अमेरिका में मिला डायनासोर का 'दोस्त' 55 फीट का समुद्री दैत्य, क्या धरती पर फिर होगी शैतानों की वापसी?

अमेरिका में वैज्ञानिकों ने 55 फीट लंबे विशालकाय समुद्री दैत्य को खोजने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन सवाल ये है, क्या धरती पर फिर से भविष्य में शैतानों का राज कायम होगा?

वॉशिंगटन, दिसंबर 24: वैज्ञानिकों ने अमेरिका में डायनासोर के 'दोस्त' को खोजने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन इसके साथ ही सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या भविष्य में कभी फिर से 'शैतानों' का राज तो पृथ्वी पर कायम नहीं होगा? डायनासोर युग का ये समुद्री राक्षस इतना विशालकाय है, जिसकी कल्पना वैज्ञानिकों ने सपने में भी नहीं की थी।

55 फीट का समुद्री राक्षस

55 फीट का समुद्री राक्षस

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने समुद्र में रहने वाले विशालकाय 55 फीट के समुद्री राक्षस को खोजने में कामयाबी हासिल की है। ये समुद्री जीव डायनासोर के युग का है, यानि धरती पर करीब 7 करोड़ साल पहले, जब डायनासोर का राज था, उस वक्त ये समुद्री जीव की प्रजाति भी धरती पर मौजूद थी। इस जीव का नाम इचिथ्योसॉर है और वैज्ञानिकों का मानना है कि, ये एक तरह की समुद्री मछली ही है, लेकिन आम व्हेल की तुलना में इसका आकार काफी ज्यादा बड़ा है और इसकी प्रजाति भी काफी अलग है।

काफी तेजी से हुआ विस्तार

काफी तेजी से हुआ विस्तार

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पता लगाया लगाया है कि, इस समुद्री जीव का आकार अप्रत्याशित तरीके से बढ़ता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मछली के आकार के इन समुद्री सरीसृपों का आकार आज से करीब 24 करोड़ साल पहले काफी तेजी से बढ़ गया था आपको जानकर हैरानी होगी, कि इस जीव के सिर का आकार साढ़े 6 फीट का है, यानि आप अंदाजा लगा सकते हैं, कि ये कितना विशालकाय रहा होगा।

व्हेल से 'समुद्री दैत्य' की तुलना

व्हेल से 'समुद्री दैत्य' की तुलना

डायनासोर युग के समय में पाए जाने वाले इचिथ्योसॉर समुद्र में पाए जाने वालीं व्लेह मछलियों से काफी अलग हैं और व्हेल की तुलना में इचिथ्योसॉर का आकार काफी तेजी से बढ़ा है। वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है, कि जब आज से 6.6 करोड़ साल पहले, जब धरती से डायनासोर विलुप्त हो रहे थे, उस वक्त इचिथ्योसॉर अपने आकार को खतरनाक तरीके से बढ़ा रहा था। इस जीव का विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों को पता चला है कि, 5.5 करोड़ साल के इतिहास में व्हेल मछली ने अपने आकार का 90 फीसदी विकास किया था, जबकि इस जीव ने 15 करोड़ साल के इतिहास में सिर्फ 1 प्रतिशत का ही विकास किया था, लेकिन फिर अचानक ये दैत्याकार हो गया।

नेवादा में जीवाश्म की खोज

नेवादा में जीवाश्म की खोज

रिसर्चर्स ने सबसे पहले उत्तर-पश्चिमी नेवादा के ऑकस्टा पर्वत की चट्टानों के बीच साल 1998 में प्राचीन इचिथ्योसॉर के जीवाश्म को खोजने में कामयाबी हासिल की थी। खोज के दौरान रिसर्चर्स को इस जीव की कुछ हड्डियां चट्टानों के बाहर निकलती दिखाई दी थीं। जिसके बाद इस जीव को लेकर वैज्ञानिकों ने रिसर्च करना शुरू कर दिया था। लेकिन, रिसर्च के दौरान जब वैज्ञानिकों ने इस जीव का विश्लेषण किया, तो वो हैरान रह गये। वैज्ञानिकों को पता चला है कि, इस जीव का आकार काफी विशालकाय रहा होगा।

2015 में खुदाई का काम

2015 में खुदाई का काम

साल 2015 में वैज्ञानिकों ने इस जगह की खुदाई शुरू की थी और फिर इस जीव के जीवाश्म को चट्टानों से बाहर निकाला गया था। चट्टानों के बीच से वैज्ञानिकों को इस जीव का सिर और पानी में तैरने वाले पंख और कई छोटे-छोटे अंग मिले थे। इस रिसर्च को लेकर स्क्रिप्स कॉलेज में जीव विज्ञानी और असिस्टेंट प्रोफेसर, वरिष्ठ शोधकर्ता लार्स शमित्ज ने कहा कि, "हमने पाया है कि इचिथ्योसॉर ने व्हेल की तुलना में बहुत तेजी से विशालता विकसित की है, जब दुनिया में विनाशकारी घटना हुई थी और धरती पर मौजूद करीब 75 फीसदी प्रजातियां विलुप्त हो रहीं थीं।

क्या धरती पर लौटेंगे दैत्याकार जीव?

क्या धरती पर लौटेंगे दैत्याकार जीव?

प्रसिद्ध साइंस जर्नल 'जर्नल साइंस' में इस जीव पर हुए रिसर्च को प्रकाशित किया गया है। वहीं वरिष्ठ शोधकर्ता लार्स शमित्ज ने कहा कि, ''रिसर्च में जो पता चला है कि, वो इंसानों के लिए बहुत अच्छी खबर है और यह जीवन के लचीलेपन का संकेत है कि यदि पर्यावरण की स्थिति सही रही, तो जीवन का विकास काफी तेजी से हो सकता है और ऐसे जीव फिर से धरती पर उत्पन्न हो सकते हैं''। वैज्ञानिकों ने इस जीव का थ्री-डी मॉडल तैयार किया है और विश्लेषण के बाद इस नई प्रजाति का नाम सिंबोस्पोंडिलस यंगोरम रखा गया है। विशालकाय जबरों वाला ये समुद्री जीव आज से करीब 24 करोड़ साल पहले ट्राइसिक काल के दौरान रहता था।

6.5 फीट है खोपड़ी की लंबाई

6.5 फीट है खोपड़ी की लंबाई

रिसर्च करने वाले प्रोफेसर्स ने बताया कि, इस जीव की खोपड़ी की लंबाई 6.5 फीट मापी गई है और वैज्ञानिकों ने बताया है कि, पूरी तरह से विकसित एक सिंबोस्पोंडिलस यंगोरम की लंबाई 55 फीट से ज्यादा हो सकती है। वहीं, जब ये जीव जिंदा रहता होगा, उस वक्त इसका वजन करीब 45 टन के करीब रहता होगा। रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि, सिंबोस्पोंडिलस यंगोरम का घर उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तटों से दूर पैथलासिक महासागर में होगा। हालांकि, इसके दांतों के आकार को देखते हुए वैज्ञानिकों का मानना है कि, ये छोटी मछलियों को ही खाता होगा।

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