Donald Trump: कोर्ट में लटका था मुंह, जज से बोले- नहीं हूं दोषी.. जानिए डोनाल्ड ट्रंप केस में आगे क्या होगा?
डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप है, कि उन्होंने एडल्ट स्टार स्टॉर्मी डेनियल को एक लाख 30 हजार रुपये अपने अफेयर पर मुंह बंद रखने के लिए दिए थे। ये पैसा चुनावी कैम्पेन का पैसा था।

Donald Trump pleads not guilty: डोनाल्ड ट्रम्प आपराधिक मुकदमे का सामना करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के एकमात्र पूर्व/या वर्तमान राष्ट्रपति बन गये हैं और वो न्यूयॉर्क के न्यायाधीश के सामने पेश हुए, जहां उन्होंने कहा, कि वो दोषी नहीं हैं। डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को मैनहट्टन क्रिमिनल कोर्ट में 2016 में एडल्ट स्टार स्टॉर्मी डेनियल को गुप्त तरीके से एक लाख 30 हजार डॉलर का भुगतान करने के मामले में पेश हुए थे, जहां उका चेहरा लटका हुआ था। कोर्ट रूम के अंदर उनका चेहरा पत्थर की तरह सख्त लग रहा था और उन्होंने लटके हुए मुंह के साथ ही फोटोग्राफर्स के सामने अपना चेहरा घुमा दिया और फिर कहा, 'नॉट गिल्टी', यानि दोषी नहीं हूं।
डोनाल्ड ट्रंप पर लगाए गये 34 आरोप
डोनाल्ड ट्रंप जब मैनहट्टन क्रिमिनल कोर्ट में पेश हुए, तो उन्हें कस्टडी में ले लिया गया और इस दौरान कोर्ट रूम के अंदर उनके सामने ग्रांड ज्यूरी के आरोपों को पढ़ा गया। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के ऊपर कुल 34 आरोप लगाए गये और कोर्ट के सामने डोनाल्ड ट्रंप ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा, कि वो बेकसूर हैं। सुनवाई पूरी होने के बाद मैनहट्टन क्रिमिनल कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर 1 लाख 22 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया और फिर करीब एक घंटे तक कोर्ट रूम कार्रवाई के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ क्या आरोप लगाए गये हैं, उन्हें अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लिहाजा साफ नहीं हो पाया है, कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ कौन कौन से आरोप लगाए गये हैं, लेकिन कोर्ट रूम में पेश होने के बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी इतिहास में क्रिमिनल कार्रवाई का सामना करने वाले पहले पूर्व या मौजूदा राष्ट्रपति बन गये हैं।

ट्रंप के खिलाफ अगला कानूनी कदम क्या होगा?
डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कोर्ट रूम कार्रवाई का पहला चरण समाप्त हो गया है और उनके खिलाफ क्या आरोप लगाए गये हैं, वो उन्हें सुना दिए गये हैं। यह वो चरण है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के वकीलों को कोर्ट रूम में जांच टीम ने वो सबूत मुहैया कराया है, जो उन्होंने अपनी जांच के बाद जुटाए थे। अब डोनाल्ड ट्रंप को अगली बार 4 दिसंबर को कोर्ट में पेश होना होगा, जब अगली सुनवाई होगी। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप के बचाव पक्ष के वकील कोर्ट में अपनी बात रखेंगे, वहीं उनकी जांचकर्ताओं के साथ कोर्ट में बहस होगी, जिसमें दोनों पक्षों की तरफ से अपनी अपनी दलील रखी जाएगी, जिसे ट्रायल कहा जाता है। बचाव पक्ष के वकील कोर्ट में जज के सामने उनके खिलाफ लगाए गये सभी आरोपों को एकमुश्त खारिज करने का अनुरोध कर सकते हैं और उन सबूतों को चुनौती दे सकते हैं, जो ट्रंप के खिलाफ पेश किए गये हैं। इसके साथ ही ट्रंप के वकील कोर्ट का जगह बदलने, जज को बदलने जैसे हथकंडे भी अपना सकते हैं। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के कार्यालय के पूर्व अभियोजक मैथ्यू गैलुज़ो ने बताया, कि "वे मैनहट्टन में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाकर कोर्ट का जगह बदलने की मांग कर सकते हैं, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप को लगता है, कि वो मैनहट्टन में काफी अलोकप्रिय हैं।"

जज पर लगा चुके हैं गंभीर आरोप
मैनहट्टन क्रिमिनल कोर्ट के जज जुआन मर्चन पर डोनाल्ड ट्रंप पहले ही गंभीर आरोप लगा चुके हैं, जिन्होंने हाल ही में ट्रंप के संगठन से जुड़े एक आपराधिक मामले की भी सुनवाई की थी। ट्रंप ने कहा था, कि जज जुआन मर्चन को मैनहट्टन जिला अटॉर्नी एल्विन ने कोर्ट में बिठाया है, जो उन्हें पसंद नहीं करते हैं। न्यूयॉर्क स्टेट कोर्ट सिस्टम भी कह चुका है, कि जज जुआन मर्चन को बेतरतीब ढंग से कोर्ट का काम सौंपा गया है। मैथ्यू गैलुज़ो ने कहा, कि इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की टीम की तरफ से 24 सदस्यीय ग्रांड ज्यूरी को बदलने की मांग की जा सकती है, जिन्होंने सबूतों के आधार पर डोनाल्ड ट्रंप पर मुकदमा चलाने की इजाजत दी है। उन्होंने कहा, कि "मुझे पूरी उम्मीद है, कि ट्रंप की टीम, जितना संभव हो इस मामले को लटकाने की कोशिश करेंगे।"
क्या ट्रंप केस के बारे में कर पाएंगे बात?
फिलहाल के लिए, हां। अमेरिकी न्यायाधीशों के पास आपराधिक कार्यवाही पर आरोपी के बोलने या ना बोलने पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति है। पूर्व संघीय अभियोजक रॉन फिलिपकोव्स्की ने समझाते हुए कहा, जज मामले को देखते हुए गैग ऑर्डर लगा सकता है और जज ऐसा कभी भी कर सकते हैं। हालांकि, गैग ऑर्डर में भी अलग-अलग गुंजाइश हो सकती है। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िलिपकोव्स्की ने कहा, कि "यह मूल रूप से एक न्यायाधीश पर निर्भर करता है, कि वो क्या फैसला सकता है। जैसे डोनाल्ड ट्रंप को आदेश दिया गया है, कि वो कोर्ट रूम के बाहर प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर ऐसा बयान नहीं दें, जिनसे इस केस में शामिल किसी गवाह, किसी प्रॉसीक्यूटर के लिए दिक्कत बढ़ाए या उन्हें डराने की कोशिश हो।" हालांकि, उनके खिलाफ गैग ऑर्डर जारी नहीं किया गया है। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ गैग ऑर्डर जारी करना काफी दुर्लभ है, क्योंकि ये उनके बोलने के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

मुकदमा कब तक चलेगा?
गैलुज़ो ने कहा, कि डोनाल्ड ट्रंप के पास कोर्ट रूम के बाहर भी मामले को निपटाने का विकल्प होगा, जिसमें वो प्रॉसीक्यूटर के साथ किसी डील पर पहुंचकर कोर्ट मुकदमें से बच सकते हैं। हालांकि, गैलुज़ो ने ये भी कहा, कि इसके लिए निश्चित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को अपने ऊपर लगाए गये कई आरोपों को स्वीकार करना होगा, हालांकि उन्होंने ये भी कहा, कि ये वो रास्ता है, जिसपर यकीनन उनकी लीगल टीम नहीं चलेगी। प्रॉसीक्यूटर्स ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अगले साल जनवरी से ट्रायल शुरू करने की प्लानिंग की है, लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट रूम में सुनवाई के बाद डोनाल्ड ट्रंप के वकीलों ने वसंत 2024 की शुरुआत की तारीख का सुझाव दिया है। हालांकि, कार्यवाही के लिए कोई विशिष्ट समय सीमा नहीं है, लेकिन गैलुज़ो ने कहा, कि आपराधिक मामले दीवानी मामलों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा, कि "मुझे लगता है कि अगर यह एक सामान्य मामला होता, तो शायद एक साल, शायद उससे कम, शायद पांच महीने" में फैसला आ जाता। लेकिन, अब हमें देखना होगा, कि क्या ट्रंप को लेकर फैसल अगले साल होने वाले चुनाव से पहले आ सकता है।" उन्होंने कहा, कि ये जज पर निर्भर करेगा, कि वो ट्रायल को कितनी जल्दी ये लेट से शुरू करने की इजाजत देते हैं। गैलुज़ो ने कहा, कि एक आरोपी ट्रायल में देरी चाहता है और इस दौरान वो अपने पक्ष में गवाहों को मोड़ना चाहता है। देरी होने से गवाहों की विश्वसनीयता कम होती हैं, उनकी यादें कमजोर होने लगती हैं, गवाह टीवी पर अनावश्यक बयानबाजी करता है, जिससे खुद उसकी विश्वसनीयता कम होती जाती है।
क्या यह ज्यूरी ट्रायल होगा?
गैलुज़ो ने कहा, कि ट्रम्प का मामला संभवतः जूरी ट्रायल होगा, हालांकि उनकी डिफेंस टीम संभावित रूप से "बेंच ट्रायल" कर सकती है, जिसमें जज ही ज्यूरी के रूप में काम करेंगे और अंतिम फैसला सुनाएंगे। हालांकि, इसके लिए अभियोजन पक्ष को भी इसके लिए तैयार होने की जरूरत होगी। अन्यथा, ज्यूरी चयन की प्रक्रिया मुकदमे से पहले शुरू हो जाएगी और अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष को 12 ज्यूरी सदस्यों पर सहमति होने की जरूरत होगी, जिनके बारे में दोनों पक्ष तैयार हों, कि वो निष्पक्ष हैं, खासकर इस हाईप्रोफाइल केस में।
फैसला आने में कितना समय लगेगा?
जब अभियोजन पक्ष और बचाव, दोनों की तरफ से कोर्ट में तमाम दलील दे दिए जाएंगे, तो उसके बाद ज्यूरी उनके दलीलों के आधार पर अपना फैसला तैयार करेगा। ज्यूरी का ये विचार विमर्श कुछ घंटों से लेकर कुछ हफ्तों तक का हो सकता है। यदि, डोनाल्ड ट्रंप को दोषी पाया जाता है और उन्हें सजा सुनाने की नौबत आती है, तो फिर सैद्धांतिक तौर पर उन्हें हिरासत में रखने का आदेश दिया जा सकता है, हालांकि यह संभवतः अनुशंसित सजा की गंभीरता पर आधारित होगा। एक न्यायाधीश अंत में सजा सुनाएगा और ट्रम्प की टीम तब आगे की अपील शुरू कर सकती है। अगर सजा में जेल का समय शामिल है, तो न्यूयॉर्क राज्य के कानून के तहत, बचाव पक्ष अपील की प्रक्रिया समाप्त होने तक सजा पर रोक - या रोक लगाने का अनुरोध कर सकता है।
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क्या यह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करेगा?
डोनाल्ड ट्रंप, जो 2024 राष्ट्रपति चुनाव के लिए पहले ही दावेदारी जता चुके हैं, उन्होंने अपनी कैम्पेनिंग शुरू कर दी है और पार्टी से टिकट मांग रहे हैं, लिहाजा मुकदमे की कार्यवाही के दौरान कानूनी रूप से उन्हें कोर्ट में उपस्थित होने की आवश्यकता होगी, भले ही सुनवाई राष्ट्रपति अभियान के दौरान ही क्यों ना हो। फिलिपकोव्स्की ने कहा, कि "मुझे लगता है कि यह मुकदमा तीन से चार सप्ताह तक चलेगा और ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव के समय एक महीने के लिए हर दिन कठघरे में खड़े हो सकते हैं।" हालांकि, इससे ज्यादा उनपर असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि संविधान के मुताबित अमेरिका में जन्मे और 35 साल से ज्यादा की उम्र वाल व्यक्ति राष्ट्रपति बन सकता है, भले ही कोर्ट उन्हें दोषी क्यों ना ठहरा दे।












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