Wheat: इस वजह से मिस्र ने भी भारतीय गेहूं की 'एंट्री' रोकी, तुर्की पहले ही खड़ा कर चुका है 'बखेड़ा'
नई दिल्ली, 5 जून: तुर्की ने रूबेला वायरस के नाम पर भारतीय गेहूं की खेप अपने देश में घुसने से रोक दिया था। अब मिस्र ने भी 55,000 टन गेहूं को अपने मुल्क में घुसने देने से मना कर दिया है। गौरतलब है कि भारत की ओर से कहा गया है कि जो गेहूं तुर्की को भेजा गया था, वह सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भेजा गया था। लेकिन, अब मिस्र की ओर से उस गेहूं की एंट्री रोकने की बात कही गई है। गौरातलब है कि अप्रैल में ही मिस्र ने भारत को गेहूं का सप्लायर बनाया था, जो कि दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा खरीदार रहा है।

मिस्र ने भी तुर्की जा रहे भारतीय गेहूं की 'एंट्री' रोकी
मिस्र ने भी 55,000 टन गेहूं ले जा रहे भारतीय जहाज को अपने देश में एंट्री देने से मना कर दिया है। मिस्र के प्लांट क्वारंटीन चीफ अहमद अल अत्तर ने शनिवार को कहा है कि गेहूं की यह खेप मूल रूप से तुर्की भेजी जा रही थी। अत्तर ने रॉयटर्स से कहा है, 'हमने मिस्र में घुसने से पहले जहाज को आने देने से इनकार कर दिया।' उनके मुताबिक तुर्की के क्वारंटीन अधिकारी पहले ही जहाज को आने पर रोक लगा चुके थे। हालांकि, भारत का कहना है कि निर्यातक ने सभी तरह की क्लियरेंस पहले ही ले ली थी और अभी तक तुर्की से इस बारे में कुछ भी औपचारिक संवाद नहीं हो पाया है।

दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं आयातक है मिस्र
मिस्र दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं आयातक है; और वहां के प्राइवेट सेक्टर ने भारत से जो अलग से गेहूं आयात किया है, उसकी पहली खेप शनिवार को ही वहां पहुंचने वाली थी। यहां साफ कर दें कि जो भारतीय गेहूं मिस्र ने अपने यहां नहीं घुसने दिया, वह तुर्की ही जा रहा था। मिस्र के आपूर्ति मंत्री एली मोसेल्ही ने मई में कहा था कि भारत के साथ सामान्य टेंडर सिस्टम के बाहर 5,00,000 टन गेहूं सीधे खरीदने के लिए एक समझौते पर सहमति हुई थी, लेकिन अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। मिस्र के कृषि मंत्रालय ने अप्रैल में ही घोषणा की थी कि उसने भारत को गेहूं निर्यातक देश के रूप में मंजूरी दी है। यह समझौता यूक्रेन-रूस में लड़ाई की वजह से गेहूं की सप्लाई में पैदा हुई अड़चनों के मद्देनजर की गई थी।

'तुर्की भेजे गए गेहूं को क्लियरेंस मिली हुई थी'
इससे पहले भारत सरकार ने इस बात की पुष्टि की थी, जो शिपमेंट मिस्र को निर्यात किए जाने के लिए कस्टम क्लियरेंस का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी भी इसकी अनुमति दी जाएगी। मोसेल्ही ने भी पहले कहा था कि गेहूं निर्यात पर भारत ने जो पाबंदी लगाई है, वह मिस्र के साथ हुए सरकारी समझौते पर लागू नहीं होगा। इससे पहले तुर्की ने भारतीय गेहूं के जिस खेप को गुणवत्ता के आधार पर लेने से इनकार किया है, उसके बारे में भारत के खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने गुरुवार को कहा कि इस बारे में तुर्की सरकार से डिटेल मांगी गई है। क्योंकि, इस मामले से संबंधित निर्यातक आईटीसी लिमिटेड का दावा है कि 60,000 टन के शिपमेंट को पहले से ही आवश्यक क्लियरेंस मिली हुई है।

'तुर्की से अभी तक कोई औपचारिक संवाद नहीं'
आईटीसी एक बड़ा निर्यातक है और इसने सरकार से कहा है कि उसने गेहूं जिनेवा स्थित कंपनी को बेचा था और उसने आगे उसे तुर्की की कंपनी को बेचा था। सुधांशु पांडे के मुताबिक सभी तरह की वित्तीय लेनदेन हो चुकी थी। उन्होंने कहा, 'पेमेंट से पहले सभी तरह की लोकल क्लियरेंस होनी जरूरी है। भारत में भी क्वारंटीन हुआ था। कंपनी ने यही हमें बताया है.....उनकी वित्तीय लेनदेन, यहां तक तुर्की के आयातक के साथ पूरी हो चुकी थी।' उन्होंने कहा कि कृषि विभाग और कृषि निर्यात संस्था एपीईडीए इस संबंध में तुर्की के क्वारंटीन अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं। 'उन्हें उन लोगों की ओर से कुछ नहीं कहा गया है। अभी तक कोई औपचारिक संवाद नहीं हुआ है।'

भारत ने गेहूं निर्यात पर लगा रखी है पाबंदी
भारत ने गेहूं के अनुमानित घरेलू पैदावार में हल्की गिरावट आने के बीच इसकी कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 13 मई को गेहूं निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। हालांकि, जो कंसाइमेंट पहले ही रजिस्टर्ड हो चुके थे, उनके निर्यात पर रोक नहीं लगाई गई थी। वैसे, इस पाबंदी का भी भारत के कई राज्यों में विरोध हो रहा है और कुछ संगठन इसे किसानों के लिए अहितकर बता रहे हैं। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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