Explainer: डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की संकेतों से कांपे यूरोप के पांव, अरबों डॉलर का गोला-बारूद बनाने पर विचार

US President Election: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की संकेतों ने यूरोप को डरा दिया है और इस हफ्ते यूरोप की राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के चर्चे काफी तेजी के साथ शुरू हो गये हैं।

यूरोपीय संघ के आंतरिक बाज़ार प्रमुख, थिएरी ब्रेटन के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प ने 2020 में यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से कहा था, कि "यदि यूरोप पर हमला होता है, तो हम आपकी मदद करने और आपका समर्थन करने के लिए कभी नहीं आएंगे।"

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यूरोपीय संसद में एक कार्यक्रम के दौरान ब्रेटन की टिप्पणी, आयोवा कॉकस और अमेरिकी रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के प्राथमिक चुनाव में मतदान शुरू होने से एक सप्ताह से भी कम समय पहले आई है, जिसमें ट्रम्प के जीतने की पूरी संभावना है। यूरोपीय संसद में बोलते हुए ब्रेटन ने प्रस्ताव दिया है, कि डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की संकेतों को देखते हुए यूरोप को 100 अरब यूरो फंड तैयार करना चाहिए, जिससे गोला-बारूद का उत्पादन हो सके।

यूरोप के पास खत्म हो गये हैं गोला-बारूद

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कई यूरोपीय संघ के अधिकारियों और राजनयिकों ने कहा है, कि डोनाल्ड ट्रंप की उस 'चेतावनी' की अचानक याद इसलिए इस संवेदनशील समय पर आई है, क्योंकि यूरोपीय संघ अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन के बाहर अपनी रक्षा क्षमताओं का निर्माण करने का प्रयास कर रहा है। यह कोई रहस्य नहीं है, कि यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य समर्थन के कारण नाटो सदस्य देशों में गोला-बारूद के भंडार ख़त्म हो गए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने वाकई में ये टिप्पणी की थी या नहीं, इसकी पुष्टि तो नहीं हो सकती है, लेकिन यूरोपीय सुरक्षा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की कुछ टिप्पणियां सुर्खियों में जरूर रही हैं। अपने कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो संगठन के लिए गलातार धन आवंटित किए, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने व्लादिमीर पुतिन की भी लगातार सराहना की, जिन्हें उसी सैन्य गठबंधन नाटो का विरोधी माना जाता है।

यूरोपीय संघ में इस संबंध में विचार बनने लगे हैं, कि अगर डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी होती है, तो फिर उनका प्रशासन निश्चित तौर पर सभी फैसले ऐसे नहीं लेगा, जो यूरोप के हित में ही हो और खासकर अगर वो फैसला अमेरिका के खिलाफ हो।

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लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ट्रंप की वापसी की संभावनाओं और उनके पूर्व कार्यकाल में लिए गये फैसलों को देखते हुए यूरोप अब ऐसे भविष्य का निर्माण करने जरूरत है, जहां उसे अमेरिका पर पूरी तरह से निर्भर रहने की जरूरत ना हो। यूरोपीय अधिकारयों ने निष्कर्ष निकाला है, कि अमेरिका पर अब उस तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है, जैसा भरोसा अभी तक किया गया है। खासकर तब, जब मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी ट्रंप की कुछ अमेरिका फर्स्ट नीति को अपने कार्यकाल में भी जारी रखा है।

यूरोप के व्यापार पर भी पड़ेगा असर

हालांकि, कारोबार को लेकर यूरोप ने किसी भी एक देश पर अपनी निर्भरता कम करने को लेकर कई कदम उठाए हैं और अपनी सप्लाई चेन में विविधता को शामिल किया है,ताकि अगर कोई व्यापारिक भागीदार अचानक अपनी नीतियां बदल दें, तो यूरोप घुटनों पर ना जाए, जैसा की डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार किया था, जब उन्होंने यूरोपीय प्रोडक्ट्स पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था।

सेंटर फॉर यूरोपियन रिफॉर्म थिंक-टैंक के उप निदेशक इयान बॉन्ड कहते हैं, कि "किसी भी तरह की जोखिम-मुक्ति अचानक नीतिगत बदलाव की भरपाई नहीं कर सकती है, जिससे यूरोपीय लोगों के लिए अमेरिका में बिक्री करना कठिन हो जाएगा।" उन्होंने कहा, कि "दूसरे कार्यकाल में, इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि डोनाल्ड ट्रंप कई यूरोपीय प्रोडक्ट्स पर यह कहकर पाबंदी लगा दें, कि वो अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है।"

लिहाजा, यूरोप अब अपने डर को सार्वजनिक करने लगा है और बहुत हद तक तय माना जा रहा है, कि डोनाल्ड ट्रंप अगर सत्ता में लौटते हैं, तो अगले चार सालों में दुनिया पूरी तरह से बदल जाएगी और जियो-पॉलिटिक्स में अगले चार सालों तक भूकंप मचता रहेगा।

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