पिता नहीं चाहता था बेटा लगवाए कोरोना वैक्सीन, 12 वर्षीय बच्चा पहुंचा कोर्ट तो जज ने सुनाया ये फैसला

पिता नहीं चाहता था बेटा लगवाए कोरोना वैक्सीन, 12 वर्षीय बच्चा पहुंचा कोर्ट तो जज ने सुनाया ये फैसला

नई दिल्ली, 24 सितंबर: नीदरलैंड में 12 से 17 वर्ष की आयु के बच्चे ये फैसला कर सकते हैं कि उन्हें कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवानी है या नहीं। लेकिन इसके लिए बच्चों को अपने माता-पिता दोनों से लिखित अनुमति की आवश्यकता होती है। यानी बिना माता-पिता या अभिभावक की सहमति के बिना 12 से 14 वर्ष तक के बच्चे नीदरलैंड में वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं। उत्तरी डच शहर में एक 12 वर्षीय बच्चा वैक्सीन लगवाने के मामले को लेकर कोर्ट पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक 12 साल का बच्चा कोविड-19 वैक्सीन लगवाना चाहता था लेकिन उसके पिता इस बात से सहमत नहीं थे। हालांकि कोर्ट ने बच्चे के हक में फैसला सुनाया है और बच्चे को जल्द से जल्द वैक्सीनेट का आदेश दिया है। वैक्सीन लगवाने को लेकर कोर्ट में पहुंचने वाला ये अब तक वहां का पहला मामला है।

बच्चे ने कोर्ट में कहा- 'मैं कोरोना संक्रमित नहीं होना चाहता हूं'

बच्चे ने कोर्ट में कहा- 'मैं कोरोना संक्रमित नहीं होना चाहता हूं'

ग्रोनिंगन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जब ये वैक्सीन लगवाने को लेकर 12 साल के बच्चे की याचिका पर सुनवाई हुई तो हर कोई हैरान था। कोर्ट में 12 साल से बच्चे ने तर्क दिया, मैं कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं होना चाहता हूं और र दूसरों को संक्रमित करने की संभावना को भी सीमित करना चाहता हूं, इसलिए मैं वैक्सीनेट होना चाहता हूं।

ग्रोनिंगन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एक डच न्यायाधीश ने गुरुवार (23 सितंबर) को 12 वर्षीय बच्चे की इच्छा के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायाधीश बार्ट ट्रॉम्प ने टीकाकरण में शामिल हितों, खासकर इससे बच्चों के फायदेमंद बताते हुए 12 साल के लड़के को टीका लगाने की अनुमति दी।

पिता इसलिए कर रहा था बच्चे को वैक्सीन लगाने से मन

पिता इसलिए कर रहा था बच्चे को वैक्सीन लगाने से मन

रिपोर्ट के मुताबिक 12 साल के बच्चे के माता-पिता का तलाक हो चुका है। बच्चे की मां वैक्सीन के लिए मान जाती है लेकिन पिता बेटे को वैक्सीन लेने से मना करता है। पिता ने कोर्ट में तर्क दिया कि वैक्सीन का अभी भी ट्रॉयल चल रह है। पिता ने कोर्ट में ये भी कहा कि चूंकि वैक्सीन का ट्रायल अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए यह संभव है कि लंबी अवधि में प्रजनन अंगों के लिए ये बहुत बड़ा जोखिम होगा।

हालांकि बच्चे के पिता की दलील जज को वैज्ञानिक नहीं लगी। जज ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस तर्क का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। पिता और बच्चे की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि बच्चे ने जो भी तर्क दिए हैं, वह वैज्ञानिक और तर्कसंगत हैं।

'मैं वैक्सीनेट होना चाहता हूं ताकि अपनी दादी से मिल सकूं...'

'मैं वैक्सीनेट होना चाहता हूं ताकि अपनी दादी से मिल सकूं...'

इस 12 साल के बच्चे ने कोर्ट में यह भी बताया कि वह वैक्सीनेट होना चाहता है क्योंकि वह अपनी बुजुर्ग दादी के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहता है। लड़के ने तर्क दिया कि टीका लगने से उसकी दादी को संक्रमित करने की संभावना कम हो जाएगी, जो फेफड़ों के कैंसर से जूझ रही है।

कोर्ट के मुताबिक बच्चे की दादी मेटास्टेटिक फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हैं और अपने जीवन के अंतिम चरण में हैं।" स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बच्चा दादी के साथ ज्यादा समय बिताना चाहता है लेकिन वह वैक्सीनेट नहीं होने की वजह से दादी से उतना मिल नहीं पा रहा है। उसे डर है कि कहीं वह अपनी दादी को संक्रमित न कर दे और उसे यकीन है कि अगर उसने ऐसा किया तो उसकी जान को खतरा होगा।"

लड़के ने अपने पिता से बात करने की बहुत कोशिश की थी लेकिन वह नहीं माने। जिसके बाद बच्चे ने कोर्ट का रूख किया। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, कोरोनो वायरस ने नीदरलैंड में 2 मिलियन से अधिक लोगों को संक्रमित किया है, जिसमें 18,528 लोग मारे गए हैं।

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