Egypt में मिला 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर, हिन्दू धर्म से जुड़ा है मकबरों वाले देश का इतिहास?
Egypt: मिस्र में पुरातत्वविदों को 4,500 साल पुराने एक घाटी मंदिर (Valley Temple) के अवशेष मिले हैं। यह मंदिर सूर्य देवता को समर्पित एक विशाल सूर्य मंदिर परिसर का हिस्सा था। मिस्र के पर्यटन और आर्किलॉजी मंत्रालय के मुताबिक, यह खोज प्राचीन मिस्र के धार्मिक स्थलों तक आम लोगों की पहुंच को समझने में बेहद अहम साबित हो रही है। यह संरचना काहिरा (Cairo) से करीब 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, नील नदी के पास अबू गुराब इलाके में स्थित है।
कैसे बनते थे प्राचीन मिस्र के सूर्य मंदिर?
प्राचीन मिस्र के सूर्य मंदिर आमतौर पर दो हिस्सों में बनाए जाते थे। पहला हिस्सा ऊपरी मंदिर होता था, जो ऊंची जमीन पर स्थित रहता था और जहां मुख्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते थे। दूसरा हिस्सा घाटी मंदिर होता था, जो नदी के पास बनाया जाता था। इन दोनों को एक सेतु मार्ग जोड़ता था, ताकि लोग नील नदी के किनारे से पवित्र परिसर तक आसानी से पहुंच सकें। अब सोशल मीडया पर बहस छिड़ गई है जिसमें कहा जा रहा है कि क्या मिस्र का इतिहास हिन्दू धर्म से जुड़ा हुआ है? हालांकि आर्किलॉजिस्ट ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

1901 में असफल रही खुदाई की कोशिश
अबू गुराब में ऊपरी मंदिर की खुदाई पहले ही हो चुकी थी, लेकिन घाटी मंदिर तक पहुंच 2024 में व्यवस्थित खुदाई शुरू होने के बाद ही संभव हो सकी। जर्मन मिस्र विज्ञानी लुडविग बोर्चर्ड ने 1901 में यहां खुदाई की कोशिश की थी, लेकिन उस समय भूजल स्तर काफी ऊंचा होने के कारण उन्हें काम बीच में ही रोकना पड़ा था।
वॉटर लेवल गिरने से मिली बड़ी कामयाबी
वॉटर लेवल काफी नीचे गिरने की वजह से इतालवी पुरातात्विक मिशन को बड़ी सफलता मिली। मासिमिलियानो नूज़ोलो और रोसन्ना पिरेली के नेतृत्व में चल रही इस खुदाई में घाटी मंदिर के लगभग आधे हिस्से को उजागर किया जा चुका है। इससे मंदिर के डिजाइन और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई अहम नए तथ्य सामने आए हैं।
नील नदी से आने वालों का मुख्य प्रवेश द्वार
सबसे अहम खोजों में एक भव्य स्तंभदार प्रवेश द्वार शामिल है। माना जा रहा है कि नील नदी के रास्ते नाव से आने वाले श्रद्धालु यहीं से मंदिर परिसर में प्रवेश करते थे। इसी बिंदु से वे घाटी मंदिर से होते हुए सेतु मार्ग के जरिए ऊपरी मंदिर तक जाते थे।
फिरौन निउसेरे के नाम वाले पत्थर मिले
खुदाई के दौरान कई सजे-धजे पत्थर के टुकड़े भी मिले हैं, जिन पर पांचवीं राजवंश के फिरौन निउसेरे का नाम खुदा हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार, इसी फिरौन ने इस सूर्य मंदिर परिसर का निर्माण करवाया था।
धार्मिक त्योहारों का सार्वजनिक कैलेंडर
पुरातत्वविदों को टूटे या बिखरे हुए पत्थरों की एक श्रृंखला भी मिली है, जिसे धार्मिक आयोजनों का सार्वजनिक कैलेंडर माना जा रहा है। इस कैलेंडर के कुछ हिस्से करीब एक सदी पहले पहचाने गए थे, लेकिन नई खुदाई में इसके कई अतिरिक्त खंड मिले हैं, जिससे इसकी जानकारी और ज्यादा पूरी हो गई है।
रा, सोकर और मिन से जुड़े उत्सवों का जिक्र
इन अभिलेखों में फाल्कन-सिर वाले देवता सोकर, उर्वरता के देवता मिन और सूर्य देवता रा से जुड़े विभिन्न त्योहारों और जुलूसों का विवरण दर्ज है। प्रवेश द्वार के पास इसकी मौजूदगी इसे दुनिया के सबसे पुराने सार्वजनिक धार्मिक कैलेंडरों में से एक बनाती है।
अनुष्ठान नहीं, आकाश देखने के लिए बनी सीढ़ी
टीम ने घाटी मंदिर की छत तक जाने वाली एक सीढ़ी भी खोजी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस ऊंचे स्थान का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों के बजाय आकाश और तारों के अवलोकन के लिए किया जाता था। यह दिखाता है कि मंदिर की रोजमर्रा की गतिविधियों में खगोल विज्ञान की भी बड़ी भूमिका थी।
एक सदी बाद मंदिर बना रिहायशी इलाका
सबसे दिलचस्प बात यह है कि घाटी मंदिर हमेशा धार्मिक स्थल नहीं रहा। करीब 100 साल तक इस्तेमाल के बाद इसे एक रिहायशी इलाके में बदल दिया गया। यहां से प्राचीन मिस्र के लोकप्रिय बोर्ड गेम 'सेनेट' के लकड़ी के मोहरे भी मिले हैं, जो बताते हैं कि पूजा की जगह धीरे-धीरे आम जिंदगी ने ले ली थी।
सूर्य मंदिरों का बदलता स्वरूप
कुल मिलाकर, अबू गुराब की ये खोजें यह समझने में मदद करती हैं कि प्राचीन मिस्र के विशाल सूर्य मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं थे। समय के साथ ये स्थान बदलते रहे और इनमें धार्मिक परंपराओं, सामाजिक जरूरतों और रोजमर्रा की जिंदगी की झलक साफ दिखाई देती है।
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