंका जताई जा रही है।

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