Explainer: पाकिस्तान में सिर्फ 4 दिन का गोला-बारूद बचा, गरीबी के चलते यूक्रेन को हथियार बेचना पड़ा महंगा

Explainer: गरीबी में आटा गीला, ये कहावत आपने जरूर सुनी होगी लेकिन मौजूदा संदर्भ में ये पाकिस्तान पर एकदम फिट बैठती है। दरअसल पाकिस्तान के पास दूसरे देशों को बेचने के लिए कुछ खास तो पहले से ही नहीं है, कपास या कपड़ों को छोड़कर। लेकिन जैसे ही रूस-यूक्रेन जंग हुई तो पाकिस्तान ने पैसे कमाने की सोची और दूसरे देशों से खरीदा गोला-बारूद और दूसरे सैन्य सामान यूक्रेन को बेच दिए। लिहाजा पाकिस्तान की सेना गोला-बारूद की गंभीर कमी से जूझ रही है, जिससे चार दिनों से ज़्यादा जंग लड़ने लायक उसकी उसकी क्षमता नहीं बची है। यह सीमा यूक्रेन के साथ देश के हालिया हथियारों के लेन-देन के कारण आई है, जिसने उसके युद्ध भंडार को खाली कर दिया है। कोई और देश होता तो शायद जल्दी से मैन्युफैक्चरिंग कर फिर से इन गोदामों को भर लेता लेकिन पाकिस्तान के साथ दूसरी मुसीबतें भी हैं।

पाकिस्तान में नहीं है हथियार बनाने की ताकत

दरअसल रूस-यूक्रेन जंग और मिडिल ईस्ट में सीरिया, इजरायल, ईरान, गाजा और लेबनान में चल रहे लगातार संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति में पहले से ही होने वाली कमी के कारण पाकिस्तान हथियारों को इम्पोर्ट करने की स्थिति में भी नहीं है। दूसरी तरफ POF (Pakistan Ordinance Factory) की में खुद इतनी क्षमता नहीं है कि वह बड़े स्तर पर हथियारों और गोला-बारूद को बना सके, लिहाजा इस परिस्थिति ने पाकिस्तान की सेना को एक अनिश्चित स्थिति में डाल दिया है, जिसके गोला-बारूद भंडार केवल 96 घंटे के युद्ध का सामना करने की क्षमता रखता है।

Explainer

यूक्रेन को पाक ने क्या-क्या बेचा?

इस कमी का असर पाकिस्तान की सैन्य रणनीति पर भी पड़ने है, जो भारत जैसी बड़ी ताकत का मुकाबला करने के लिए हथियारों के इम्पोर्ट पर बहुत अधिक निर्भर है। अपने हॉवित्जर के लिए पर्याप्त तोपखाना गोले और अपने कई रॉकेट लांचर सिस्टम के लिए रॉकेट की कमी पाकिस्तान की संभावित भारतीय बढ़त के खिलाफ बचाव करने की क्षमता को कम करती है। पाकिस्तान की युद्ध रणनीति के मुताबिक पाकिस्तानी सेना जंग के हालात में तोपखाने और बख्तरबंद यूनिट्स को पहले उतारती है। लेकिन 155 मिमी और 122 मिमी गोला-बारूद के बिना उसके पास यह कदम उठाने के लिए ज्यादा कुछ है ही नहीं।

Take a Poll

किन-किन हथियारों का पाक के पास स्टॉक खत्म?

बढ़ती वैश्विक जरूरतों और पुरानी सुविधाओं के बीच घरेलू मांग को पूरा करने के लिए POF के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। यूक्रेन को 155 मिमी गोला-बारूद बेचने के फैसले से यह मुद्दा और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है, जिससे पाकिस्तान की ऑटोमैटिक और माउंटेड गन सिस्टम का स्टॉक खत्म हो चुका है। ये इसलिए हुआ क्योंकि पाकिस्तान में गरीबी और भुखमरी के हालात चरम पर थे, जिनसे निकलने के लिए पाकिस्तान को इन्हें यूक्रेन को बेचना पड़ा ताकि देश में जरूरी सामान की पूर्ति की जा सके। लेकिन अब पाकिस्तान के सामने सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हुआ है।

पूर्व आर्मी चीफ बाजवा ने खोली पोल?

इस कमी ने न केवल पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व में घबराहट पैदा की है, बल्कि 2 मई, 2025 को आयोजित स्पेशल कोर कमांडरों की समिटि में भी यह गंभीर सवाल उठाया गया। पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास गोला-बारूद की कमी और आर्थिक हलाल भी खराब हैं, जो उसे भारत के साथ लंबा युद्ध करने में असमर्थ बनाते हैं। बाजवा के इस बयान के बाहर आने के बाद पाकिस्तान की सेना में हलचल पैदा हो गई है।

भारतीय सीमा पर बनाए डिपो

भारत के जंग की आहट के बीच, पाकिस्तान ने कथित तौर पर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास गोला-बारूद के डिपो बनाए हैं, जिन्हें युद्ध की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, गोला-बारूद को बेचने से पाक की तैयारी खराब हो गई है, पाक के सैन्य गोदाम खाली हो गए हैं और रक्षा तंत्र अपने निचले स्तर पहुंच गया है। तत्काल समाधान के चक्कर में पाकिस्तान ने खुद को लंबे वक्त के लिए नुकसान पहुंचा लिया है। भविष्य में तो पाकिस्तान को नुकसान होगा ही, लेकिन मौजूदा तनाव में किसी भी दिन पाकिस्तान को लेने के देने पड़ सकते हैं।

बहुत बुरे हैं पाकिस्तान के आर्थिक हालात

पाकिस्तान की आर्थिक उथल-पुथल, बढ़ती महंगाई, बढ़ते कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण सेना को चलाना पहले से ही मुश्किल में था लेकिन अब इसमें और इज़ाफा हुआ है। पाक में लंबे समय से बने संकट ने सेना को राशन कम करने, ट्रेनिंग प्रैक्टिस में गोला-बारूद का कम इस्तेमाल करने या पूरी तरह से बंद करने पर जोर दिया है। साथ ही ईंधन की कमी के कारण युद्ध अभ्यास रद्द करने के लिए मजबूर किया है। इस आर्थिक मंदी का पाकिस्तान के डिफेंस और तुरंत जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता पर गहरा असर पड़ा है। इसके अलावा, पाकिस्तान की छवि को भारतीय वेबसाइटों के खिलाफ असफल साइबर अटैक करने से झटका लगा, जिन्हें कथित तौर पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित हैकर समूहों द्वारा अंजाम दिया गया था। साइबर सुरक्षा सुरक्षा में सेंध लगाने के प्रयासों के बावजूद, भारतीय एजेंसियों ने इन प्रयासों को तेजी से बेअसर कर दिया। शैक्षिक और नामचीन वेबसाइटों को निशाना बनाना पाकिस्तान की बढ़ती उकसावे की सूची में शामिल है, जो उसके डिजिटल युद्ध की रणनीति में हताशा और अनैतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

पाकिस्तान का अब क्या होगा?

पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति, जिसमें तोपखाने के गोला-बारूद की भारी कमी, पुरानी उत्पादन क्षमताएं और आर्थिक संकट शामिल हैं। इन वजहों ने उसकी सैन्य तैयारियों की एक गंभीर तस्वीर पेश की है। इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा गोला-बारूद बेचने में रणनीतिक चूक और अपनी उत्पादन सुविधाओं को आधुनिक न बनाना भी उसकी असमर्थता को सबके सामने ला दिया है। साइबर युद्ध के अपने बेवकूफी भरे दुस्साहस ने पाकिस्तान को एक कमजोर स्थिति डाल दिया है, जो उसकी कूटनीतिक रूप भयानक गलतियों को दर्शाता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+