15 साल बाद थाईलैंड लौटे पूर्व PM थाकसिन शिनवात्रा, सेना ने गिरफ्तार किया, 8 साल की मिली सजा
पूर्व थाई प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है। शिनावात्रा राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 15 साल से अधिक समय तक स्व-निर्वासन के बाद मंगलवार को देश लौटे थे। देश लौटने के बाद उन्हें मंगलवार को ही अदालत में ले जाया गया और फिर जेल में डाल दिया गया।
थाकसिन मंगलवार सुबह 9 बजे एक निजी जेट से बैंकॉक के डॉन मुएंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। लगभग 90 मिनट बाद वह हवाईअड्डे के निजी जेट टर्मिनल से बाहर निकले जिसके बाद उन्होंने समर्थकों की भीड़ का अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने थाईलैंड के राजा के फोटो को नमन किया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शिनवात्रा दूरसंचार व्यवसाय में अपना भाग्य बनाने के लिए स्वदेश लौटे थे मगर आने के कुछ ही समय बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और एक पुलिस काफिले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया।
सुप्रीम कोर्ट में जहां पूर्व पीएम पर सत्ता के दुरुपयोग और कई अन्य आपराधिक अपराधों का आरोप लगाया गया। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
रॉयटर्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें बैंकॉक जेल ले जाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्हें कुल आठ साल जेल में काटने होंगे।
इससे पहले थाकसीन की बहन यिंगलक शिनवात्रा ने टिकटॉक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें पूर्व पीएम काले रंग का शूट और लाल टाई पहने हुए एक छोटे विमान के अंदर जाते हुए देखा गया। यिंगलक शिनवात्रा भी थाईलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री रह चुकी है।
इसके साथ ही थाकसीन की बेटी पेटोंगटार्न शिनावात्रा ने भी इंस्टाग्राम पर इससे जुड़ी एक पोस्ट की है। उन्होंने लिखा, "थाइलैंड में आपका स्वागत है डैडी।," पेटोंगटार्न ने यह भी कहा कि उनके पिता कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर चुके हैं।
थाकसीन ने साल 2001 में राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने चुनाव में जीत के लिए थाईलैंड की ग्रामीण जनता के बीच अपनी पैठ बनानी शुरू की। ये वो वोटर थे जिन्हें लंबे समय से देश के सत्तारूढ़ पार्टियों द्वारा भूला दिया गया था।
हालांकि पांच साल बाद साल 2006 में भारी बहुमत से वे सत्ता में लौटे। सितंबर 2006 में जब थाकसीन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने की तैयारी कर रहे थे, तब देश की सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया।
इसके बाद थाकसीन को सत्ता के दुरूपयोग का दोषी बताया गया, जिसके बाद उन्होंने खुद को राजनीति से दूर कर लिए। और वे दुबई में रहने लगे। इसके 5 साल बाद यिंगलग शिनवात्रा राजनीति में उतरीं और साल 2011 में देश की 28वीं तथा थाईलैंड के 60 वर्षों के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी। हालांकि मई 2014 में उन्हें सेना ने पद से हटा दिया।
इस साल देश में हुए चुनाव में थाकसीन शिनवात्रा की पार्टी फू थाई दूसरे स्थान पर रही। इस चुनाव में प्रोग्रेसिव मूव फॉरवर्ड पार्टी की जीत हुई है। हालांकि जीत के बावजूद प्रोग्रेसिव पार्टी सरकार बनाने में असमर्थ रही है। क्योंकि सेना द्वारा नियुक्त सीनेटरों ने उच्च सदन में सरकार का समर्थन करने से इनकार कर दिया था।
अब मंगलवार को एक बार फिर से वोटिंग हो रही है। इसमें फू थाई पार्टी के श्रीथा थाविसिन की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। श्रेथ एक बेहद अमीर व्यवसायी है।
फू थाई ने अपने पूर्व सैन्य प्रतिद्वंद्वियों के साथ एक समझौता किया है। श्रीथा को निचले सदन में 314 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उन्हें और 58 वोटों की आवश्यकता है, जिसके लिए दोनों सदनों के समर्थन की आवश्यकता है।












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