भारतीयों को जल्द ही मिलेगा सुपर पासपोर्ट, एडवांस फीचर से होगा लैस, विदेश जाना होगा चुटकी बजाने जितना आसान
भारत के नागरिकों को पहला ई-पासपोर्ट जल्द ही मिल सकता है। भारत जल्द ही पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम (पीएसपी-वर्जन 2.0) का दूसरा चरण शुरू करने जा रहा है। ये 2012 में शुरू हुई मौजूदा प्रणाली का अपग्रेड वर्जन है। चिप वाले इन पासपोर्ट के सभी तकनीकी परीक्षण पूरे हो चुके हैं।
इस नए सिस्टम से लोग आसानी और अपग्रेडेड आधार पर पासपोर्ट बनवा सकेंगे और विदेश जाने की योजना को पूरा कर सकेंगे। लोगों को समय पर, विश्वसनीय, सुलभ और पारदर्शी तरीके से पासपोर्ट सेवाएं हासिल हो पाएंगी। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद भी ली जाएगी।

Image: Passport Seva
ई-पासपोर्ट सेवा 2.0 के तहत लेटेस्ट बायोमीट्रिक्स टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाएगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस डाटा एनालिसिस, चैट बॉट, लैंग्वेज प्रीफरेंस के साथ ही क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग किया जाएगा। इससे पासपोर्ट बनवाने में आसानी होगी और यह डाटा को भी बेहतर सुरक्षा देगा। ई पासपोर्ट सेवा का सॉफ्टवेयर आईआईटी कानपुर और एनआईसी द्वारा डेवलप किया गया है।
नई व्यवस्था में सुरक्षा का सबसे अधिक ध्यान रखा गया है। डेटा सेंटर, डेटाबेस और एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर जैसी प्रमुख चीजें सरकारी स्वामित्व वाली होंगी, जिससे उच्च-स्तरीय सुरक्षा और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
नए पासपोर्ट में फोटोग्राफ और उंगलियों के निशान सहित व्यक्ति की बायोमेट्रिक जानकारी के साथ एक चिप लगी होगी। यह तरीका न केवल पासपोर्ट को अधिक सुरक्षित बनाएगी बल्कि नकली पासपोर्ट के निर्माण को रोकने में भी मदद करेगी।
देखने में ये वर्तमान पासपोर्ट बुकलेट जैसे ही होंगे। सिर्फ बुकलेट के बीच के किसी एक पेज पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन चिप और आखिर में छोटा फोल्डेबल एंटीना रहेगा। चिप वाले पासपोर्ट के लिए केंद्रों पर भीड़ न हो, इसलिए योजना चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। इसके लिए पासपोर्ट सेंटर्स तकनीकी रूप से अपग्रेड किए जा रहे हैं।
फिलहाल पासपोर्ट जारी होने में करीब चार से पांच दिन का समय लगता है। पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम 2.0 के कार्यान्वयन के साथ, यह अवधि काफी कम होने की उम्मीद है, जिससे आवेदकों के लिए प्रक्रिया तेज और अधिक कुशल हो जाएगी।
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता डेटा सेंटर, डिजास्टर रिकवरी सेंटर और सरकारी सुरक्षित रिपॉजिटरी की स्थापना है। इन सुविधाओं को सभी पासपोर्ट सेवा केंद्रों (पीएसके), पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों (पीओपीएसके), पासपोर्ट कार्यालयों और विदेश में भारतीय मिशनों/पोस्टों में नेटवर्क किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सिस्टम की अत्याधुनिक नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर (एनओसी) और सुरक्षा ऑपरेशन सेंटर (एसओसी) के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी, जिससे बिना किसी व्यवधान के निरंतर संचालन सुनिश्चित होगा।












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