Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

क्रूड ऑयल की कीमत में लगी आग, 100 डॉलर प्रति बैरल को छूने के करीब, इस वजह से बढ़ रही महंगाई

रूसी और सऊदी अरब के उत्पादन में कटौती और चीन से बढ़ती मांग के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में फिर से आग लग गई है और इसमें तेजी का सिलसिला जारी है।

जून के बाद से लगभग 30 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद 2023 में पहली बार तेल की कीमत इस महीने 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की राह पर हैं।

crude oil latest price

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 93.93 डॉलर प्रति बैरल पर है। यह पिछले 10 महीने का उच्चतम स्तर है। जून में यह 72 डॉलर प्रति बैरल के सबसे निचले स्तर पर चला गया था।

रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से यह सबसे बड़ी तिमाही वृद्धि की ओर बढ़ रहा है। बीते साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार इजाफा देखने को मिला था और इसका भाव 139 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें कमी देखी गई।

क्यों बढ़ रही क्रूड ऑयल की कीमत?

इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब और रूस ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने का निर्णय लिया था। इस फैसले के तहत दोनों ही देश दिसंबर 2023 तक प्रतिदिन 1.3 मिलियन बैरल कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती कर रहे हैं।

इसी बीच रूस ने प्रति दिन 3 लाख बैरल तक कच्चे तेल के निर्यात को कम करने का भी फैसला किया है। ये बड़ा कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने पिछले सप्ताह चेतावनी दी थी कि इन दो ओपेक+ देशों द्वारा की जा रही आपूर्ति में कटौती से 'महत्वपूर्ण आपूर्ति में कमी' पैदा होगी, जो चल रही मूल्य अस्थिरता के लिए काफी खतरा पैदा करती है।

यह रिपोर्ट ओपेक की घोषणा के ठीक एक दिन बाद जारी की गई थी कि बाजार को आगामी तिमाही में 3 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से एक दशक से अधिक समय में आपूर्ति की सबसे बड़ी कमी हो सकती है।

सउदी अरब और ओपेक में उसके साझेदार इस बात से भी चिंतित हैं कि IEA ने भविष्यवाणी की है कि तेल की मांग 2030 से पहले चरम पर पहुंच जाएगी, जिसके बारे में कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा पर पहले से ही चल रहे तेजी से स्विच को 2026 तक आगे बढ़ाया जा सकता है।

भारत में भी बढ़ सकती है मुसीबत

आपको बता दें कि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा क्रूड ऑयल बाहर से खरीदता है। इस क्रूड ऑयल की कीमत भारत अमेरिकी डॉलर में चुकाता है।

ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम प्रभावित होते हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती है तो जाहिर है भारत का आयात बिल बढ़ जाएगा जिसकी भरपाई के लिए तेल कंपनियों को ईंधन के दाम बढ़ाने का निर्णय लेना होगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+