'जिहादी अपनी धरती हिंदुओं से मुक्त करना चाहते', बांग्लादेशी तस्लीमा ने चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी
Chinmoy Krishna Das Case Update News: बांग्लादेश में इस समय एक मामला सुर्खियों में है। यह मामला है पूर्व इस्कॉन भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और उनके वकील पर हुए हमले का। इस घटना ने न केवल बांग्लादेश में बल्कि भारत में भी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस बीच, बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन (Taslima Nasreen) ने इसे लेकर कड़ी आलोचना की है और इसे "हिंदू विरोध" का उदाहरण बताया है।
चिन्मय कृष्ण दास, जो कभी इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) के सदस्य रहे और हिंदू समाज के प्रवक्ता के रूप में काम करते थे, उन्हें 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वे ढाका से चटगांव में एक रैली में शामिल होने जा रहे थे। गिरफ्तारी के बाद से उनकी जमानत को लेकर विवाद चल रहा है।

वकील पर हमला और जमानत की सुनवाई
चिन्मय कृष्ण दास के वकील रेगन रॉय पर उनकी गिरफ्तारी के दिन ही सुनवाई के बाद हमला किया गया। उनके चैंबर में तोड़फोड़ की गई, और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना के बाद से कोई भी वकील उनकी ओर से केस लड़ने को तैयार नहीं है। इस कारण जमानत की सुनवाई अब 2 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
तस्लीमा नसरीन की प्रतिक्रिया
लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर बांग्लादेश सरकार और वहां की व्यवस्था की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सब 'हिंदू घृणा' का उदाहरण है और इसका मकसद 'हिंदुओं को कमजोर करना' है। तस्लीमा ने इसे 'जिहादियों की धरती' कहकर नाराजगी जाहिर की और आरोप लगाया कि चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं।
क्या है इस्कॉन का पक्ष?
इस्कॉन कोलकाता ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उनके प्रवक्ता राधारमण दास ने दावा किया कि चिन्मय दास के वकील पर हमला यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि कोई भी उनका बचाव न कर सके। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था पर हमला बताया।
ये भी पढ़ें- Krishna Das Prabhu: ISKCON बांग्लादेश के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास कौन हैं, जिन्हें किया गया है गिरफ्तार?
बांग्लादेश में तनाव और भारत का क्या रुख?
इस घटना के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और इस्कॉन समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। चटगांव में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें एक सरकारी वकील की मौत हो गई। भारत ने इस घटना पर चिंता जाहिर की है।
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और उनके वकील पर हमले ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि एक सामाजिक और धार्मिक मुद्दा बन चुकी है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं।
ये भी पढ़ें- चिन्मय दास की सुनवाई से पहले वकील पर जानलेवा हमला, ICU में भर्ती, टाइमलाइन में जानें 7 दिन में क्या-क्या हुआ?












Click it and Unblock the Notifications