कोविड से संक्रमित और वैक्सीन लेने वाली माताओं के दूध में मिली कोविड एंटीबॉडी: रिसर्च
नई दिल्ली, 15 नवंबर: कोरोना वायरस और उसकी एंटीबॉडी को लेकर रिसर्च जारी है। अब पता चला है कि जो माताएं कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो रहीं या फिर जिन्होंने इस वायरस के खिलाफ टीका लगवाया है, उनके स्तन के दूध में कोविड एंटीबॉडी पाई जा रही है, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि वो बच्चे को फायदा पहुंचाएगी। इसकी विस्तृत रिपोर्ट जामा पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित हुई।

शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने कुल 77 माताओं के दूध के नमूने लिए थे। जिसमें से 47 संक्रमित होकर सही हुई थीं, जबकि 30 ने वैक्सीन लगवाई थी। जांच में पता चला कि जिन माताओं में रोग-प्रतिरोधक क्षमता थी, उन्होंने स्तन के दूध में वायरस के खिलाफ उच्च स्तर के इम्युनोग्लोबुलिन ए (आईजीए) एंटीबॉडी का उत्पादन किया, जबकि टीके से प्राप्त प्रतिरक्षा ने मजबूत इम्युनोग्लोबुलिन जी (आईजीजी) एंटीबॉडी का उत्पादन किया।
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आमतौर पर एक न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी एक संक्रामक कण से एक कोशिका की जैविक रूप से होने वाले किसी भी प्रभाव को रोककर उसकी रक्षा करती है। मामले में रोचेस्टर मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय (यूआरएमसी) के असिस्टेंट प्रोफेसर और रिसर्च के को-राइटर ब्रिजेट यंग ने कहा एंटीबॉडी की मात्रा मापना एक बात है, जबकि ये कहना कि एंटीबॉडी बच्चे पर कितना असर करेगी ये अलग बात है। आगे उन्हें पता चला कि ये एंटीबॉडी संक्रमण के तीन महीने बाद तक मौजूद है, जबकि वैक्सीन लेने वाली माताओं में तीन महीने बाद एंटीबॉडी में गिरावट दर्ज की गई। रिसर्च में साफ कहा गया कि जो माताएं संक्रमित हो चुकी हैं या फिर वैक्सीन ली है, वो ये ना सोचें की बच्चों को बिना वैक्सीन दिलाए काम चल जाएगा।












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