Ebrahim Raisi: मौत बांटने वाली कमेटी के चेयरमैन, क्या ईरानी राष्ट्रपति रईसी के साथ ईश्वर ने किया इंसाफ?
Iran's president helicopter crash: ईरान के कट्टरपंथी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी, जो लंबे समय से ईरान के सर्वोच्च नेता की छत्रछाया में पल रहे थे, और उन्हें देश की शिया धर्मतंत्र के भीतर अगले सुप्रीम लीडर के संभावित चेहरे के रूप में देखा जाता रहा है।
लेकिन रविवार को हेलीकॉप्टर हादसे में करीब 15 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब हेलीकॉप्टर मिला, तो सभी सवारों को मृत घोषित कर दिया गया। दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर मिल गया है और ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा है, कि मौके पर 'किसी जिंदगी के निशान नहीं मिले हैं।'

ईरानी राष्ट्रपति की मौत हो चुकी है और नये राष्ट्रपति के नाम की घोषणा के बाद उनकी मौत की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। मोहम्मद मोखबर, जो अभी ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति हैं, माना जा रहा है, कि वो अभी राष्ट्रपति बनेंगे, जबतक की अगले राष्ट्रपति का चुनाव ना हो जाता है। अलगा राष्ट्रपति, ईरानी संविधान के मुताबिक 50 दिनों के अंदर चुना जाएगा।
ईरानी राष्ट्रपति के साथ 'ईश्वर का इंसाफ'
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत को इजराइल के धर्मगुरुओं ने 'ईश्वर का इंसाफ' करार दिया है। क्योंकि, 1988 में जब ईरान में कैदियों को सामूहिक फांसी दी गई थी, तो लोगों को मौत देने का 'फैसला' इब्राहिम राईसी ने ही किया था। जिसके बाद अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने उनके खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया।

राईसी को क्यों कहा जाता है 'मौत बांटने वाली कमेटी' का अध्यक्ष?
63 साल के इब्राहिम राईसी पहले ईरान की न्यायपालिका चलाते थे। लेकिन, साल 2017 में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति मौलवी हसन रूहानी के खिलाफ राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा, जिन्हें ईरान का सबसे उदारवादी नेता कहा जाता था। हालांकि, राईसी चुनाव हार गये।
मौलवी हसन रूहानी वो राष्ट्रपति थे, जो साल 2015 में प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ परमाणु समझौते तक पहुंच गये थे।
वहीं, 2021 के राष्ट्रपति चुनाव में इब्राहिम राईसी ने फिर से अपनी दावेदारी जताई और उन्हें जिताने के लिए तमाम दूसरे उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गये। जिसके बाद हुए राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने करीब 62 प्रतिशत वोट हासिल की, लेकिन ये चुनाव ईरानी इतिहास का ऐसा चुनाव था, जिसमें सबसे कम वोट डाले गये। लाखों लोगों ने वोट नहीं डाला और लाखों लोगों ने जान बूझकर गलत तरीके से वोट डालकर अपने विरोध का प्रदर्शन किया।
वहीं, चुनाव जीतने के बाद जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब राईसी से 1988 की फांसी के बारे में पूछा गया, जिसमें राजनीतिक कैदियों, प्रदर्शनकारियों और अन्य लोगों को फांसी दी गई थी, तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। लेकन, ईरानी इतिहास में उस घटना को 'खूनी आतंक' के नाम से जाना जाता है। दरअसल, फांसी देने से पहले तमाम लोगों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने के लिए 'मौत आयोग' का गठन किया गया था, जिसके प्रमुख इब्राहिम राईसी थे। कहा जाता है, कि ऐसा सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए किया गया था और तमाम विरोधी नेताओं और प्रदर्शनकारियों को फांसी पर लटका दिया गया था।
करीब 5 हजार लोगों को दी गई थी फांसी
दरअसल, ईरानी विपक्षी समूह मुजाहिदीन-ए-खल्क के सदस्यों ने, जिन्हें इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का समर्थन प्राप्त था, उन्होंने तत्कालीन ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया था और उन्होंने इराक की सीमा की तरफ से ईरान पर हमला कर दिया था। इस हमले को ईरान ने कुचल दिया और फिर अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने यूनाइटेड नेशंस के दखल के बाद संघर्ष विराम को स्वीकार कर लिया।
लेकिन, इसके बाद ईरान के अंदर राजनीतिक कैदियों और प्रदर्शनकारियों को लेकर सबसे बड़ा मुकदमा शुरू किया गया और मुकदमे के दौरान उनसे अपनी पहचान बताने के लिए कहा गया। 1990 एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों ने खुद को "मुजाहिदीन" बताया, उन्हें फौरन फांसी से लटका दिया गया, जबकि जिन लोगों ने आत्मसर्पण कर दिया, उन्हें ईरानी सेना के रास्ते में बिछाए गये बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए भेज दिया गया।
मानवाधिकार समूहों के मुताबिक, कम से कम 5 हजार से ज्यादा लोगों को ईरान में उस दौरान फांसी पर लटकाया गया था।

राईसी के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी ने 2019 में राईसी को वैसा शख्स ठहराया, जिसने 'नाबालिगों को फांसी पर लटकाया, कैदियों के साथ क्रूर व्यवहार किया, उन्हें तरह तरह की यातनाएं दीं और उनके अंग-भंग किए।' इसके 1988 की फांसी की सजा का भी जिक्र किया है।
ईरान के शासन के सारे आखिरी फैसले सर्वोच्च नेता करते हैं और 85 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथों में सारे के सारे फैसलवे होते हैं, लेकिन राईसी ने राष्ट्रपति के रूप में, ईरान के हथियार-ग्रेड स्तर तक यूरेनियम के संवर्धन का समर्थन किया, साथ ही पश्चिम के साथ खुलकर टकराव मोल लिया।
राईसी ने अप्रैल में इजराइल पर हमले का समर्थन किया था, जिसमें इजराइल पर ईरान ने एक साथ कम से कम 300 ड्रोन और मिसाइल दागे थे।
महसा अमिनी की मौत के बाद राईसी की भारी आलोचना
साल 2022 में कुर्द लड़की महसा अमिनी की ठीक से हिजाब नहीं पहनने पर पुलिस हिरासत में मौत के बाद ईरान में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और इस घटना के दौरान भी ईरानी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की थी। इस दौरान भी इब्राहिम राईसी की काफी आलोचना की गई।
महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 500 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 22,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके खिलाफ अभी भी मुकदमे चल रहे हैं।
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