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US-इजराइल से तोड़ेंगे संबंध, चीन-पाकिस्तान से दोस्ती.. CPI(M) की विदेश नीति INDIA गठबंधन को कबूल?

CPI(M) Manifesto Foreign Policy: भारत में इस महीने से शुरू होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां अपनी अपनी विचारधारा के हिसाब से घोषणापत्र जारी कर रही हैं और अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानि CPI(M) ने अपनी घोषणापत्र जारी कर दी है, जिसमें अमेरिका के साथ स्ट्रैटजिक संबंध तोड़ने की बात कही गई है।

CPI(M) के चुनावी घोषणापत्र में अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक संबंध खत्म करने के साथ साथ चीन के साथ व्यापार को बढ़ाने और पाकिस्तान के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के अलावा नागरिक से नागरिक संबंध बहाल करने की बात कही गई है।

CPI M Manifesto foreign policy

हालांकि, CPI(M) ने 2019 लोकसभा चुनाव में सिर्फ 3 सीटें जीती थीं, लेकिन विचारधारा की बुनियाद पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि ये अभी भी मेनस्ट्रीम में गहराई से मौजूद है। भारत के कई कथित बुद्धिजीवी, जो आतंकवादियों की फांसी का विरोध करते रहे हैं, नक्सलियों के खिलाफ एक्शन का विरोध करते रहे हैं, वो मजबूती से इस विचारधारा के समर्थक माने जाते हैं।

CPI(M) अगर सरकार में आई, तो उसकी विदेश नीति क्या होगी?

- इंडिया-यूएस डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट, QUAD और I2U2 गठबंधन से भारत बाहर आएगा।

- भारतीय उपमहाद्वीप से सभी सैन्य स्टेशनों को हटाना, खासकर हिंद महासागर के डियागो कार्सिया से अमेरिका के सैन्य बेस को हटाना और हिंद महासागर से सभी न्यूक्लियर हथियारों को हटाया जाएगा।

- भारत से हर तरह के परमाणु हथियारों को पूर्ण रूप से हटाया जाएगा। इसके अलावा, सभी तरह के विध्वंसक हथियारों, कैमिकल हथियारों और बायोलॉजिकल हथियारों को पूरी तरह से भारत से हटाया जाएगा

- दुनिया के जो भी देश, किसी भी हिस्से में लड़ाई में शामिल हैं, उन्हें भारत के किसी भी सैन्य बेस से किसी भी तरह की सुविधा नहीं दी जाएगी।

- स्पेस स्टेशन और ध्रुवीय क्षेत्रों में सैन्यीकरण का भारत विरोध करेगा।

- भारत गुट-निरपेक्ष विदेश नीति अपनाएगा और बहुध्रुवीय दुनिया को बढ़ावा देगा।

- अमेरिका से साथ हर किस्म के स्ट्रैटजिक संबंधों को खत्म कर दिया जाएगा, जिनसे हमारी संप्रुभता का उल्लंघन होता है और जिनसे हमारे हित प्रभावित होते हैं।

- इजराइल के साथ सभी तरह के स्टैटजिक, सिक्योरिटी और सैन्य संबंधों को खत्म करेंगे। और यूएन में इजराइल के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगे।

- हर पड़ोसी देश के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करेंगे और उन सभी मुद्दों के तत्काल समाधान की कोशिश करेंगे, जो साझा हितों को प्रभावित कर चिंता बढ़ाते हैं।

- चीन के साथ सीमा विवाद के निपटारे के लिए बातचीत करेंगे और चीन के साथ हर तरह के संबंधों को बढ़ावा देंगे।

- पाकिस्तान के साथ फिर से बातचीत की शुरूआत करेंगे और जितने भी मुद्दों पर विवाद हैं, उन्हें सुलझाने के लिए बातचीत करेंगे। क्रॉस बॉर्डर टेरेरिज्म पर बात होगी। नागरिक से नागरिक स्तर, खेल कूद और सांस्कृतिक संबंधों को फिर से बहाल किए जाएंगे।

सीपीआई-एम, मोदी सरकार के खिलाफ बनाए गये विपक्षी पार्टियों के INDIA गठबंधन का हिस्सा है और एक दिन पहले ही कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी घोषणापत्र जारी की है, लेकिन कांग्रेस का घोषणापत्र, सीपीआई-एम से काफी अलग है। लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या कांग्रेस को सीपीआई-एम का घोषणापत्र कबूल है, क्या कांग्रेस, अमेरिका से साथ भारत के हर स्ट्रैटजिक संबंधों को तोड़ने और चीन और पाकिस्तान के साथ दोस्ती करने के वादे के साथ है?

अगर INDIA गठबंधन सरकार में आती है, तो क्या कांग्रेस सीपीआई-एम के घोषणापत्र को तरजीह देगी। क्योंकि, मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत और इजराइल काफी करीब आ चुके हैं और अमेरिका के साथ भी संबंध भी इंडो-पैसिफिक में काफी मजबूत हो चुका है।

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