डिप्रेशन के इन पांच प्रमुख लक्षणों को पहचान लेंगें तो कई जिंदगियां बच जाएंगी
डिप्रेशन या अवसाद आज पूरी दुनिया में बहुत गंभीर समस्या बनकर उभरा है। महिलाएं तो इसकी सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। ऐसे में इसके प्रमुख लक्षणों को जानना जरूरी है, जिससे जिंदगियां बच सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में अपने पोर्टल को जो अपडेट किया है, उसके मुताबिक डिप्रेसिव डिजॉर्डर (डिप्रेशन) एक सामान्य मानसिक रोग है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में 5% व्यस्क अवसाद से पीड़ित हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इससे काफी ज्यादा प्रभावित हैं।
डिप्रेशन को गंभीरता से लेना जरूरी
विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि डिप्रेशन या अवसाद या निराशा की बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्योंकि, यह आत्महत्या तक की वजह बन सकता है। यह बात हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि हल्के, मध्यम या गंभीर डिप्रेशन का भी प्रभावी इलाज उपल्ब्ध है।

लंबे समय की उदासी की स्थिति है डिप्रेशन
मोटे तौर पर देखें तो डिप्रेशन या अवसाद एक ऐसी सामान्य मानसिक बीमारी है, जिसमें लंबे समय तक उदासी की स्थिति बनी रहती है, आनंद खत्म हो जाता है या फिर किसी भी कार्य में रुचि खत्म होने लगती है। यह कुछ समय का मूड चेंज नहीं है। यह जीवन के हर पहलुओं को प्रभावित करने लगता है।
गुस्सा और चिड़चिड़ापन
डिप्रेशन के पांच प्रमुख लक्षण गिनाए जा सकते हैं। डिप्रेशन की वजह से खासकर पुरुषों में अचानक गुस्सा और चिड़चिड़ापन देखने को मिल सकता है। इसलिए अगर अब आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के व्यवहार में अचानक इस तरह का बदलाव देखें तो सतर्क हो जाएं।

भूख में बदलाव
डिप्रेशन से हमारी भूख भी प्रभावित हो सकती है। इसकी वजह से अवसाद से पीड़ित कोई व्यक्ति सामान्य से ज्यादा खाने लग सकता है और कुछ की भूख में अप्रत्याशित कमी देखने को मिल सकती है। खाने की आदत में इस तरह का बदलाव या वजन में अचानक गिरावट भी इसका लक्षण हो सकता है।
लगातार थकान की शिकायत
डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति सामान्य कार्य करने भी अचानक थकावट महसूस करने लग सकता है। उसे लग सकता है कि वह यह कर ही नहीं सकता। अगर किसी व्यक्ति में यह लक्षण दिखे, जबकि इसका कोई पुख्ता कारण नजर नहीं आए तो हो सकता है कि वह मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहा हो।

दुविधा और अपराधबोध की स्थिति में रहना
डिप्रेशन का मरीज हतोत्साहित भी महसूस कर सकता है और उसमें निर्णय लेने की क्षमता भी कम हो जा सकती है। वह बहुत ज्यादा अपराधबोध से ग्रसित और खुद को बहुत ही तुच्छ महसूस करने लग सकता है। उसमें अचानक भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा निराशा भी छा सकती है।
उदासीनता
अगर कोई व्यक्ति पहले किसी चीज में बहुत ज्यादा दिलचस्पी रखता हो, उसे एंजॉय करता हो। लेकिन, अचानक से उसके प्रति उदासीन होने लगता है तो हो सकता है कि यह खतरे की घंटी है। वह लोगों से मिलना बंद कर दे, बाहर जाने से मना करने लगे, बेवजह के बहाने बनाना शुरू कर दे तो सावधान हो जाने में ही भलाई है।

ये भी हैं डिप्रेशन के लक्षण
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- एकाग्रता में कमी आना
- मरने या आत्महत्या जैसे ख्याल आना
- चैन की नींद न आना
डिप्रेशन किसे होता है?
डिप्रेशन का शिकार कोई भी हो सकता है। लेकिन, जो लोग किसी दुर्व्यवहार से पीड़ित हैं या जिन्हें कोई बड़ा नुकसान पहुंचा है या किसी तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं, तो वह इसकी चपेट में आ सकते हैं। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
डिप्रेशन से जुड़े कुछ प्रमुक आंकड़े
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में 28 करोड़ लोग अवसाद रोग से पीड़ित हैं। महिलाओं में इसकी आशंका पुरुषों की तुलना में 50% ज्यादा है। विश्व भर में सालाना 7 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। 15 से 29 वर्ष की आयु में मौत के मामले में आत्महत्या चौथा सबसे बड़ा कारण है।(तस्वीरें- सांकेतिक)












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