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2024 में भारत के तीन पड़ोसी देशों में छिड़ सकता है गृहयुद्ध.. सालभर सुलगता रहा गुस्सा, एक पर टूटने का खतरा!

Possible Civil Wars in 2024: साल 2022 के फरवरी महीने की 24 तारीख को रूस ने यूक्रेन के खिलाफ 'सैन्य अभियान' की शुरूआत कर दुनिया को जंग की आग में जलने के लिए छोड़ दिया था और उसके बाद से दुनिया लगातार जंग देख रही है।

साल 2023 में एक तरफ यूक्रेन युद्ध चलता रहा, लेकिन 7 अक्टूबर को हमसा ने दक्षिणी इजराइल में हमला कर दुनिया को एक और युद्ध में झोंक दिया। 7 अक्टूबर के बाद की दुनिया बदल चुकी है और इजराइल लगातार गाजा पट्टी पर बमबारी कर रहा है। मकसद साफ है, हमास का नामोनिशान मिटाना।

लेकिन, इजराइल और हमास के बीच जारी इस जंग में 20 हजार से ज्यादा लोगों के मरने का दावा किया गया है। लेकिन, डरने की बात ये है, कि ना सिर्फ अगले साल इन दोनों लड़ाइयों के जारी रहने की आशंका है, बल्कि कई और नई लड़ाइयां भी शुरू हो सकती है और कम से कम दो जंग तो भारत के पड़ोस में भी छिड़ सकती है।

आइये जानते हैं, कि भारत के पड़ोस के अलावा और कौन कौन से देश हैं, जो साल भर सुलगते रहे हैं और जहां, कभी भी गृहयुद्ध छिड़ सकता है।

Possible Civil Wars in 2024

म्यांमार में भीषण गृहयुद्ध

1 फरवरी 2021 को म्यांमार की सेना ने देश की चुनी हुई सरकार का तख्तापलट कर दिया था और उसके बाद से भारत का ये पड़ोसी देश लगातार गृहयुद्ध की आग में जल रहा है। म्यांमार 2021 में अराजकता की स्थिति में उस वक्त आ गया, जब सैन्य तख्तापलट ने आंग सान सू की के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका।

उसके बाद से म्यांमार में गृहयुद्ध छिड़ गया, जो 2023 में और तेज रहा।

सैन्य तख्तापलट के बाद से म्यांमार में कम से कम 135 जातीय समूह एक्टिव हो चुके हैं, लिहाजा देश के कई हिस्सों में सेना के साथ लड़ाई चल रही है। तख्तापलट से पहले वर्षों तक, सेना और कई अल्पसंख्यक जातीय समूहों के बीच निम्न-श्रेणी का नागरिक संघर्ष चल रहा था, जो लंबे समय से अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण और राज्य से स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे।

ये जातीय समूह म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली चाहते हैं, लेकिन अब अलग अलग देश की भी मांग उठने लगी है। म्यांमार की सेना ने इस बात को स्वीकार किया है, कि देश दो हिस्सों में टूट सकता है।

म्यांमार में आग लगाने में चीन लगातार घी डालता रहा है। चीन के इशारे पर ही म्यांमार में सैन्य तख्तापलट हुआ था और अब चीन ही उन जातीय समूहों को हथियार भी मुहैया करा रहा है, लिहाजा ये संघर्ष अत्यंत खूनी बन चुका है।

विद्रोहियों ने चीन के साथ लगने वाली उत्तरपूर्वी सीमा पर कस्बों और गांवों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है, जिसमें प्रमुख व्यापार मार्गों पर नियंत्रण भी शामिल था। इससे पश्चिमी राखीन राज्य के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी नए सिरे से लड़ाई शुरू हो गई।

ये विद्रेही अब इतने ज्यादा मजबूत हो चुके हैं, कि इसने सेना के साथ समझौता करने से इनकार कर दिया है, लिहाजा देश का गृह युद्ध 2024 में काफी खराब हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर सकता है।

Possible Civil Wars in 2024

सुलग रहा है पाकिस्तान

1947 में आजादी के बाद से ही पाकिस्तान में सेना ने राजनीति में हमेशा से हस्तक्षेप किया है और 2023 में भी सेना का हस्तक्षेप जारी रहा। पाकिस्तानी सेना ने कभी भी चुनी सरकार को पांच सालों तक चलने नहीं दिया।

पिछले साल इमरान खान को सत्ता से बेदखल करने के बाद पाकिस्तान में लगातार राजनीतिक अराजकताओं से जूझता रहा। इस साल 9 मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन शुरू हो गये और पाकिस्तानी सेना के मुख्यालयों पर इमरान खान के समर्थकों ने हमला कर दिया, जो पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना के लिए बिल्कुल नया था।

पाकिस्तान को पड़ोसी अफगानिस्तान में अस्थिरता और बढ़ते आतंकवादी हमलों का भी सामना करना पड़ रहा है। संघर्षरत अर्थव्यवस्था और 2022 की विनाशकारी बाढ़ से चल रही लागत के कारण ये सुरक्षा चुनौतियां और भी खतरनाक हो गई हैं।

पाकिस्तान में 8 फरवरी 2024 में संसदीय चुनाव होने की उम्मीद है, जिसके बाद वर्तमान सैन्य कार्यवाहक सरकार द्वारा नागरिक शासन को सत्ता हस्तांतरित करने की उम्मीद है। कई लोग सेना पर करीब से नजर रख रहे हैं। यदि सत्ता का यह हस्तांतरण नहीं होता है, या देरी होती है, तो नागरिक विद्रोह छिड़ सकती है।

Possible Civil Wars in 2024

श्रीलंका में हालात फिर बिगड़ने की आशंका

श्रीलंका को 2022 में एक भीषण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, जिसके कारण ईंधन, भोजन और चिकित्सा की गंभीर कमी हो गई। नागरिक विरोध के कारण तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश से भागना पड़ा। उनकी जगह वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंह ने ले ली।

हालांकि, 2023 में स्थिरता लौट आई और श्रीलंका ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बेलआउट समझौते के हिस्से के रूप में आर्थिक सुधारों को लागू करना शुरू कर दिया। लेकिन, राजनीतिक अभिजात्य वर्ग के भ्रष्टाचार और देश की आर्थिक कठिनाई की वजहों को अभी तक संबोधित नहीं किया गया है।

2024 के अंत तक श्रीलंका में भी चुनाव होने हैं। जबकि मौजूदा राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के दूसरे कार्यकाल के लिए रेस में उतरने की पूरी संभावना है, लेकिन जनता के बीच उनका भरोसा कम है। उन्हें भ्रष्ट राजनीतिक अभिजात वर्ग के बहुत करीब के रूप में देखा जाता है।

लिहाजा, यह असंतोष नए सिरे से विरोध प्रदर्शन को जन्म दे सकता है। खासकर अगर अर्थव्यवस्था फिर से लड़खड़ाती है, या अगर 2022 वाले हालात फिर से बनते हैं, तो देश आर्थिक संकट के बाद अराजकता की स्थिति में फंस सकता है।

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