यूक्रेन युद्ध के बीच ताइवान पर हमले की तैयारी? चीन ने भेजे लड़ाकू विमान, ताइवान ने भी मिसाइलें तानी
ताइवानी अखबार ‘ताइवान न्यूज’ ने ताइवान के वायु क्षेत्र में चीनी विमानों के घुसपैठ करने की पुष्टि की है।
बीजिंग/ताइपे, मार्च 07: यूक्रेन युद्ध के बीच चीन के विदेश मंत्री ने 'मध्यस्थता' की वकालत जरूर की है, लेकिन ऐसा लग रहा है, जैसे खुद चीन यूक्रेन युद्ध के दौरान ताइवान पर हमला करने और उसे हड़पने का प्लान बना रहा है। यूक्रेन युद्ध के बीच चीन ने अपने लड़ाकू विमानों को एक बार फिर से ताइवान में घुसपैठ के लिए भेजा है, लेकिन इस बार ताइवान एयरफोर्स ने भी अपनी मिसाइलें चीनी लड़ाकू विमानों की तरफ तान दीं। जिसके बाद दोनों चीनी विमान वहां से भाग खड़े हुए हैं।

चीनी फाइटर जेट ने की घुसपैठ
ताइवानी अखबार 'ताइवान न्यूज' ने ताइवान के वायु क्षेत्र में चीनी विमानों के घुसपैठ करने की पुष्टि की है और रिपोर्ट में कहा है कि, चीन का एक फाइटर जेट ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र यानि (ADIZ) में घुसपैठ की है और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये दूसरी बार चीनी वायुसेना ने ताइवान के वायुक्षेत्र में घुसपैठ करने की कोशिश की है। ताइवान राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (MND) के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) का शेनयांग J-16 लड़ाकू विमान ने ADIZ के दक्षिण-पश्चिम कोने में उड़ान भरी।

ताइवान ने भी तानी मिसाइलें
ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, चीनी विमानों के घुसपैठ करने के बाद ताइवान ने भी अपने विमानों को चीनी लड़ाकू विमानों को खदेड़ने के लिए भेज दिया और फिर रेडियो पर चीनी विमान के लिए चेतावनी भरे मैसेज जारी किए गये। लेकिन, जैसे ही ताइवानी सेना ने चीनी विमान पर निशाना लगाने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव किया, ठीक वैसे ही चीनी विमान भाग खड़ा हुआ है।

भारी संख्या में चीनी विमानों का घुसपैठ
आपको बता दें कि, ADIZ वो क्षेत्र होता है, जिसके तहत हर देश को अपनी सीमा के बाहर कुछ दूरी तक इलाका होता है। हर देश का अपना अपना वायुक्षेत्र होता है और बगैर इजाजत किसी दूसरे देश के वायु क्षेत्र में घुसना घुसपैठ माना जाता है और उस देश की संप्रुभता का उल्लंघन माना जाता है। ताइवानी अखबार ने दावा किया है कि, इस महीने अब तक आठ चीनी सैन्य विमानों की ताइवान के वायुरक्षा क्षेत्र में घुसपैठ करते हुए ट्रैक किया गया है, जिनमें तीन लड़ाकू जेट, तीन स्पॉटर विमान और दो हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

239 दिनों में 961 बार घुसपैठ
ताइवानी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2020 से चीन ने ताइवान के ADIZ में नियमित रूप से विमान भेजकर लगातार अपनी रणनीति के हिसाब से घुसपैठ में भारी वृद्धि की है, जिसमें अधिकांश घटनाएं दक्षिण-पश्चिम कोने में होती हैं। MND के अनुसार, 2021 में चीनी सैन्य विमानों ने 239 दिनों में 961 बार ताइलान के वायुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया है। आपको बता दें कि, जब कोई देश बिना शक्ति का इस्तेमाल किए दूसरे के वायुरक्षा क्षेत्र मे प्रवेश करता है और अपने उद्येश्यों को पूरा करने की कोशिश करता है, उसे 'ग्रे जोन युद्ध नीति' कहा जाता है।

यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थता की बात
ताइवान में तबाही मचाने वाले विमानों को भेजने वाला चीन यूक्रेन युद्ध के वक्त मध्यस्थता की बात कर रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि, उनका देश यूक्रेन में शांति का आह्वान करता है और वो मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं कि, जो चीन खुद किसी और की संप्रभुता का बार बार उल्लंघन कर रहा है, और जिसका मकसद ही ताइवान पर कब्जा करना है, वो भला क्या मध्यस्थता करवाएगा। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, रूस को चीन का पूरा समर्थन मिला हुआ है और चीन की शह पर ही रूसी राष्ट्रपति लगातार यूक्रेन पर हमला कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की चीन से अपील
यूक्रेन युद्ध के बीच ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने चीन से युद्ध की आग बुझाने में मदद करने की अपील की है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधामंत्री ने कहा कि, चीन को विश्व शांति को बढ़ावा देने की अपनी घोषणाओं पर कार्रवाई करनी चाहिए और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को रोकने के प्रयास में शामिल होना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि, दुनिया को "निरंकुशता के चाप" द्वांरा फिर से खतरे में झोंका जा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट है कि, स्कॉट मॉरिसन ने एक व्यापक भाषण में यह भी सुझाव दिया कि रूस का आक्रमण उसके नेता व्लादिमीर पुतिन की योजना के अनुसार नहीं हो रहा है।

चीनी ‘आक्रमण’ पर ताइवान क्या बोला?
यूक्रेन संकट के बीच ताइवान भी काफी सतर्क है और ताइवान के उपराष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा है कि, 'आत्मनिर्णय के सिद्धांत को क्रूर बल से नहीं मिटाया जा सकता है'। वहीं, पश्चिम के एक वरिश्ठ राजनयिक ने कहा कि, ताइवान में अमेरिका द्वारा प्रतिनिधिमंडल भेजना इस बात का सबूत है कि, रूसी कार्रवाइयों के बाद वॉशिंगटन लगातार सतर्क बना हुआ है और वो अब भारत-प्रशांत क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि, ''यूक्रेन पर रूसी हमले ने वैश्विक राजनीति में भूकंप ला दिया है और और अब अमेरिका किसी भी हाल में इंडो-पैसिफिक में अपने प्रयासों को कमजोर नहीं करना चाह रहा है और अब अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता चीन से ताइवान को बचाना है'। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि, चीन के लिए ताइवान पर इस वक्त हमला करना 'सुनहरा मौका' हो सकता है, लिहाजा ताइवान को हर एक सेकंड सतर्क रहने की जरूरत है।

ताइवान के पास कितनी शक्ति?
ताइवान एक छोटा देश है, लिहाजा उसके पास सैन्य शक्ति तो कम है और चीन के मुकाबले कुछ भी नहीं है, लेकिन ताइवान को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन का मजबूती से समर्थन मिला हुआ है। ताइवान की रक्षा के लिए हमेशा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर साउथ चायना सी में रहता है और इस वक्त अमेरिका के साथ साथ जापान और ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी भारी हथियारों के साथ साउथ चायना सी में मौजूद हैं। ताइवान के राष्ट्रपति का भी मानना है कि, ताइवान जितना ज्यादा दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, चीन उतना ज्यादा प्रेशर बनाता है। लेकिन, अब जबकि रूस, यूक्रेन पर हमला कर चुका है, ताइवान काफी ज्यादा प्रेशर में है।












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