तनाव के बीच चीन की सेना ने तिब्बत के पहाड़ों में किया बड़ा सैन्य अभ्यास
नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच जिस तरह से 15 जून को हिंसक झड़प हुई उसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ऐसे माहौल में चीन ने तिब्बत में अपनी लाइव-फायर ड्रिल को शुरू कर दिया है। चीन की स्टेट मीडिया ने इस बाबत जानकारी दी है। यह ड्रिल चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए ने तिब्बत के सैन्य क्षेत्र में तकरीबन 4700 मीटर उंचे एक पठार पर लगभग 7000 सैनिकों के साथ की है। इस अभ्यास में तोप, मिसाइल, विमान,र इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, इंजीनियरिंग और विशेष बल शामिल थे।

अभ्यास में टैंक और ड्रोन भी शामिल
पीएलए के अनुसार इस अभ्यास में टैंक और ड्रोन भी शामिल थे। चीनी मीडिया की रिपोर्ट जोकि मंगलवार को प्रकाशित हुई, उसके अनुसार यह अभ्यास हाल के दिनों में किया गया है, हालांकि इसकी सही तारीख के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। तिब्बत सैन्य क्षेत्र ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए कहा कि ब्रिगेड इस क्षेत्र में एकमात्र भारी मशीन मिश्रित ब्रिगेड है। जिसने भारत के साथ 2017 में डोकलाम गतिरोध के दौरान एक पुनर्गठन किया था।

शांति स्थापना की कोशिशें तेज
बता दें कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि, चीन ने भारत के साथ सीमा पर झड़प का मुद्दा निष्पक्ष तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई है।

तनाव कम करें
चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह जितनी जल्दी संभव हो पीछे हटने और तनाव कम करने की कोशिश करेगा। इसी बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने समकक्ष चीनी विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर इस घटनाक्रम को लेकर बातचीत की है। गलवान घाटी में हिंसा पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी को सख्त संदेश दिया है। जयशंकर ने यी से कहा- गलवान में जो हुआ, वह पूर्वनियोजित और योजनाबद्ध था, इसी के वजह से सारी घटनाएं हुईं।

चीन की मांग
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दे, भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण करने की भी दी सलाह। हालांकि भारत की ओऱ से भी चीन से इस मामले में की जांच करने के लिए कहा है। वांग ने जयशंकर से कहा कि भारत और चीन को उन महत्वपूर्ण सहमतियों का पालन करना चाहिए, जिन पर दोनों देशों के नेता सहमत हुए हैं। वांग ने जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मतभेदों को सुलझाने के लिए मौजूदा तंत्र के माध्यम से संचार और समन्वय मजबूत करना चाहिए।












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