ताइवान के चारो ओर ड्रैगन की आर्मी की 'Punishment Drill', सेना-नौसेना- वायुसेना-रॉकेट बल, सभी शामिल
चीन और ताइवान के बीच संप्रभुता को लेकर विवाद बरकरार है। इस बीच चीन ने ताइवान के पास दो दिन का विशाल दंड अभ्यास (Punishment Drill) शुरू कर दिया हैा। इस ड्रिल में चीन की सेना, नौसेना, वायुसेना और रॉकेट बल भी शामिल हैं।
चीन ने यह ड्रिल ताइपे के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के चयन के बाद यहां अलगाववादी कृत्यों को देखते हुए शुरू किया है। दरअसल ताइपे के राष्ट्रपति लाई चिंग ने चीन के स्वामित्व को इनकार कर दिया है।

चाइनीज पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ईस्टर्न थिएटर कमांड ने यह साझा ड्रिल ताइवान के पास आज सुबह तकरीबन 7.45 बजे शुरू किया। चीन ताइवान को विद्रोही प्रांत के तौर पर देखता है, चीन का मानना है कि वह एक बार फिर से ताइवान को चीन में शामिल कर सकता है, फिर इसके लिए सेना की ही मदद क्यों ना लेनी पड़ी।
पीएलए ईस्टर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता ली शी ने कहा कि इस ड्रिल में अलगाववादियों को सख्त सजा भी शामिल है। यह ड्रिल ताइवान स्वतंत्रता बलों के अलगाववादी कृत्यों के लिए बड़ी सजा देने के साथ, बाहरी ताकतों का इसमे हस्तक्षेप, उकसावे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के रूप में काम करेगा।
अलगाववादी गतिविधियों को जवाब देने के लिए चीनी सेना ने इस ड्रिल को शुरू किया है। चीन ने यह ड्रिल ऐसे समय में शुरू की है जब यहां राष्ट्रपति लाई चिंग ने शपथ ली है। लाई चिंग को चीन का कट्टर विरोधी माना जाता है।
ताइवान के चारो तरफ ड्रिल शुरू
ईस्टर्न थिएटर कमान की ओर से कहा गया है कि इस ड्रिल को सुबह 7.45 बजे शुरू किया गया है। इसे ताइवान स्ट्रेट, उत्तर, दक्षिण और पूर्वी ताइवान के साथ आसपास के ताइवान नियंत्रण वाले द्वीपों पर शुरू किया गया है। जिसमे किन्मेन, मात्सू, वुकिउ, डोंगियन शामिल हैं।
चीन की इस ड्रिल की ताइवान ने निंदा की है। ताइवान ने कहा कि इस ड्रिल से ताइवान स्ट्रेट की शांति और स्थिरता बाधित होगी। चीन की इस ड्रिल से उसकी सैन्य मानसिकता भी सामने आई है।
धमकाना बंद करें
बता दें कि ताइवान पर चीन दावा करता है, लेकिन राष्ट्रपति लाई चिंग ने चीन के इस दावे की निंदा की है। उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति हमें धमकाना बंद करें। ताइवान के लोगों के अलावा यहां के भविष्य का फैसला कोई नहीं लेगा। ताइवान ने चीन से बातचीत की कई बार पेशकश की है लेकिन चीन ने इसे ठुकरा दिया है।
गौर करने वाली बात है कि ताइवान 1949 को चीन से अलग हुआ था। इससे पहले ताइवान चीन एक ही थे। लेकिन कम्युनिस्ट सरकार आने के बाद कॉमिंगतांग के लोग भागकर ताइवान पहुंच गए थे।
1949 में बने दो देश
1949 में चीन का नाम पीपुल्स रिपबल्कि ऑफ चाइना हुआ और ताइवान का नाम रिपब्लिक ऑफ चाइना हुआ। दोनों ही देश एक दूसरे को मान्यता नहीं देते हैं। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, यही वजह है कि दोनों देशों के बीच अक्सर युद्ध के हालात बने रहते है।
आसान नहीं ही ताइवान पर कब्जा
ताइवान के पास अत्याधुनिक हथियार, मोबाइल मिसाइल सिस्टम के साथ अमेरिका का साथ है। अमेरिका साफ कह चुका है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो वो ताइवान का साथ देगा। ऐसे में चीन के लिए ताइवान को अपने अधिकार में लेना आसान नहीं है।












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