Chinese Spy Balloon को मार गिराना मुश्किल क्यों ? अमेरिकी विशेषज्ञ से जानिए
चीन के जासूसी गुब्बारे को शूट करने पर अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े विशेषज्ञ ने शुक्रवार को कहा, इसे मार गिराना मुश्किल होगा। बता दें कि निगरानी करते चीनी गुब्बारे को अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल स्थलों के आसपास देखा गया।

Chinese Spy Balloon अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए चिंता का कारण बन गया है। रक्षा विभाग से जुड़े विशेषज्ञ ने शुक्रवार को कहा कि पहली बार चीनी निगरानी गुब्बारे को पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ने संवेदनशील अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल स्थलों पर उड़ते हुए पाया। अब विशेषज्ञों का मानना है कि यह गुब्बारा उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) जैसी तकनीक से निर्देशित हो सकता है। एक दूसरा चीनी निगरानी गुब्बारा भी लैटिन अमेरिका में देखा गया था। इस पर पेंटागन ने कहा, इसका कोई सटीक स्थान निर्धारित नहीं था।
चीनी निगरानी गुब्बारे के बारे में एनडीटीवी की रिपोर्ट में वॉशिंगटन में मैराथन इनिशिएटिव थिंक टैंक में निगरानी गुब्बारों के विशेषज्ञ विलियम किम के हवाले से बताया गया कि गुब्बारे मूल्यवान साधन हैं जिन्हें नीचे गिराना मुश्किल है। उन्होंने एएफपी रिपोर्ट के हवाले से कहा, पहला चीनी गुब्बारा सामान्य मौसम के गुब्बारे की तरह दिखता है लेकिन इसकी विशेषताएं अलग होती हैं।
Artificial Intelligence से निर्देशित गुब्बारा ?
विशेषज्ञ विलियम किम के अनुसार गुब्बारे में काफी बड़ा, दृश्यमान "पेलोड" बड़े सौर पैनलों द्वारा संचालित मार्गदर्शन और जानकारी एकत्र करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स है। उन्होंने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि इसमें उन्नत स्टीयरिंग तकनीकें हैं जिन्हें अमेरिकी सेना ने अभी तक हवा में निशाना नहीं साधा है। किम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने एक गुब्बारे के लिए यह संभव बना दिया है, बस इसके चारों ओर हवा में बदलाव को पढ़कर, इसकी ऊंचाई को अडजस्ट करने के लिए इसे निर्देशित करने के लिए अडजस्ट किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, इससे पहले आपके पास एक तार होना जरूरी होता था, अब आप बैलून को ऊपर भेज सकते हैं और जहां हवा ले जाएगी, बैलून भी वहां जाएगा। पेंटागन से जुड़े विशेषज्ञ के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में काफी प्रगति हुई है। हाल ही में ऐसी तकनीक विकसित हुई है, जिसके तहत आपके पास एक गुब्बारा होना चाहिए। इसे अपनी गति प्रणाली की जरूरत नहीं होती। ऊंचाई अडजस्ट करने के साथ ही गुब्बारा अपनी दिशा को खुद नियंत्रित कर सकता है। गुब्बारा जहां से उड़ता है (घरेलू आधार), वहां से रेडियो संचार भी भेजा जा सकता है।
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Chinese Spy Balloon से जुड़े और पहलुओं पर अमेरिकी विशेषज्ञ किम के मुताबिक अगर इससे (अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल) सिलोस की निगरानी करनी हो तो आपको इसकी जगह अडजस्ट करने के लिए यह बताने की हमेशा जरूरत नहीं होती। उन्होंने बताया कि निगरानी स्पाई बैलून के बुनियादी सिद्धांतों में से एक माना जाता है।
उपग्रहों की तुलना में कैसे फायदेमंद हैं बैलून ?
किम ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक के विकास के साथ ही उपग्रहों पर धरती के साथ-साथ अंतरिक्ष से भी हमले आसान हो गए हैं। इस कारण निगरानी करने के लिए सैटेलाइट अधिक संवेदनशील हैं। इनकी तुलना में गुब्बारों के अलग-अलग फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा ऐसे बैलून को आसानी से रडार पर ट्रैक नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बताया कि गुब्बारे ऐसी चीजों से बनते हैं जिनकी परछाईं नहीं बनती। धातु नहीं होने के कारण भले ही ये गुब्बारों का आकार काफी बड़ा हो जाता हो, इनका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। अगर काफी छोटे पेलोड (गुब्बारे के साथ अटैच बास्केट में सामान), के साथ गुब्बारे उड़ाए जाएं तो यह नजरों से ओझल हो जाते हैं। तस्वीरें लेने के लिए जासूसी एजेंसियां लगातार परिक्रमा करने वाले उपग्रहों की तुलना में गुब्बारों को तरजीह देती हैं। निगरानी करने वाले उपग्रह की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर होती है, ऐसे में गुब्बारों से जासूसी में फायदा भी होता है।
जासूसी गुब्बारों के विशेषज्ञ किम के अनुसार low-Earth-orbit satellites की तुलना में एक समय में एक स्थान पर महीनों तक स्थिर रखने के मकसद से गुब्बारों को ओवरहेड रखा जा सकता है।
क्या अमेरिकी इलाके में चीनी गुब्बारा गलती से आया ?
किम ने अमेरिकी इलाके में चीनी जासूसी की आशंका को सिरे से खारिज न करते हुए Chinese Spy Balloon को "वास्तविक संभावना" (real possibility) करार दिया। उन्होंने कहा कि एक चीनी गुब्बारे का उद्देश्य अमेरिकी सीमाओं के बाहर का डेटा जुटाना हो सकता है। मकसद और भी हो सकते हैं, लेकिन गुब्बारे में खराबी आ गई। उन्होंने कहा, "ये गुब्बारे हमेशा पूरी तरह से काम नहीं करते।"
उन्होंने कहा कि गुब्बारे आमतौर पर 65,000-1,00,000 फीट की ऊंचाई पर काम करते हैं। इस चीनी गुब्बारे की हाइट लगभग 46,000 फीट की ऊंचाई थी। विशेषज्ञ किम के अनुसार, हाइट निश्चित रूप से थोड़ी कम है ... यदि आप चाहते हैं कि ऐसे गुब्बारों का पता लगाना कठिन हो, यदि आप चाहते हैं कि इसे नीचे गिराना भी काफी मुश्किल हो, ऐसे में उच्च ऊंचाई पर गुब्बारों को भेजना समझ में आता है।
अमेरिका इसे क्यों नहीं मार सकता ?
चीनी गुब्बारे से जासूसी की आशंका के बीच अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने इसे शूट क्यों नहीं किया ? इस सवाल पर किम ने कहा कि गुब्बारे को मार गिराना उतना आसान नहीं है जितना लगता है। उन्होंने कहा, "इन गुब्बारों में हीलियम का इस्तेमाल होता है... यह हिंडनबर्ग (क्रैश हुए पैसेंजर एयरक्राफ्ट का नाम) नहीं है, आप इसे यूं ही शूट नहीं कर सकते। आग की लपटों के साथ यह ऊपर की तरफ उठता चला जाता है।" उन्होंने कहा, "यदि आप गुब्बारे में छेद करते हैं, तो हीलियम बहुत धीरे-धीरे बाहर निकलेगा।"
किम ने 24 साल पुराने उदाहरण से स्पष्ट किया कि 1998 में कनाडाई वायु सेना ने खराब मौसम के गुब्बारे को मारने की कोशिश करने के लिए F-18 लड़ाकू जेट भेजे थे। उन्होंने बताया कि कनाडा ने 1020-मिलीमीटर तोप के गोले दागे थे। इसके बावजूद गुब्बारे को नीचे आने में छह दिन लगे। ये ऐसी चीजें नहीं हैं जो गोली चलाने पर फटकर नीचे गिर पड़ें।
उन्होंने कहा, यह स्पष्ट नहीं था कि सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें Chinese Spy Balloon पर काम करेंगी या नहीं, क्योंकि उनकी मार्गदर्शन प्रणाली को तेज गति वाली मिसाइलों और विमानों को हिट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।












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