लगातार लॉकडाउन से चीन के लोग हुए आगबबूला, भाषा बदलकर जिनपिंग के खिलाफ निकाल रहे भड़ास
चीन के लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर अलग भाषा का इस्तेमाल शी जिनपिंग के खिलाफ कर रहे हैं और लिख रहे हैं, कि 'शी जिनपिंग नरक में जाएगा।'
Covid In China: चीन में बार बार लगाए जा रहे अत्यंत सख्त लॉकडाउन की वजह से अब चीन के लोग चिढ़ गये हैं और चीन के लोगों ने अब अपने राष्ट्रपति को जमकर कोसना शुरू कर दिया है। लेकिन, चीन में राष्ट्रपति की निंदा करना संभव नहीं और चीन में इंटरनेट पर सख्ती है, लिहाजा अगर कोई राष्ट्रपति के खिलाफ अपनी भड़ास निकालेगा, तो वो सीधे जेल पहुंच जाएगा। लेकिन, भारी सेंसर वाले इंटरनेट को दरकिनार करने के लिए ग्वांगझू के रहने वाले लोगों ने एक नए तरीके का इजाद किया है और लोगों ने भाषा बदलकर शी जिनपिंग को कोसना शुरू कर दिया है।

बार बार सख्ती से गुस्से में लोग
चीन के ग्वांगझू शहर में करीब एक करोड़ 90 लाख लोग रहते हैं और ये फिलहाल कोविड केन्द्र बना हुआ है, लिहाजा शी जिनपिंग ने इस शहर में सख्त लॉकडाउन लगा दिया है। लॉकडाउन के दौरान लोगों को अपने घर से बाहर निकलने पर सख्त मनाही है, जिसकी वजह से लोग काफी परेशान हो गये हैं। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर एक निवासी ने लिखा है कि, "हमें अप्रैल में पहली बार और फिर नवंबर में लॉक डाउन करना पड़ रहा है।" जबकि एक अन्य यूजर ने कहा है कि, "सरकार ने सब्सिडी प्रदान नहीं की है, क्या आपको लगता है किराए के लिए पैसे खर्च नहीं होते हैं?" सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों ने दूसरे लैंग्वेज में शी जिनपिंग को भला बुरा कहना शुरू कर दिया है और चीनियों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

चीन के लोगों में भारी गुस्सा
चीन के लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर अलग भाषा का इस्तेमाल शी जिनपिंग के खिलाफ कर रहे हैं और लिख रहे हैं, कि 'शी जिनपिंग नरक में जाएगा।' वहीं, कुछ अधिकारियों पर "बकवास करने" का भी आरोप लगाया है। भले ही सरकारी नीतियों के खिलाफ ज्यादातर आलोचनाओं को तेजी से हटाया जा रहा है, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, दूसरे भाषा में लिखे गये ज्यादातर पोस्ट वीबो पर ऐसे ही पड़े हुए हैं, क्योंकि चीनी अधिकारी उन पोस्ट को अलग भाषा होने की वजह से नहीं समझ पा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के लोग कैंटोनीज भाषा में शी जिनपिंग के खिलाफ गुस्से का इजहार कर रहे हैं, जिसकी उत्पत्ति ग्वांगझू के आसपास के गुआंग्डोंग प्रांत में हुई थी और दक्षिणी चीन में लाखों लोग इस भाषा को बोलते हैं। इस भाषा ने सेंसर के नोटिस को दरकिनार कर चीनी निवासियों को अपनी सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त करने का मौका दिया है। हालांकि, माना जा रहा है, कि बहुत जल्द इस भाषा को लेकर किए गये पोस्ट भी हटाने शुरू हो जाएंगे।












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