हमास और हिज्बुल्लाह में कौन है ज्यादा खतरनाक? इजराइल को भी एक बार धूल चटा चुका है ये संगठन
इजराइल और फिलिस्तीन के आतंकवादी संगठन हमास के बीच जारी जंग में लेबनान के एक आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह की भी एंट्री हो चुकी है। हमास की तरह ही इस संगठन को भी ईरान का समर्थन मिला हुआ है।
हिज्बुल्लाह और हमास पश्चिम एशिया के दो ताकतवर संगठन हैं, जो इजरायल के कट्टर दुश्मन हैं। हमास की तरह हिज्बुल्लाह को भी अमेरिका और अन्य देशों द्वारा एक आतंकवादी समूह नामित किया गया है और दोनों ही इज़राइल के प्रति शत्रुता रखते हैं।

हमास इस्लाम की सुन्नी शाखा से संबंधित है। जबकि हिज्बुल्लाह शिया शाखा से जुड़ा हुआ है। हिज्बुल्लाह 1982 में पैदा हुआ था। जबकि, हमास की उत्पत्ति 1920 के दशक के मुस्लिम ब्रदरहुड से हुई है और इसका गठन 1987 में हुआ था।
ईरान का पालतू हिज्बुल्लाह
हिज्बुल्लाह लेबनान में राजनीतिक और सैन्य संगठन के तौर पर काम करता है। उसके नेता लेबनान में राजनीतिक फैसलों के साथ-साथ सैन्य गतिविधियों में भी शामिल रहते हैं। हिज्बुल्लाह बेहद अनुशासित और गुप्त तरीके से काम को अंजाम देता है, जिससे उसके नेतृत्व और आंतरिक कामकाज के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
हिज्बुल्लाह को पश्चिम एशिया का सबसे ताकतवर संगठन माना जाता है। जैसा कि आपको मालूम है कि वह लेबनान की राजनीति पर हावी रहता है पूरे अरब दुनिया में तेहरान के प्रभाव को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिज्बुल्लाह पर यमन में ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों की मदद करने का भी आरोप है।
पिछले कुछ वर्षों में हिज्बुल्लाह ने अपनी सैन्य शक्ति को काफी अधिक बढ़ा लिया है। ऐसा दावा किया जाता है कि हिज्बुल्लाह के पास 100,000 प्रशिक्षित लड़ाके हैं। इस आतंकवादी समूह के पास लगभग 150,000 रॉकेट और मिसाइलें हैं।
इसके अलावा हिज्बुल्लाह के पास सटीक-निर्देशित मिसाइलें हैं जो इजराइल में कहीं भी मार कर सकती हैं। इसके साथ ही इस संगठन के पास उन्नत ड्रोन भी हैं जो या तो हमला कर सकते हैं या खुफिया जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं।
पिछले 40 वर्षों में हिज्बुल्लाह की सबसे बड़ी उपलब्धि दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने वाली इजराइली सेना के खिलाफ उसका गुरिल्ला युद्ध था। जब मई 2000 में इजराइल की सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
हिजजुल्लाह पर 2005 में लेबनान के सबसे शक्तिशाली सुन्नी राजनेता और पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या करने का आरोप है। यूएन ने हिज्बुल्लाह के तीन सदस्यों पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था। इसके बाद से हिजबुल्ला कई ईसाइयों और सुन्नी मुस्लिम राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया चुका है।
हिज्बुल्लाह का नेतृत्व हसन नसरल्लाह कर रहा है। वह 1992 से समूह के महासचिव के पद पर है। नसरल्लाह को एक करिश्माई और लोकप्रिय व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, और एक कुशल सैन्य रणनीतिकार कहा जाता है। नसरल्लाह की अगुवाई में ही हिज्बुल्लाह ने इजरायल में कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
हमास ने इसराइल को बर्बाद करने की कसम खाई
हमास की स्थापना 1987 में गाजा में रहने वाले फिलिस्तीनी शरणार्थी शेख अहमद यासीन द्वारा पहले इंतिफादा के दौरान की गई थी। हमास को लक्ष्य ही इजराइल को खत्म करना है।
हमास ने 2006 के संसदीय चुनाव में जीत हासिल की और 2007 में हिंसक तरीके से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त फिलिस्तीनी प्राधिकरण से गाजा पट्टी का नियंत्रण छीन लिया। अब यह समूह राजनीतिक रूप से गाजा पट्टी को नियंत्रित करता है।
पीएलओ के विपरीत, हमास इजराइल के राज्य के दर्जे को मान्यता नहीं देता है लेकिन 1967 की सीमाओं पर फिलिस्तीनी राज्य को स्वीकार करता है। हमास 1990 के दशक के मध्य में इजराइल और पीएलओ द्वारा किए गए ओस्लो शांति समझौते का हिंसक विरोध करता है।
हमास को कतर और तुर्की जैसे अरब देशों से समर्थन हासिल है। हाल ही में हमास को ईरान और उसके सहयोगियों का भी समर्थन मिलने लगा है। हमास के बारे में कहा जाता है कि इसके पास 40,000 ट्रेंड लड़ाके हैं। इसके अलावा इस संगठन के पास 30,000 लड़ाकू मिसाइल हैं जिनकी मारक क्षमता 250 किमी तक है।












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