जलवायु परिवर्तन से किन बीमारियों का बढ़ रहा है खतरा? बच्चे बहुत ज्यादा असुरक्षित
Climate change:जलवायु परिवर्तन कई तरह के रोगों का कारण बन रहे हैं। स्ट्रोक और हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। आज जो बच्चे हैं, उनके लिए भविष्य में ज्यादा संकट है।

महाराष्ट्र में मुंबई से सटे रायगढ़ जिले के खारघर में रविवार को हुई त्रासदी में इस बात की पुष्टि हो गई है कि 14 लोगों की जान सनस्ट्रोक की वजह से गई है। यह तबाही सिर्फ इस बात की गवाही है कि दुनिया भर में मौसम की ऐसी भयानक घटनाओं में वृद्धि हो रही है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि इस तरह की घटना तो सिर्फ एक झांकी है।

बीमारियों का कारण बन रहा है जलवायु परिवर्तन
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की पर्यावरणीय स्वास्थ्य विभाग की चेयर कारी सी नादेउ ने जो कुछ बताया है, उससे पता चलता है स्वास्थ्य को लेकर जलवायु परिवर्तन कितना गंभीर संकट पैदा कर रहा है। उन्होंने अनेकों बीमारियां गिनाई हैं, जिसका संबंध सीधे जलवायु परिवर्तन से है।

नादेउ के अनुसार जलवायु परिवर्तन का सीधा संबंध तूफान, सुनामी और बाढ़ की घटनाओं से है। इनकी वजह से लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ रही है। क्योंकि, यह शैवाल और फफूंदी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन, बीमारियों की बात करें तो एलर्जी की समस्या जानलेवा नहीं कही जा सकती।

जानलेवा हो सकता है जलवायु परिवर्तन
लेकिन, जब जलवायु परिवर्तन की वजह से अत्यधिक गर्मी पड़ती है, तूफान या सूखे जैसे हालात पैदा होते हैं तो खाद्य और जल संकट की समस्या बढ़ जाती है। स्वच्छ जल की कमी के चलते अनेकों रोग पैदा होते हैं, जिसमें किडनी फेल होना शामिल है।
इसके चलते वायु प्रदूषण की समस्या भी भयावह रूप ले चुकी है। इसके चलते अस्थमा, हार्ट अटैक और स्ट्रोक की घटनाएं बढ़ रही हैं। लेकिन, जब जलवायु परिवर्तन की वजह से जंगलों में आग लगती है तो उसका धुआं, सामान्य वायु प्रदूषण के मुकाबले करीब 10 गुना ज्यादा खतरनाक हो जाता है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया और दूसरे इलाकों में इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं। यह स्थिति अजन्मे बच्चे के लिए बहुत ही खतरनाक है। वह समय से पहले जन्म ले सकते हैं और जन्म के समय उनका वजन मानक से कम रह सकता है। कुल मिलाकर जलवायु परिवर्तन अब अपना भयावह रूप दिखाने लगा है।

बच्चे बहुत ज्यादा असुरक्षित
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आज के बच्चे अपने जीवन में कम से कम एक बार जलवायु परिवर्तन की भयानक घटनाओं की चपेट में आ सकते हैं। आज जो व्यस्क हैं, उनके मुकाबले में आज के बच्चों का जलवायु परिवर्तन को लेकर भविष्य ज्यादा संकटपूर्ण है।
दुनिया भर के कई देशों में बच्चों में दमा और एलर्जी की समस्या काफी हद तक बढ़ चुकी है। बच्चों के विकास के लिए उनका बेहतर पोषण बहुत आवश्यक है। लेकिन, जलवायु परिवर्तन के चलते खाद्य और जल संकट की वजह से भविष्य में उनका जोखिम बढ़ चुका है।
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कमजोर इम्यून सिस्टम का कारण
ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन की वजह से इंसान का इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो रहा है। शोध में पाया गया है कि जो लोग हीट स्ट्रेस या वायु प्रदूषण की चपेट में आए हैं, उनपर बीमारियों से लड़ने वाली वैक्सिन का भी प्रभाव कम पड़ता है।

वेक्टर-जनित रोगों का बढ़ा खतरा
जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनियाभर में वेक्टर-जनित रोगों का संकट गहराता जा रहा है। जलवायु गर्म होने से वेक्टर उन जगहों पर अपना ठिकाना बनाने लगे हैं, जहां वह पहले पैदा नहीं हो पाते थे। जैसे जीका वायरस और लाइम रोग ने अब अपना दायरा बढ़ा लिया है। भारत में बाढ़ का संकट गहराने से डेंगू और मलेरिया का खतरा और बढ़ने वाला है।













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