Video: स्पेस से धरती पर गिरा 25 टन का अनियंत्रित चीनी रॉकेट, तीसरी बार चीन की बदमाशी से बचे लोग

नासा के प्रमुख बिल नेल्सन ने शनिवार को ट्विटर पर बीजिंग की आलोचना करते हुए कहा है, कि रॉकेट के उतरने का विवरण साझा करने में विफलता गैर-जिम्मेदार और जोखिम भरा था।

वॉशिंगटन, जुलाई 31: दुनिया को कोरोना वायरस से परेशान करने वाला चीन पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बनता जा चुका है और अपने अंधाधुंध स्पेस प्रोग्राम की वजह से चीन ने लगातार तीसरी बार सैकड़ों लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया था। अंतरिक्ष में सबसे आगे निकलने की होड़ में चीनी ड्रैगन ने दुनिया की सुरक्षा की सारी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रखा है और यही वजह है, कि ये लगातार तीसरी बार ऐसा हुआ है, कि चीन का ऑउट ऑफ कंट्रोल रॉकेट अंतरिक्ष से बेकाबू होकर धरती पर गिरा है और चीन ने उसकी कोई भी जवाबदेही लेने से इनकार कर दिया।

धरती पर गिरा चीन का रॉकेट

धरती पर गिरा चीन का रॉकेट

अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है, कि अंतरिक्ष में ऑउट ऑफ कंट्रोल हो चुका चीन का लॉन्ग मार्च 5B रॉकेट धरती पर गिर चुका है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि, शनिवार को चीन का रॉकेट धरती पर गिरा है और सैकड़ों लोगों की जिंदगी पर मंडराने वाला खतरा टल गया है। इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग ने ऑउट ऑफ कंट्रोल हो चुके इस रॉकेट को लेकर दुनिया से तमाम जानकारियां छिपाने के लिए चीन को फटकार लगाई थी और चीनी वैज्ञानिकों को गैर-जिम्मेदार कहा था। अमेरिकी सैन्य इकाई ने ट्विटर पर चीन के आधिकारिक नाम का जिक्र करते हुए लिखा कि, ''यूएस स्पेस कमांड "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के लॉन्ग मार्च 5B (CZ-5B) रॉकेट के हिंद महासागर में 10:45 सुबह (अमेरिकी समय) बजे 7/30 एमडीटी में गिरने की पुष्टि करता है''।

चीन से मांगी गई बाकी जानकारी

चीन से मांगी गई बाकी जानकारी

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि, हम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना से इस अनियंत्रि रॉकेट के मलबे को लेकर ज्यादा तकनीकी जानकारी जानना चाहते हैं और जिस जगह पर ये रॉकेट गिरा है, वहां कितना नुकसान हुआ है, उसको लेकर भी अधिक जानकारी के लिए हम पीआरसी को संदर्भित करते हैं। आपको बता दें कि, लॉन्ग मार्च 5 बी रॉकेट का इस्तेमाल पिछले रविवार को वेंटियन नामक एक मानव रहित अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने के लिए किया गया था। चीन अपना खुद का स्पेस स्टेशन तैयार कर रहा है, जिसमें तीन मॉड्यूल लगने हैं। पिछले साल मई में पहला मॉड्यूल भेजा गया था और उस वक्त भी चीनी रॉकेट बेकाबू हो गया था और हिंद महासागर में मालदीव के पास गिरा था। वहीं, इस बार चीनी रॉकेट से दूसरा लैब मॉड्यूल भेजा गया था। लैब मॉड्यूल तो अपने निर्धारित स्थान पर पहुंच गया, लेकिन फिर से चीनी रॉकेट बेकाबू हो गया और हिंद महासागर में गिरा है। इस रॉकेट का वजन 25 हजार किलो था।

नासा प्रमुख ने बताया गैर-जिम्मेदार

नासा के प्रमुख बिल नेल्सन ने शनिवार को ट्विटर पर बीजिंग की आलोचना करते हुए कहा है, कि रॉकेट के उतरने का विवरण साझा करने में विफलता गैर-जिम्मेदार और जोखिम भरा था। नासा के मुखिया नेल्सन ने ट्विटर पर लिखा कि, "सभी अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों को स्थापित सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करना चाहिए, और इस प्रकार की जानकारी को पहले से साझा करने के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए"। उन्होंने आगे लिखा कि, 'इस तरह की जानकारी विश्वसनीयता के साथ साझा करने से बहुत बड़े रिस्क से बचा जा सकता है, खासकर लॉन्ग मार्च जैसे काफी ज्यादा वजन वाले रॉकेट को लेकर, क्योंकि ये जीवन और संपत्तियों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।' उन्होंने कहा कि, "ऐसा करना अंतरिक्ष के जिम्मेदार उपयोग और पृथ्वी पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।"

अंतरिक्ष स्टेशन बना रहा है चीन

अंतरिक्ष स्टेशन बना रहा है चीन

आपको बता दें कि, अमेरिका को टक्कर देने के लिए चीन अपना खुद का स्पेस स्टेशन बना रहा है, जिसका नाम तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन है और चीन के लिए ये प्रोजेक्ट काफी ज्यादा महत्वाकांक्षी है, जिसे वो अपने देश के माथे का मुकुट मानता है। चीन पहले ही मंगल ग्रह और चंद्रमा पर रोबोटिक रोवर्स उतार चुका है और ऑर्बिट में इंसानों को भेजने वाला चीन दुनिया का तीसरा देश बन चुका है। वहीं, लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट के जरिए लैब मॉड्यूल को तियांगोंग स्पेस स्टेशन के कोर मॉड्यूल के साथ सफलतापूर्वक डॉक किया गया था और जून से मुख्य डिब्बे में रहने वाले तीन अंतरिक्ष यात्रियों ने सफलतापूर्वक नई प्रयोगशाला में प्रवेश कर लिया है। चीन ने अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम में अरबों डॉलर का निवेश किया है और इसके पीछे का मकसद ये है, कि चीन ऐसी वैश्विक ताकत बन जाए, जो पूरी दुनिया को नियंत्रित कर सके और छोटे देश चीन के 'गुलाम' बनकर रहें।

बहुत ज्यादा लापरवाह है चीन

वहीं, खगोल भौतिकीविद् और उपग्रह ट्रैकर जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि, ये चीन की बहुत बड़ी लापरवाही है और इससे साफ जाहिर होता है, कि चीन ने अपनी पुरानी गलतियों से ना तो कुछ सीखा है और ना ही चीन ने कुछ माना है। पिछले साल भी चीन का रॉकेट बेकाबू होकर हिंद महासागर में गिरा था और उससे पहले भी चीन का एक रॉकेट बेलगाम होकर उपद्रव मचा चुका है और वो रॉकेट भी लॉंग मार्च 5बी सीरिज का ही था, जिसका गोला काफी देर तक आइवेरी कोस्ट में आसमान पर दिखाई देता रहा और धरती पर रॉकेट का मलबा कई मकानों के ऊपर गिरा था जो पूरी तरह से तहस नहस हो गया था। हालांकि, पहले से ही लोगों को हटा लिए गया था, इसीलिए किसी आदमी को चोट नहीं आई थी।

कैसा है चीन का अंतरिक्ष स्टेशन?

कैसा है चीन का अंतरिक्ष स्टेशन?

चीन ने अपने इस अंतरिक्ष स्टेशन का नाम तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन रखा है, जो नासा और रूस के सामूहिक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के आकार से करीब 20 प्रतिशत बड़ा और आधुनिक है। वहीं, चीन के स्पेस स्टेशन का काम इस साल के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है और फिर ये पूरी तरह से विकसित स्पेस स्टेशन होगा, जिसमें तीनों मॉड्यूल लगे होंगे और जिसमें एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला भी विकसित होगा। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मैन्ड स्पेस एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक, चीन का अंतरिक्ष स्टेशन 180 टन से ज्यादा वजन का होगा। और जब वेंटियन मॉड्यूल को स्पेस स्टेशन से डॉक किया गया है, तब अंतरिक्ष स्टेशन संयोजन का वजन लगभग 50 टन तक पहुंच गया है।

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